Aliscience https://aliscience.in Educational Videos and Notes Mon, 30 Nov 2020 14:29:52 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.5.3 https://aliscience.in/wp-content/uploads/2019/10/cropped-aliscience.in-favicon-1-1-32x32.png Aliscience https://aliscience.in 32 32 180670860 लाइसोसोम का निर्माण तथा कार्य https://aliscience.in/function-of-lysosome/ https://aliscience.in/function-of-lysosome/#respond Mon, 30 Nov 2020 14:29:52 +0000 https://aliscience.in/?p=10807 लाइसोसोम (Lysosome) Lysosome शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों Lyso तथा Soma से बना है। लाइसो का अर्थ पाचक तथा सोमा का अर्थ काय है यानि Lysosome का अर्थ पाचक काय या लयन काय है। लाइसोसोम की खोज डी डवे (De Duve) ने की थी। एलेक्स नोविकॉफ़ (Alex Novikoff ) ने इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप द्वारा कोशिका […]

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लाइसोसोम (Lysosome)

Lysosome शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों Lyso तथा Soma से बना है। लाइसो का अर्थ पाचक तथा सोमा का अर्थ काय है यानि Lysosome का अर्थ पाचक काय या लयन काय है।

लाइसोसोम की खोज डी डवे (De Duve) ने की थी। एलेक्स नोविकॉफ़ (Alex Novikoff ) ने इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप द्वारा कोशिका में लाइसोसोम को देखा तथा इसे लाइसोसोम नाम दिया।

यह एकल झिल्ली आबंध कोशिकांग है, जिसमें प्रचुर मात्रा में अम्लीय हाइड्रॉलेज एंजाइम पाए जाते है जो सभी प्रकार के जैविक बहुलक यानी कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड, और न्यूक्लिक अम्लों का पाचन है।

अम्लीय हाइड्रॉलेज एंजाइम को कार्य के लिए अम्लीय वातावरण (pH~5) की आवश्यकता होती है। जो H+ ATPase द्वारा प्रदान की जाती है। Lysosome में V प्रकार ATPase पंप होते है।

function of lysosome in hindi लाइसोसोमयह प्रोकैरियोटिक कोशिका और परिपक्व आरबीसी को छोड़कर सभी कोशिकाओं में पाया जाता है। भक्षकाणु कोशिकाओं में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

उच्च श्रेणी पादपों में यह कम पाया जाता है।

 

लाइसोसोम का निर्माण (Formation of Lysosome)

अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) और गॉल्जी काय (Golgi body) के द्वारा लाइसोसोम का निर्माण के द्वारा होता है।

अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) के द्वारा  लाइसो सोम के एंजाइमों का निर्माण होता है। तथा चारों ओर की झिल्ली का निर्माण गॉल्जी काय द्वारा होता है।

लाइसो सोम के प्रकार (Types of Lysosome)

सामान्तया लाइसोसोम के चार प्रकार होते हैं: –

  1. प्राथमिक लाइसो सोम (Primary lysosome)
  2. द्वितीयक लाइसोसोम (Secondary Lysosome)
  3. अवशिष्ट काय (Residual body)
  4. ऑटोफैगोसोम (Autophagosomes)

 

 

  1. प्राथमिक लाइसोसोम (Primary lysosome)

जब लाइसोसोम का निर्माण होता है तो इसमें अम्लीय हाइड्रॉलेज निष्क्रिय रूप में जमा होता है। यह अम्लीय हाइड्रोलेज अम्लीय माध्यम में ही कार्य करता है। इसे भंडारण कणिकाएँ (Storage Granules) भी कहते है।

  1. द्वितीयक लाइसोसोम (Secondary Lysosome)

यह प्राथमिकलाइसोसोम और फैगोसोम या रिक्तिका के संलयन द्वारा बनता है। इन्हें पाचक रिक्तिकाएँ (Digestive Vacuoles) और हेटरोफेगोसोम (Heterophagosome) भी कहा जाता है।

  1. अवशिष्ट काय (Residual body)

लाइसो सोम में अपचनीय सामग्री या अपशिष्ट सामग्री होती है, जिसे एक्सोसाइटोसिस द्वारा कोशिका से बाहर निकला है।

function of lysosome in hindi लाइसोसोम

लिपोफ्यूसिन कण (Lipofuscin granule)- अवशिष्ट काय को एक्सोसाइटोसिस द्वारा कोशिका से निकाला जाता है या लिपोफ्यूसिन कण के रूप में जीवद्रव्य के भीतर रखा जाता है।

  1. ऑटोफैगोसोम (Autophagosomes)

वह Lysosome जिसके द्वारा स्वयं की कोशिका के कोशिकांगों को अघटित किया जाता है। ऑटोफैगोसोम या साइटोलाइसोसोम कहलाता है।

 

लाइसोसोम से सम्बंधित रोग (Disease Related to Lysosome)

  1. गुचर रोग (Gaucher’s disease)
  2. पोम्पेस रोग (Pompe’s disease)
  3. टे-सेक रोग (Tay-Sachs disease)

 

लाइसोसोम के कार्य (Functions of Lysosome)

  1. फागोसाइटोसिस या पिनोसाइटोसिस के माध्यम से कोशिका में प्रवेश करने वाले कणों का पाचन करना। इसे हेटरोफैगी (Heterophagy) कहते है।
  2. कोशिका के आंतरिक पदार्थो का पाचन करना। इसे ऑटोफैगी कहते है।
  3. ऑटोलाइसिस प्रक्रिया से पुरानी कोशिकाओं और संक्रमित कोशिकाओं नष्ट किया जाता हैं। कोशिका के सभी लाइसो सोम फट जाते है जिससे इसके सभी पाचक एंजाइम कोशिकांगों को पचाने लगते हैं। इसलिए इसे कोशिका की आत्मघाती थैली (Suicidal bag of the cell) भी कहते है।

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धातुओं का निष्कर्षण https://aliscience.in/extraction-of-matal-metallurgy-hindi/ https://aliscience.in/extraction-of-matal-metallurgy-hindi/#comments Sat, 28 Nov 2020 10:59:48 +0000 https://aliscience.in/?p=10780 धातुओं का निष्कर्षण या धातुकर्म (Extraction of Matal or Metallurgy) अयस्क से शुद्ध अवस्था में धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातु निष्कर्षण (extraction of matal) अथवा धातुकर्म  (metallurgy) कहते हैं। अयस्कों से धातुओं के निष्कर्षण निम्न चरणों में होता हैं- अयस्कों का संक्षोंदन या चूर्णीकरण (Pulverization of ores) अयस्क का सांद्रण या समृद्धिकरण (Concentration of […]

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धातुओं का निष्कर्षण या धातुकर्म (Extraction of Matal or Metallurgy)

अयस्क से शुद्ध अवस्था में धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातु निष्कर्षण (extraction of matal) अथवा धातुकर्म  (metallurgy) कहते हैं।

अयस्कों से धातुओं के निष्कर्षण निम्न चरणों में होता हैं-

  1. अयस्कों का संक्षोंदन या चूर्णीकरण (Pulverization of ores)
  2. अयस्क का सांद्रण या समृद्धिकरण (Concentration of ore)
  3. सांद्रित अयस्क का धातु ऑक्साइड में परिवर्तन (Conversation of concentrated ore into metal oxide)
  4. धातु ऑक्साइड का धातु में परिवर्तन (Conversion of metal oxide into metal )
  5. अयस्कों में धातु निष्कर्षण की अन्य विधियाँ (other methods of extraction of metal from their ores )
  6. धातुओं का शुध्दिकरण (purification or refining of metals )

 

 

अयस्कों का संक्षोदन या चूर्णीकरण (Pulverization of ores)

खान से निकले अयस्क के बड़े–बड़े टुकड़ों को पीसकर चूर्ण बनाना संक्षोदन (Pluverization) कहलाता है।

यह क्रिया दलित्र (crusher) में की जाती है। दलित्र दो पाटों के मध्य अयस्क को दबा कर छोटे–छोटे टुकड़ों में बदला जाता है।

दलित्र से प्राप्त अयस्क को स्टेम्प मिल में डालकर चूर्ण बनाया जाता है। ये स्टेम्प मिल ओखली (Mortar) की तरह कार्य करते हैं, जहाँ अयस्क के टुकड़ों पर मुसल की चोट पडती है तथा अयस्क चूर-चूर हो जाता है।

अयस्क का सांद्रण या समृद्धिकरण (Concentration of ore)

खान से निकले गये अयस्क में सामान्यतया अशुद्धियाँ जैसे कंकड़, मिटटी, रेत, क्ले आदि की अशुद्धियाँ पायी जाती है। इन अशुद्धियों को आधात्री या गेंग (Gang or Matrix) कहा जाता है।

चूर्णित अयस्क से गेंग को पृथक करना अयस्क का सांद्रण (Concentration of ore) कहलाता है।

 

अयस्क के प्रकार के आधार पर अयस्क का सांद्रण निम्नलिखित विधियों में से किसी एक विधि द्वारा किया जाता है –

  1. गुरुत्वीय पृथक्करण विधि (gravity separation method)
  2. झाग / फेन प्लवन विधि (froath floatation process)
  3. विद्युत चुम्बकीय पृथक्करण विधि (Electro-magnetic separation process)
  4. निक्षालन या रासायनिक विधि (Chemical method)

1. गुरुत्वीय पृथक्करण विधि (gravity separation method )

भारी ऑक्साइड अयस्क के सान्द्रण हेतु यह विधि उपयुक्त है। इसे द्रवीय धावन विधि भी कहते है। इस विधि में चूर्णित अयस्क को ढलवा प्लेटफार्म पर रख देते हैं तथा उस पर जल की प्रबल धारा प्रवाहित करते हैं। अयस्क के कण भारी होने के कारण वहीं रह जाते हैं तथा गेंग के कण हल्के होनी के कारण पानी के साथ बह जाते हैं।

2. झाग / फेन प्लवन विधि (froath floatation process)

सल्फाइड अयस्कों जैसे – काँपरपइराइटीज, जिंक ब्लेड आदि के सांद्रण के लिए विशेष रूप से यह विधि उपयुक्त है।

तेल और जल के मिश्रण में सल्फाइड अयस्क को डालने पर सल्फाइड अयस्क कण तेल द्वारा तथा अयस्क में उपस्थित गेंग के कण जल द्वारा भीग जाते हैं। इस मिश्रण में वायु प्रवाहित करने पर अयस्क के सल्फाइड कण तैलीय झाग के साथ सतहपर आ जाते हैं तथा गेंग के कण निचे बैठ जाते हैं।

इस में दो प्रकार के पदार्थ प्रयुक्त होते हैं-

(i) झाग कारक

(ii) प्लवन कारक

 

झाग कारक या फेन-स्थायीकारी

वे पदार्थ जो हवा में बुलबुले अथवा झाग बनाने में मदद करते हैं, झाग कारक कहलाते हैं। जैसे – चीड़ का तेल, यूकेलिप्टस का तेल, वसा अम्ल, जैंथेट आदि।

प्लवन कारक या संग्राही

वे पदार्थ जो सल्फाइड अयस्क के कणों को सतह पर लाने तथा उन्हें जल से प्रतिकर्षी बनाने में मदद करते हैं, प्लवनकारक कहलाते हैं । जैसे सोडियम एथिल जैन्थेट , पोटेशियम एथिल जैन्थेट।

बारीक़ पिसे हए अयस्क तथा प्लवन कारक के मिश्रण को पानी से भरे आयताकार बर्तन में दल दिया जाता हैं। इसमें चीड़ का तेल अथवा तारपीन का तेल मिला दिया जाता है तथा वायु की प्रबल धारा प्रवाहित की जाती है।  सल्फाइड अयस्क कण तेल में भीगकर झाग के साथ साथ प्लवन कारक की सहायकता से ऊपर उठ जाते है। जबकि आधात्री या गेंग के कण जल से भीगकर टेंक के पेंदे में बैठ जाते हैं।

झाग अथवा फेन को अन्य पात्र में इकठ्ठा कर सुखा लिया जाता है। इस प्रकार सांद्रित अयस्क प्राप्त हो जाता है।


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3. विद्युत चुम्बकीय पृथक्करण विधि (Electro-magnetic separation process)

इस विधि का उपयोग उन अयस्कों के लिए किया जाता है। जिनमें अयस्क अचुम्बकिय तथा अशुद्धियाँ चुम्बकिय हों या इसके विपरीत अयस्क चुम्बकिय एंव अशुद्धियाँ अचुम्बकीय होती हैं।

उदाहरण

टिनस्टोन या टिन अयस्क में टिनस्टोन अयस्क स्वंय अचुम्बकीय होता है , जबकि उसमें उपस्थित आधात्री लोहा और मैंग्नीज टंगस्टेटस चुम्बकीय होते हैं।  चूर्णित अयस्क को विद्युत चुम्बकीय रोलर के ऊपर घूमते हुए पटटे पर गिराया जाता है।  चुम्बकीय अशुद्धियों की पट्टे से गिरकर आकर्षण के कारण चुम्बकीय रोलर के पास इकठ्ठे हो जाते है। जबकि अचुम्बकीय सांद्रित अयस्क कणों का ढेर अपकेंद्री बल के प्रभाव के कारण चुम्बकीय पट्टे से कुछ दुरी पर लगता है।

4. रासायनिक विधि (Chemical method)

यदि अयस्क बहुत ही शुद्ध रूप में है इस विधि को इस्तेमाल किया जाता है। इस विधि को निक्षालन भी कहते है।  जैसे-

(A) बॉक्साइट अयस्क से एलुमिना का निक्षालन

बॉक्साइट अयस्क में SiO2, TiO2 और Fe2O3 की अशुद्धियाँ होती हैं।

जब बॉक्साइट के चूर्णित अयस्क को NaOH के साथ मिलाया जाता है, तो Al2O3 सोडियम एलुमिनेट के रूप में, SiO2 सोडियम सिलिकेट में बदल जाता है, जबकि इस प्रकार बॉक्साइट के चूर्णित अयस्क से अघुलनशील अशुद्धियाँ पृथक हो जाती हैं, जिन्हे छान कर अलग कर लिया जाता हैं।

Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O

छनित का तनुकरण करने के बाद अच्छी तरह से हिलाने पर एलुमिनियम हाइड्रोक्साइड अवक्षेपित हो जाता है, जिसे छान कर अलग लिया जाता हैं।

अवक्षेप को गर्म करने पर शुद्ध एलुमिना प्राप्त हो जाता है।

NaAlO2 + 2H2O → Al(OH)2 + NaOH

2Al(OH)3 → Al2O3 + 3H2O

(B) अर्जेंटाइट अयस्क का निक्षालन

चांदी को अयस्क अर्जेंटाइट (Ag2S) से निकाला जाता है।

चांदी के चूर्णित अयस्क अर्जेंटाइट को वायु की उपस्थिति में सोडियम साइनाइड या पोटैशियम साइनाइड घोल से उपचारित किया जाता है। जिससे सोडियम अर्जेंटो साइनाइड Na[Ag(CN)2 बनाती है।

Ag2S + 4NaCN ⇌ 2Na[Ag(CN)2]+ Na2S

सोडियम अर्जेंटो साइनाइड के घोल को जिंक चूर्ण के साथ मिलाने पर सोडियम टेट्रा सायनोजिकेट और चाँदी का अवक्षेप बनाता है। इस अवक्षेपित चांदी को स्पंजी सिल्वर कहा जाता है।

Zn + 2Na[Ag(CN)2] → Na2[Zn(CN)4]+ 2Ag

उपरोक्त विधि सोने के धातुकर्म में सोने के निक्षालन में होती है।


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बीकानेर से सम्बंधित जनरल नॉलेज https://aliscience.in/general-knowledge-about-bikaner/ https://aliscience.in/general-knowledge-about-bikaner/#respond Sat, 28 Nov 2020 08:02:17 +0000 https://aliscience.in/?p=17137 बीकानेर से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Bikaner)Bikaner की स्थापना जोधपुर के राजा राव जोधा के बेटे राव बीका ने 1465 ईस्वी में की थी। बीकानेर को जंगल देश, ऊन का घर, राती घाटी तथा बिकाणा, ऊँटों का देश आदि नाम से जाना जाता है। बीकानेर के प्रमुख स्थल (major places of Bikaner) कोलायत […]

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बीकानेर से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Bikaner)
Bikaner की स्थापना जोधपुर के राजा राव जोधा के बेटे राव बीका ने 1465 ईस्वी में की थी। बीकानेर को जंगल देश, ऊन का घर, राती घाटी तथा बिकाणा, ऊँटों का देश आदि नाम से जाना जाता है।

Contents

बीकानेर के प्रमुख स्थल (major places of Bikaner)

कोलायत

यह महर्षि कपिल की तपोभूमि है। महर्षि कपिल को सांख्य दर्शन का प्रणेता कहते हैं।
यहां पर कोलायत झील स्थित है। कोलायत में कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेला लगता है।

मुकाम

विश्नोई समाज के संस्थापक जाम्भोजी की तपोभूमि मुकाम कहलाती है। यह बीकानेर के नोखा कस्बे से 15 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव है। यहां पर फाल्गुन माह में विशाल मेला लगता है।

सोथी

बीकानेर के इस स्थान पर हड़प्पा युगीन अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहां पर अमलानंद घोष के नेतृत्व में खुदाई का कार्य किया गया।
सोथी को कालीबंगा प्रथम भी कहा जाता है।

देशनोक

यहां पर करणी माता का विशाल मंदिर स्थित है। जिसे चूहों का मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर में चैत्र माह के नवरात्रि तथा आश्विन माह में विशाल मेला लगता है।

गजनेर अभयारण्य

बीकानेर जिले में लगभग 16 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में यह अभ्यारण फैला हुआ है। यहां पर जंगली सूअर तथा बटबड़ पक्षी विशेष प्रसिद्ध है। बटबड़ पक्षी को रेत का तीतर भी कहा जाता है।

गंगा गोल्डन जुबली म्यूजियम

यह एक संग्रहालय है जो बीकानेर में स्थित है। इसका उद्घाटन 5 नवंबर 1937 को गवर्नर जनरल लॉर्ड लिनलिथगो ने किया था।

रानेरी

बीकानेर के इस गांव में देश का प्रथम लिग्नाइट आधारित बिजली घर स्थापित किया गया है। जो मरुधर पावर प्राइवेट लिमिटेड की सहायता से स्थापित किया गया है।

बरसिंगसर

इस स्थान पर 27 अक्टूबर 2006 से लिग्नाइट आधारित बिजली घर स्थापित किया गया है। जो नेवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन के द्वारा स्थापित किया गया है।

डाडाथोरा

यहां पर खुदाई के दौरान लघु पाषाण काल की पुरातात्विक वस्तुएं प्राप्त हुई है। जो ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

झज्झर

बीकानेर के कस्बे में निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी जोजोबा (होहोबा) प्लांटेशन परियोजना प्रारंभ की गई है।

 

बीकानेर के प्रमुख धार्मिक स्थल (major religious places of Bikaner)

भांडासर जैन मंदिर

इस जैन मंदिर की स्थापना शाह भांडा ने की थी। यह जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर भगवान सुमति नाथ जी का मंदिर है।

यह सैकड़ों मन देसी घी की नींव पर बना मंदिर है। यहां पर सुमति नाथ जी की संगमरमर से बनी श्वेत आदम कद मूर्ति स्थापित है। इसे त्रिलोक दीपक प्रासाद मंदिर भी कहा जाता है।

चूहों का मंदिर

यह देशनोक में स्थित करणी माता का मंदिर है।

हेरम्ब गणपति

यहां पर 33 करोड़ देवता मंदिर है। इसमें गणेश जी चूहे पर सवार ना होकर शेर पर सवार है।

भंडेश्वर-संडेश्वर मंदिर

यह जैन समाज का मंदिर है‌।

भेरुजी का मंदिर

यह बीकानेर के कोडमदेसर नामक स्थल पर स्थित है।

देवी कुंड

कल्याण सागर के पास राजघराने का निजी श्मशान घाट देवी कुंड नाम से जाना जाता है।

 

बीकानेर से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Bikaner)

बीकानेर से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Bikaner)

 

बीकानेर के प्रमुख भवन एवं किले

जूनागढ़ का किला

इसे बीकानेर का किला भी कहा जाता है। यह लाल पत्थरों से बना हुआ है। इसका निर्माण राजा राय सिंह ने करवाया था। परंतु इसकी नींव राव बीकाजी ने रखी थी।

इसमें करण पोल व सूरजपोल नामक दो द्वार है। इसके दरवाजे के दोनों तरफ जयमल और पत्ता की गजारुड मूर्तियां स्थापित है। जो चित्तौड़गढ़ में वीरगति प्राप्त हुए थे।

रामपुरिया हवेली

यह हवेली हिंदू मुस्लिम तथा यूरोपीय कला का समन्वय के लिए प्रसिद्ध है।

लालगढ़ महल

इस महल का निर्माण गंगा सिंह ने अपने पिता लाल सिंह की स्मृति में करवाया था। वर्तमान में इस महल में अनूप संस्कृत पुस्तकालय तथा सादुल संग्रहालय स्थित है।

गजनेर महल

राजा गज सिंह के द्वारा इसका निर्माण करवाया गया था। यह तीतरों के लिए प्रसिद्ध है। राजा गज सिंह ने अकाल के दौरान अकाल से बचने के लिए गजनेर झील व गजनेर महल का निर्माण करवाया था।

 

बीकानेर की प्रमुख झीलें

कोलायत झील

यह महर्षि कपिल की तपोभूमि है।

लूणकरणसर झील

यह बीकानेर से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित है्।

गजनेर झील

यह गजनेर महल के पास स्थित है। इसका निर्माण राजा गज सिंह ने करवाया था। यह पानी का शुद्ध दर्पण नाम से प्रसिद्ध है।

  • अनूपसागर झील
  • सूरसागर झील

 

राजस्थान राज्य अभिलेखागार संस्थान

इसकी स्थापना सन 1955 ईस्वी में की गई थी। इस लेखाकार में अभिलेखागार में 21 देशी रियासतों का लगभग 4 सदियों का रिकॉर्ड सुरक्षित है।

उस्ताद

भित्ति चित्र करने वाले चित्रकारों को बीकानेर में उस्ताद कहा जाता है

बीकानेर की विधानसभाएं

Bikaner में सात विधानसभाएं हैं, जो निम्न है –

  1. बीकानेर पश्चिम
  2. बीकानेर पुर्व
  3. कोलायत
  4. डूंगरगढ़
  5. लूणकरणसर
  6. नोखा
  7. खाजूवाला

लिफ्ट नहर परियोजना

बीकानेर जिले को जल प्राप्ति के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना की चार लिफ्ट नहर ए बनाई गई है जो बीकानेर में स्थित है-

  1. वीर तेजाजी लिफ्ट नहर (बांगड़सर)
  2. पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर (गजनेर)
  3. करणीसिंह लिफ्ट नहर (कोलायत)
  4. कंवर सेन लिफ्ट नहर (लूणकरणसर)

इन्हें भी पढ़ें

बाहरी कड़ियाँ

 

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चूरू से सम्बंधित जनरल नॉलेज https://aliscience.in/general-knowlege-about-churu/ https://aliscience.in/general-knowlege-about-churu/#respond Fri, 27 Nov 2020 14:25:22 +0000 https://aliscience.in/?p=17132 चूरू से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Churu) चूरू उत्तरी राजस्थान का एक रेगिस्तानी जिला है। इसकी स्थापना चूहड़ा नामक जाट ने की थी। यह सर्वाधिक तापांतर वाला जिला है। चूरू के प्रमुख स्थल (Major places of Churu) ददरेवा यह लोक देवता गोगा जी का जन्म स्थल है। यह चूरू के सादुलपुर के राजगढ़ […]

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चूरू से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Churu)

चूरू उत्तरी राजस्थान का एक रेगिस्तानी जिला है। इसकी स्थापना चूहड़ा नामक जाट ने की थी। यह सर्वाधिक तापांतर वाला जिला है।

Contents

चूरू के प्रमुख स्थल (Major places of Churu)

ददरेवा

यह लोक देवता गोगा जी का जन्म स्थल है। यह चूरू के सादुलपुर के राजगढ़ कस्बे से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित है।

सालासर

यह स्थान सालासर के बालाजी नामक मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह कहा जाता है, कि मोहनदास नामक किसान के द्वारा इस मंदिर की स्थापना की गई उनको 1737 ईस्वी में असोटा गांव में अपने खेत में हल चलाते समय दाढ़ी मूछ युक्त बालाजी की मूर्ति प्राप्त हुई थी। जिसके कारण सालासर के बालाजी का मंदिर प्रसिद्ध है।

यहां पर हनुमान जी की दाढ़ी में एक भव्य हीरा लगा हुआ है।यह स्थान सिद्ध हनुमत पीठ माना जाता है। साथ ही यहां राजस्थान राज्य का प्रथम सहकारी क्षेत्र का महिला मिनी बैंक स्थापित किया गया है।

सुजानगढ़

यहां का बंधेज कार्य प्रसिद्ध है। यहां छिपों के द्वारा बंधेज का कार्य किया जाता है। जिनमें मुबारक जी व खाजु जी छिपा नामिक बंधेज कारीगर है।

सयानण

सयानण नामक स्थान पर डूंगरी पर स्थित काली माता का मंदिर प्रसिद्ध है।

गोपालपुरा

यह चूरू के तहसील सुजानगढ़ में स्थित है। इसको महाभारत के समय द्रोणपुर के नाम से जाना जाता था। गुरु द्रोणाचार्य के द्वारा इसकी स्थापना की गई थी।

साहवा

चुरू के साहवा नामक स्थान पर सिखों का प्रसिद्ध गुरुद्वारा है। यह गुरुद्वारा गुरु नानक देव तथा गुरु गोविंद सिंह के आने व रहने का स्थान था। यहां पर कार्तिक पूर्णिमा को विशाल मेला लगता है।

दूधवाखारा

चुरू का दूधवाखारा नामक स्थान किसान आंदोलन के लिए प्रसिद्ध है यहां पर दूधवाखारा किसान आंदोलन हुआ था जिसका नेतृत्व वैद्य मगाराम जी, रघुवर दयाल गोयल जी तथा हनुमान सिंह आर्य के द्वारा किया गया था।

ताल छापर

ताल छापर नामक स्थान पर कृष्ण मृग अभयारण्य है। जो काले हिरणों के लिए प्रसिद्ध है। तथा साथ ही यहां पर वर्षा ऋतु में मोतिया साइप्रस रोटन्डस नामक नर्म घास उगती है। इनके अलावा इस अभयारण्य में हिरण, कुरजां, राजहंस गोयरा पाइड हरीयर आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।

श्री शोध संस्थान

इसकी स्थापना 1964 ईस्वी में सुभाष कुमार अग्रवाल ने की थी। यह लोक संस्कृति नगर श्री शोध संस्थान नाम से प्रसिद्ध है। यहां पर प्राचीन सिक्के मूर्तियां पुस्तकें आदि प्रसादी दुर्लभ चीजें संग्रहित है।

 

 

चूरू के प्रसिद्ध किले एवं भवन (Famous forts and buildings of Churu)

चूरू का किला

इसका निर्माण ठाकुर कुशल सिंह ने 1739 ईसवी में करवाया था। इस किले के बारे में यह प्रसिद्ध है कि युद्ध के दौरान गोला-बारूद खत्म होने पर चांदी के गोले दागे गए थे।

इसमें गोपीनाथ जी का मंदिर तथा नो बुर्ज विद्यमान है।

बिनादेसर का किला

इसका निर्माण 1757 ईस्वी में ठाकुर दूल्हे सिंह के द्वारा करवाया गया था। ठाकुर दूल्हे सिंह बीकानेर के राजा गंगा सिंह का दीवान था।

मालजी का कमरा

1974-1982 विक्रमी सावंत के मध्य सेठ माल चंद कोठारी द्वारा 30 फीट ऊंचे हॉल का निर्माण करवाया गया। जहां पर शादी विवाह का कार्यक्रम होता है। इसे मालजी का कमरा कहते हैं।

लाल घंटाघर

यह चूरू के इंद्रमणि पार्क पार्क के पास स्थित है। इसे धर्म स्तूप भी कहा जाता है। 26 जनवरी 1930 को यहां पर चंदन मल बहड़ के द्वारा तिरंगा झंडा फहराया गया था।

सुराणा हवेली

रामविलास गोयनका की हवेली

चूरू से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Churu)

चूरू से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Churu)

 

चूरू के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल (Famous religious places of Churu)

सालासर बालाजी का मंदिर

यह सुजानगढ़ तहसील के सालासर में स्थित है।

तिरुपति बालाजी का मंदिर

इसे वेंकटेश्वर मंदिर भी कहा जाता है। यह सुजानगढ़ में स्थित है। जिसका निर्माण सोहनलाल जानोदिया के द्वारा करवाया गया।

स्यानण का मंदिर

साहवा का गुरुद्वारा

 

चूरू की विधानसभाएं (Assemblies of Churu)

चुरू जिले में छः विधानसभा में हैं। जो निम्न है-

  1. चूरू
  2. रतनगढ़
  3. सुजानगढ़
  4. सरदारशहर
  5. सादुलपुर
  6. तारानगर

चूरू से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Churu)

प्रसिद्ध उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल जो राजगढ़ के निवासी थे। ने राजगढ़ के गांव को पीने का पानी प्रदान करने के लिए जलधारा प्रोजेक्ट Jaladhara project चलाया है।

 

इन्हें भी पढ़ें

 

बाहरी कड़ियाँ

 

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अधिगम के सिद्धांत तथा नियम https://aliscience.in/theories-and-law-of-learning-hindi/ https://aliscience.in/theories-and-law-of-learning-hindi/#comments Thu, 26 Nov 2020 08:34:49 +0000 https://aliscience.in/?p=10777 अधिगम के सिद्धांत तथा नियम (Theories and Law of Learning) शिक्षा-मनोवैज्ञानिकों में अपने प्रयोग तथा अध्ययन के आधार पर अधिगम के सिद्धांतों तथा नियमों का प्रतिपादन किया  जो निम्न हैं-   व्यवहारवाद सिद्धांत (Theory of behaviorism) अनुबंधन सिद्धांत (Conditioning Theory) क्रिया-प्रसूत सिद्धांत (Action-delivery principle) गेस्टाल्टवाद सिद्धांत (Theory of Gestalt) सामाजिक अधिगम वाद (Theory of Social […]

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अधिगम के सिद्धांत तथा नियम (Theories and Law of Learning)

शिक्षा-मनोवैज्ञानिकों में अपने प्रयोग तथा अध्ययन के आधार पर अधिगम के सिद्धांतों तथा नियमों का प्रतिपादन किया  जो निम्न हैं-

 

  1. व्यवहारवाद सिद्धांत (Theory of behaviorism)
  2. अनुबंधन सिद्धांत (Conditioning Theory)
  3. क्रिया-प्रसूत सिद्धांत (Action-delivery principle)
  4. गेस्टाल्टवाद सिद्धांत (Theory of Gestalt)
  5. सामाजिक अधिगम वाद (Theory of Social Learning)
  6. पुनर्बलन सिद्धांत (Theory of Reinforcement)
  7. मानवतावादी सिद्धांत (Humanistic Theory of Learning)
  8. चिह्न का सिद्धांत (Sign Theory of Learning)
  9. क्षेत्र सिद्धांत (Field Theory of Learning)
  10. प्रसूति सिद्धांत (Contiguity Theory of Learning)
  11. अनुभवजन्य वाद सिद्धांत (Experimental Learning Theory)

 

अधिगम के सिद्धांत (Theories of Learning)

व्यवहारवाद सिद्धांत (Theory of behaviorism)

व्यवहारवाद सिद्धांत के बारे में जाने के लिए-  Click here

अधिगम का व्यवहारवाद सिद्धांत

अनुबंधन सिद्धांत (Conditioning Theory)

अनुबंधन सिद्धांत के बारे में जाने के लिए-  Click here

अधिगम का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत

क्रिया-प्रसूत सिद्धांत (Action-delivery principle)

क्रिया-प्रसूत सिद्धांत के बारे में जाने के लिए-  Click here

अधिगम का क्रिया-प्रसूत सिद्धांत

 

 

गेस्टाल्टवाद सिद्धांत (Theory of Gastalt)

गेस्टाल्टवाद सिद्धांत के बारे में जाने के लिए-  Click here

गेस्टाल्टवाद या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत

 

सामाजिक अधिगम वाद (Theory of Social Learning)

गेस्टाल्टवाद सिद्धांत के बारे में जाने के लिए-  Click here

पुनर्बलन सिद्धांत (Theory of Reinforcement)

पुनर्बलन सिद्धांत के बारे में जाने के लिए-  Click here

पुनर्बलन सिद्धांत

 

अधिगम का मानवतावादी सिद्धांत (Humanistic Theory of Learning)

इस सिद्धांत का प्रतिपादन मैसलो (Abraham Harold Maslow) ने किया। इसको आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Theory of pyramid of needs) भी कहते है।

मानवतावादी सिद्धांत के अनुसार हर व्यक्ति के पास समाज में योगदान देने और एक अच्छा और पसंद किया जाने वाला व्यक्ति बनने की क्षमता है। अगर उनकी आवश्यकताएँ पूरी होती हैं।

अब्राहम मास्लो और कार्ल रोजर्स ने मानवतावादी सिद्धांत का नेतृत्व किया और मास्लो ने “जरूरतों के पिरामिड” को विकसित किया।

 

इस सिद्धांत में मैसलो ने आवश्यकताओं को दो भागों में बाँटा हैं-

प्राथमिक आवश्यकताएं (Primary Needs)
  1. शारीरिक आवश्यकता (Physiological Needs) जैसे रोटी, कपड़ा, मकान
  2. सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता (Social Safety Needs)
  3. सामाजिक संबंध (Social Relations, Belongingness & Love needs)
उच्च स्तर की या गौण आवश्यकताएं (Esteem Needs)
  1. आत्मसम्मान (Self Respect)
  2. आत्मा वास्तविकरण (Self-Actualization)

 

 

अधिगम का चिह्न का सिद्धांत (Sign Theory of Learning)

यह सिद्धांत टोलमैन (Tolman) द्वारा दिया गया। टोलमैन का सिद्धांत उत्तेजना-प्रतिक्रिया सिद्धांत(stimulus-response theories)  और संज्ञानात्मक क्षेत्र सिद्धांत (cognitive field theories) को जोड़ता है।

इसको संकेत आधारित सिद्धांत (sign significance theory) तथा उद्देश्यपूर्ण व्यवहारवाद (purposive behaviourism) भी कहा जाता है।

 

अधिगम का क्षेत्र सिद्धांत (Field Theory of Learning)

यह सिद्धांत कुर्त लेविन (Kurt Lewin) ने दिया इसके अनुसार सीखना कारको पर निर्भर करता है। सीखना व्यक्तिगत कारक एवं पर्यावरणीय कारक के गुणनफल का परिणाम है।

B=f(pe)

B = व्यवहार (Behaviour)

f = फलन (Function)

p = व्यक्तिगत कारक (Person)

e = पर्यावरणीय कारक (Envirmental factor)

इस सिद्धांत के अनुसार भय (threat), लक्ष्य (goal) और बाधा (barrier) मुख्य कारक हैं। यदि किसी व्यक्ति को लक्ष्य प्राप्त करना है, उसे बाधा को पार करना होगा।

अधिगम का प्रसूति सिद्धांत (Contiguity Theory of Learning)

यह सिद्धांत एडविन गुथरी द्वारा दिया गया। इसके अनुसार अधिगम विशेष उत्तेजना ( stimulus) और प्रतिक्रिया (response) के बीच संबंध का परिणाम है।

अनुभवजन्य वाद सिद्धांत (Expermental Learning Theory)

यह कॉल रोजर्स द्वारा दिया गया। इस सिद्धांत के अनुसार अनुभव ही सीखने का आधार है।

 

अन्य लेख


संक्षेप में अधिगम के सिद्धांत (Learning Theories)

क्र.स. सिद्धांत (Theory) प्रवर्तक मनोवैज्ञानिक
1. व्यवहारवाद सिद्धांत (Theory of behaviorism) थार्नडाइक
2. अनुबंधन सिद्धांत (Conditioning Theory) पावलोव
3. क्रिया-प्रसूत सिद्धांत (Action-delivery principle) स्किनर
4. गेस्टाल्टवाद सिद्धांत (Theory of Gestalt) मैक्स वर्दीमर, कोहलर, कोफ्का
5. सामाजिक अधिगम वाद (Theory of Social Learning) अल्बर्ट बन्डूरा
6. पुनर्बलन सिद्धांत (Theory of Reinforcement) क्लार्क हल
7. मानवतावादी सिद्धांत (Humanistic Theory of Learning) मासलो
8. चिह्न का सिद्धांत (Sign Theory of Learning) टोलमेन
9. क्षेत्र सिद्धांत (Field Theory of Learning) कुर्त लेविन
10. प्रसूति सिद्धांत (Contiguity Theory of Learning) एडविन गुथरी
11. अनुभवजन्य वाद सिद्धांत (Experimental Learning Theory) कॉल रोजर्स
12. अन्तर्नोद न्यूनता सिद्धांत (Drive Reduction Theory) क्लार्क हल

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झुंझुनू से सम्बंधित जनरल नॉलेज https://aliscience.in/general-knowlege-about-jhunjhunu/ https://aliscience.in/general-knowlege-about-jhunjhunu/#respond Wed, 25 Nov 2020 13:52:26 +0000 https://aliscience.in/?p=17118 झुंझुनू से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Jhunjhunu) झुंझुनू राजधानी दिल्ली के पास सटा हुआ एक जिला है।इसको झुझा नामक जाट द्वारा बसाया गया। परंतु इनका वास्तविक संस्थापक राव शेखा को माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता हा की कहा जाता है कि नवाब कायम खां के बेटे मुहम्मद खां ने झुंझुनूं में […]

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झुंझुनू से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Jhunjhunu)

झुंझुनू राजधानी दिल्ली के पास सटा हुआ एक जिला है।इसको झुझा नामक जाट द्वारा बसाया गया। परंतु इनका वास्तविक संस्थापक राव शेखा को माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता हा की कहा जाता है कि नवाब कायम खां के बेटे मुहम्मद खां ने झुंझुनूं में अपना राज्‍य बनाया।यह भित्ति चित्र वाली हवेली तथा उद्योगपतियों के लिए प्रसिद्ध है।

Contents

भारत में सर्वप्रथम बायोमैट्रिक योजना की शुरुआत झुंझुनू से ही हुई थी।

झुंझुनू के प्रसिद्ध स्थल

इस जिले में स्थित प्रसिद्ध स्थल निम्न प्रकार है-

लोहागर्ल

यह झुंझुनू से लगभग 60 किलोमीटर दूर अरावली की पहाड़ी पर स्थित तीर्थ स्थल है। यहां पर सूर्य कुंड व मालकेतु मंदिर स्थित है। यहां की 24 कोसी परिक्रमा प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है, कि महाभारत के बाद में अपनी नर हत्याओं के पाप से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने यहां पर प्रस्तुत होकर प्रायश्चित किया था और महर्षि परशुराम ने भी अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए यहां पर वैष्णव यज्ञ किया था।

 

मंडावा

यह झुंझुनू से 25 किलोमीटर दूर पश्चिम की ओर स्थित है। यह पुरानी हवेली पर भित्ति चित्र के लिए प्रसिद्ध स्थल है। यहां पर 1756 ईसवी में ठाकुर नवल सिंह द्वारा दुर्ग बनाया गया।

नवलगढ़

यह झुंझुनू जिले की एक तहसील है। जिसको शेखावाटी की स्वर्ण नगरी कहा जाता है। यह विभिन्न प्रकार की हवेलियों जैसे पौदार की हवेली, भगोरिया की हवेली, पाटोदिया की हवेली, भक्तों की हवेली, चोखानी हवेली आदि के लिए प्रसिद्ध है।

पिलानी

यह झुंझुनू में स्थित है पिलानी में केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान (Central Electronics Engineering Research,) विद्या विहार व पंचवटी परिसर स्थित है।

बिडला म्यूजियम

झुंझुनू के पिलानी तहसील में बिडला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (Birla Institute of Technology and Science) स्थित है। जिसमें देश का प्रथम उद्योग एवं तकनीकी म्यूजियम बिरला म्यूजियम स्थित है।

 

डूंडलोद

यहाँ राजस्थान राज्य का पहला व देश का पाँचवा द डन्की सैन्चुअरी (The donkey sanctuary) नाम को गधों का गर्दभ अभयारण स्थापित है। स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना एक कुआं स्थित है। इसके चारों ओर बारादरी, ऊंची मीनारें तथा चौकोर चबूतरा स्थित है।

नरहड़

झुंझुनू जिले के इस कस्बे में शक्करवार पीर बाबा की दरगाह स्थित है। यहां पर जन्म कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मेला लगता है। शक्कर बार बाबा को बांगड़ का धनी कहा जाता है।

बिसाऊ

यह भी विभिन्न प्रकार की हवेलियों जैसे नाथूराम पौदार की हवेली, सेट हरिराम बनारसीलाल की हवेली, सेठ जयदयाल केडिया की हवेली, सींगोतिया की हवेली आदि के लिए प्रसिद्ध है।

महेनसर

झुंझुनू जिले के इस गांव में सहजराम पोदार की सोने की दुकान पर भित्ति चित्र सोने की पॉलिश के कारण प्रसिद्ध है। यहां पर तोलाराम मसखरा का महफिल खाना भी स्थित है। यह कस्बा हेरिटेज शराब के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है।कुछ सालों पहले ही यहां पर बनाए गए बांध के टूटने के कारण यह चर्चा में आया था।

मुकुंदगढ़

इसकी स्थापना ठाकुर मुकंद सिंह ने की थी। यहां पर जानकी वल्लभ मंदिर, श्री गोपीनाथ मंदिर स्थित है

खेतड़ी

झुंझुनू जिले की तहसील ताम्रनगरी के नाम से जाना जाता है। यहां पर हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (Hindustan Copper Limited) स्थित है। खेतड़ी में चांदमारी में खाने स्थित है यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका के द्वारा अमेरिका की कंपनी वेस्टर्न नेप इंजीनियरिंग कंपनी की सहायता से यहां पर हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की स्थापना की गई।

अजीत सागर तालाब

यह महाराजा अजीत सिंह के द्वारा निर्मित खेतड़ी में अब तालाब है। स्वामी विवेकानंद शिकागो धर्म सम्मेलन जाने से पूर्व खेतड़ी के शासक अजीत सिंह से मिले उनको विवेकानंद नाम खेतड़ी के शासक अजीत सिंह के द्वारा ही दिया गया।

खेतड़ी महल

झुंझुनू के खेतड़ी में 5 मंजिला मुकुट के समान एक महल स्थित है। जिसका निर्माण खेतड़ी के राजा भोपाल सिंह के द्वारा किया गया। इसको शेखावाटी का हवामहल तथा राजस्थान का दूसरा हवा महल कहा जाता है।

रघुनाथ चूण्डावत जी का मन्दिर

खेतड़ी में स्थित इस मंदिर का निर्माण राजा बख्तावर की पत्नी रानी चूण्डावत ने करवाया था। इसमें राम तथा लक्ष्मण की मुछों वाली मूर्तियाँ है।

भोपालगढ़

यहां पर रामकृष्ण मिशन का मठ स्थित है। जिसका निर्माण फतेह सिंह की रानी चुंडावत के द्वारा करवाया गया था।

सोनारी

यह खेतड़ी के पास स्थित एक कस्बा है जहां पर खुदाई के दौरान लोहे के एस बने हैं मिले हैं लोहे बनाने की प्राचीनतम भट्टी मिली है।

नुआ

इस कस्बे में हवेली की खुदाई के दौरान मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के समय में ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से जारी किए गए एक रुपए मूल्य के चांदी के हजारों सिक्के मिले हैं।

टीबा बसई

इस स्थल पर बाबा रामेश्वर दास का मंदिर स्थित है। जिसमें धर्म ग्रंथ के पवित्र श्लोक व गीता दीवारों पर अंकित है।

गोरीर

राजस्थान राज्य का पहला 100 किलोवाट क्षमता वाला सौर ऊर्जा संयंत्र यहां पर स्थापित किया गया है। जिसकी स्थापना राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड (Rajasthan Electronics & Instruments Limited) के द्वारा की गई।

उदयपुरवाटी

उदयपुरवाटी झुंझुनू जिले में स्थित है। यहां पर जोगीदास की छतरी प्रसिद्ध है। इस पर चित्रकारी देवा नामक चित्रकार द्वारा की गई।

झुंझुनू से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Jhunjhunu)

झुंझुनू जिले के अन्य स्थल

  • सतरंगी तालाब
  • पन्नालाल शाह का तालाब
  • शम्स तालाब
  • बिडला तालाब
  • कमरुद्दीन शाह की दरगाह
  • टिबड़े वाला की हवेली
  • ईश्वर दास मोदी की हवेली
  • मनसा माता का मंदिर
  • अजीत सागर तालाब
  • राधा कृष्ण मंदिर
  • पीर बाबा की मस्जिद

 

झुंझुनूं जिले में विधानसभाएँ

इस जिले में सात है, विधानसभाएँ जो निम्‍न है—

  1. झुन्झुनू
  2. पिलानी
  3. सूरजगढ़
  4. मंडावा
  5. नवलगढ़
  6. उदयपुरवाटी
  7. खेतड़ी
झुंझुनू से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge About Jhunjhunu)

इन्हें भी पढ़े

जयपुर से जुडी जनरल नॉलेज

सीकर से सम्बंधित जनरल नॉलेज

बाहरी कड़ियाँ

https://jhunjhunu.rajasthan.gov.in/

https://en.wikipedia.org/wiki/Jhunjhunu

 

 

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अधिगम का अर्थ एवं विशेषताएँ https://aliscience.in/learning-definitions-specificity-hindi/ https://aliscience.in/learning-definitions-specificity-hindi/#comments Wed, 25 Nov 2020 09:37:20 +0000 https://aliscience.in/?p=10771 अधिगम (Learning) अधिगम का अर्थ सीखना होता है। अधिगम एक मानसिक प्रक्रिया जिसमें बालक नए अनुभवों सीखता है। तथा इन्हीं अनुभव से वह परिपक्वता की ओर बढ़ता है। अधिगम जीवनपर्यन्त होता रहता है। सीखने (अधिगम) के नियमों तथा सिद्धांतों का उपयोग शिक्षा मनोविज्ञान में होता है।   अधिगम की परिभाषाएं (Definitions of Learning) वुडवर्थ (Woodworth) […]

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अधिगम (Learning)

अधिगम का अर्थ सीखना होता है। अधिगम एक मानसिक प्रक्रिया जिसमें बालक नए अनुभवों सीखता है। तथा इन्हीं अनुभव से वह परिपक्वता की ओर बढ़ता है। अधिगम जीवनपर्यन्त होता रहता है।

सीखने (अधिगम) के नियमों तथा सिद्धांतों का उपयोग शिक्षा मनोविज्ञान में होता है।

 

अधिगम की परिभाषाएं (Definitions of Learning)

वुडवर्थ (Woodworth) के अनुसार

नई सुचनाओं तथा नई प्रतिक्रियाओं को धारण करना ही अधिगम है।

 

गिलफोर्ड (Gilford) के अनुसार

व्यवहार के कारण व्यवहार में होने वाला परिवर्तन अधिगम है।

 

ग्रेटस (Gratus) के अनुसार

अनुभव एवं परीक्षणों द्वारा व्यवहार में परिवर्तन होना ही अधिगम है।

 

मर्फी (Murphy) के अनुसार

अनुभव एवं व्यवहारिक दृष्टिकोण का परिमार्जन करना अधिगम है।

 

स्किनर (Skinner) के अनुसार

अधिगम प्रगतिशील व्यवहार अनुकूलन (Progressive behavior optimization) की एक प्रक्रिया है।

 

हिलगार्ड (Hillguard) के अनुसार

नवीन परिस्थितियों (New situations) में अपने आप को ढालना या अनुकूलित करना ही अधिगम है।

 

क्रो एंड क्रो (Crow and Crow) के अनुसा

आदतों (habits), ज्ञान (knowledge) तथा अभिवृत्तियों (attributes) एवं रुचियों (interests) का अर्जन करना ही अधिगम है।

 

अधिगम की विशेषताएं (Specificity of Learning)

  1. अधि गम जीवनपर्यन्त (Life long process ) होता रहता है।
  2. अधिगम निरंतर (Regular) व सतत (Continous) होता है।
  3. अधिगम सार्वभौमिक (Universal) है। यानि अधिगम केवल मनुष्य जाति का ही गुण ना होकर यह संसार के सभी जीव जंतु जैसे कीड़े-मकोड़े, पशु-पक्षी में भी पाया जाता है।
  4. सीखना (अधिगम) परिवर्तनशील (Changable) है।
  5. अधिगम उद्देश्यपूर्ण (Purposeful) होता है। अधिगम के द्वारा उद्देश्य प्राप्ति होती है।
  6. लर्निंग (अधिगम) विकासशील प्रक्रिया (Developing process) है।
  7. अधिगम सामाजिक होता है। यह समाज में समायोजन (Adjustment) में सहायता करता है।
  8. सीखना यानि अधिगम  वातावरण की उपज है।
  9. अधिगम प्रक्रिया विवेकपूर्ण (intelligent) है।
  10. अधिगम सकारात्मक और नकारात्मक (Negative or Positive) होता है।
  11. नहीं सीखना भी एक अधिगम है। जैसे झूठ नहीं बोलना चाहिए यह सीखना भी एक अधिगम है।
  12. पूर्व अनुभव एवं अभ्यासों के द्वारा नई योग्यताओं का अर्जन (acquisition) करना ही अधिगम है।

 

परिवर्तन तथा अधिगम में अन्तर (Difference between Change and Learning)

व्यक्ति के व्यवहार में होने वाले स्थाई वांछित परिवर्तनों को ही अधिगम कहा जा सकता है। व्यवहार में अवांछित परिवर्तन अधिगम नहीं होते।

जैसे यदि कोई व्यक्ति एल्कोहोल सेवन करता है। तो उसके व्यवहार में परिवर्तन अधिगम न होकर केवल तंत्रिकीय अवस्था में परिवर्तन है। क्योंकि इसमें इसका मस्तिष्क प्रभावित होता है।

 

परिपक्वता तथा अधिगम में अन्तर (Difference between Maturation and Learning)

 

अधिगम व्यक्ति के द्वारा उसके व्यवहार में वांछित परिवर्तन होता है। जबकि परिपक्वता निश्चित समय के पश्चात होने वाला परिवर्तन है।

परिपक्वता अनुवांशिक होती है जैसे छोटा बच्चा निश्चित समय बाद चलना सीखता है। चिड़िया का बच्चा निश्चित समय पर उड़ना सीखता है। यह अधिगम न होकर परिपक्वता है। परिपक्वता शब्द गैसेल (Gessell) ने दिया।


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सीकर से सम्बंधित जनरल नॉलेज https://aliscience.in/general-knowledge-about-sikar/ https://aliscience.in/general-knowledge-about-sikar/#respond Tue, 24 Nov 2020 13:28:02 +0000 https://aliscience.in/?p=17108 सीकर से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge about Sikar) सीकर शेखावाटी क्षेत्र का एक जिला है। जिसकी स्थापना दौलत सिंह ने वीरभान के बास नामक स्थान पर की इसका वर्तमान स्वरूप राजा शिव सिंह के द्वारा दिया गया। इसको शेखावाटी का हृदय कहा जाता है। सीकर जिले के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल फतेहपुर दुर्ग यह सीकर […]

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सीकर से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge about Sikar)

सीकर शेखावाटी क्षेत्र का एक जिला है। जिसकी स्थापना दौलत सिंह ने वीरभान के बास नामक स्थान पर की इसका वर्तमान स्वरूप राजा शिव सिंह के द्वारा दिया गया। इसको शेखावाटी का हृदय कहा जाता है।

Contents

सीकर जिले के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल

फतेहपुर दुर्ग

यह सीकर जिले के फतेहपुर तहसील में स्थित है‌। इसका निर्माण फतेह खां कायमखानी के द्वारा 1453 ईस्वी में करवाया गया।
कायमखानी को ददेरवा के चौहान व गोगा जी के वंशज माने जाते हैं।
फतेहपुर तहसील हवेलियों पर भित्ति चित्र के लिए प्रसिद्ध है।

लक्ष्मणगढ़ दुर्ग

यह सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ तहसील में स्थित है। इसका निर्माण रावराजा लक्ष्मण सिंह के द्वारा 1805 में बेड नामक पहाड़ी पर करवाया गया। वर्तमान में यह निजी हाथों में है।

शाकंभरी

इसका निर्माण चौहान राजा दुर्लभराज के भतीजे व शिवहरि के पुत्र सिद्धराज ने करवाया था। यह सीकर से 60 किलोमीटर दूर स्थित है। इसमें शाकंभरी तथा काली माता की प्रतिमाएं स्थित है।

सीकर से सम्बंधित जनरल नॉलेज (General Knowledge about Sikar)

 

सीकर जिले के प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर

जीण माता का मंदिर

सीकर जिले के रेवासा गांव में तीन पहाड़ियों के मध्य जीण माता का मंदिर स्थित है। यहां पर चैत्र व अश्विन मास के नवरात्रि में विशाल मेला लगता है।

हर्ष महादेव का मंदिर

इसका निर्माण 1973 ईस्वी में विग्रहराज जित्व के द्वारा किया गया यह सीकर से लगभग 14 किलोमीटर दूर हर्ष की पहाड़ियों पर स्थित है इसमें ब्रह्मा व विष्णु को शिवलिंग का आदि और अंत बताया गया है

खाटू श्याम जी का मंदिर

सीकर जिले के दातारामगढ़ तहसील में खाटू गांव में कृष्ण जी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। इसकी स्थापना अजमेर के राजा अजीत सिंह के पुत्र अभय सिंह के द्वारा की गई। यहां फाल्गुन व कार्तिक माह में विशाल मेला लगता है।

सप्त गौमाता मंदिर

यह रेवासा गांव में रेवासा धाम में स्थित है। यह भारत का चौथा तथा राजस्थान का पहला गौ माता मंदिर है। इसमें काले पत्थर की आकर्षक मूर्ति स्थित है।

सीकर जिले के प्रमुख स्थल

फतेहपुर

यहां पर जाजोबा कृषि फार्म स्थित है। सीकर जिले के फतेहपुर तहसील में राज्य का प्रथम कृषि विज्ञान केंद्र स्थित है।

शाह वली मोहम्मद चिश्ती की दरगाह

सीकर जिले के देवराला गांव में शाह वली मोहम्मद चिश्ती की दरगाह स्थित है।

पाटोदा

यह लुगड़ी के लिए प्रसिद्ध है।

रामगढ़

यह फतेहपुर तहसील के पास स्थित है यहां पर गोयंका हवेली खेमका हवेली तथा रुइया हवेली स्थित है।
यहां पर राठी की हवेली, चार चौक हवेली तथा केडिया हवेली पर्यटक स्थल है।

खंडेला

यह गोटा उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

कोछोर

यहां पर खारे पानी की झील स्थित है।

सरगोठ

जिले के इस गांव में जैविक आंवला निर्माण करने वाली ऑर्गेनिक फैक्ट्री स्थित है। जो राज्य का पहला फल उद्यान है।

बानी वाला री ढाणी

यहां पर तांबा अयस्क के भंडार स्थित है।

बलखेन

यह गांव भेड़ और बकरी पालन उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर देश का सबसे बड़ा बकरी पालन फार्म स्थित है।गणेश्वर
यहां पर हड़प्पा कालीन, पूर्व हड़प्पा कालीन तथा ताम्र युगीन अवशेष प्राप्त हुए हैं। यह सीकर जिले के नीम का थाना तहसील में कांतली नदी के उद्गम पर स्थित है। इसको ताम्र युगीन सभ्यताओं की जननी कहा जाता है। यहां पर उत्खनन का कार्य आर. सी. अग्रवाल तथा विजय कुमार द्वारा किया गया।

गुरारा

यहां पर चांदी के पंचमार्क सिक्के मिले हैं।

प्रीतमपुरी झील

यह सीकर जिले के नीम का थाना तहसील में श्रीमाधोपुर के कावट गांव से 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।

रायपुर बाँध

सीकर जिले में स्थित बांध है।

अमृत नाथ आश्रम

फतेहपुर तहसील में नाथों का आश्रम स्थित है जिसको अमृत नाथ जी का आश्रम कहा जाता है।

रघुनाथगढ़

यह सीकर में स्थित उत्तरी अरावली की सबसे ऊंची चोटी है। इसकी ऊंचाई 1055 मीटर है।

अम्ब्रेला प्रोजेक्ट

सीकर जिले को फ्लोराइड मुक्त जल प्रदान करने के लिए यूनिसेफ की सहायता से यह प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।

शेखावाटी विश्वविद्यालय

इसकी स्थापना हाल ही में 2012-13 में हुई है।

अन्य

चोकला भेड़

शेखावाटी की स्थानीय चोकला भेड़ ऊन के लिए प्रसिद्ध है इसको भारत का मेरिनो कहा जाता है।

डूँगरजी व जवाहर जी

गरीबों के लोक देवता कहते हैं। ये चाचा-भतीजा थे। इनके नाम क्रमशः बलजी तथा भूरजी था। ये कछवाहा वंश के थे। ये सीकर के पाटोदा गाँव के निवासी थे ये लूटपाट करके लूटे हुए धन को गरीबों में बांटते थे। इन्होंने आहुवा की सैनिक छावनी को भी लूटा था।

 

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बाहरी कड़ियाँ

https://sikar.rajasthan.gov.in/content/raj/sikar/en/home.html

https://www.rajras.in/rajasthan/districts/sikar/

https://en.wikipedia.org/wiki/Sikar_district

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खनिज एवं अयस्क https://aliscience.in/minerals-and-ores-in-hindi/ https://aliscience.in/minerals-and-ores-in-hindi/#comments Tue, 24 Nov 2020 10:14:16 +0000 https://aliscience.in/?p=10765 खनिज एवं अयस्क (Minerals and Ores) तत्वों की प्राप्ति भूपर्पटी का प्रमुख स्रोत (earth crust ) है। इसमें अधातुओं में आक्सीजन तथा धातुओं में ऐलुमिनियम सर्वाधिक मात्रा में पाये जाते है। धातुएँ प्रकृति में दो रूपों में मिलती हैं- 1. मुक्त अवस्था में (Elemental State) सक्रियता श्रेणी में नीचे की ओर आने वाली कम क्रियाशील […]

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खनिज एवं अयस्क (Minerals and Ores)

तत्वों की प्राप्ति भूपर्पटी का प्रमुख स्रोत (earth crust ) है। इसमें अधातुओं में आक्सीजन तथा धातुओं में ऐलुमिनियम सर्वाधिक मात्रा में पाये जाते है। धातुएँ प्रकृति में दो रूपों में मिलती हैं-

1. मुक्त अवस्था में (Elemental State)

सक्रियता श्रेणी में नीचे की ओर आने वाली कम क्रियाशील धातुएँ प्रकृति में मुक्त अवस्था (native or elemental state) में पायी जाती है। ये सभी तत्व प्रकृति में स्वतंत्र अवस्था में पाये जाते है। जैसे– सोना , चाँदी, प्लेटिनम आदि।

2 संयुक्त अवस्था में (Combined State)

अधिकांश धातुएँ सक्रिय होने के कारण अन्य तत्वों के साथ संयुक्त अवस्था (combined state) में यौगिकों के रूप में पायी जाती है। जैसे- सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि।

 

खनिज एवं अयस्क (Minerals and Ores)

भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्व जिनकों खनन द्वारा प्राप्त कर सकते है। खनिज (minerals) कहलाते है।

ऐसे खनिज जिनसें धातुएँ आसानी से कम लागत में प्राप्त की जा सकती है अयस्क (ores) कहलाते है।

 

अयस्कों के प्रकार (Types of ores)

प्रकृति में प्राप्ति के तरीके आधार पर धातुओं में प्रमुख अयस्क निम्नानुसार हैं

1. ऑक्साइड अयस्क

धातुएँ जैसे लोहा, एल्युमीनियम, मेंगनिज, जिंक, तांबा आदि ऑक्सीजन के प्रति विशेष स्नेह होता है अतः ये धातुएँ ऑक्साइड अयस्कों के रूप में पीई जाती हैं।  उदाहरण – हेमाटाइट (Fe2O3), जिंकाइट (ZnO) बॉक्साइट  (Al2O3.2H2O), पायरोलूसाइट (MnO2) आदि।

2. सल्फाइड अयस्क

अनेक धातुएँ सल्फर यौगिकों से क्रिया करके सल्फाइड अयस्कों के रूप में पायी जाती हैं ।

उदाहरण – कापर पाइराइटीज (CuFeS2) , आयरन पाइराइटीज (FeS2), गेलेना (PbS), जिंकब्लेन्ड (Zns ) आदि ।

3.कार्बोनेट अयस्क

धातुओं के ऑक्साइड और हाइड्रोक्साइड यौगिक वायु में उपस्थित कार्बनडाइऑक्साइड से क्रिया करके कार्बोनेट अयस्क बनाते है।

उदाहरण– डोलोमाइट(MgCO3.CaCO3), मेलेकाइट ग्रीन [CuCO3.Cu(OH)2 ], केलामिन (ZnCO3),   सीडराइट (FeCO3) आदि।

4.सल्फेट अयस्क

कुछ धातुओं जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, स्ट्रोंशियम लेड आदि के सल्फाइड यौगिक वायुमण्डलीय ऑक्सीजन से क्रिया करके सल्फेट अयस्क बनाते है। आदि धातुएँ सल्फेट के रूप में मिलती हैं ।

उदाहरण –एप्समाइट या एप्सम लवण (MgSO4.7H2O)) जिप्सम (CaSO4.2H2O) सेलेस्टाइन (SrSO4) एंगलीसाएट (PbSO4) आदि।

5. हैलाइड अयस्क

सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि धातु के हैलाइड पृथ्वीतल पर या समुद्र के जल में पाये जाते हैं। परन्तु हैलाइड के रूप में कम ही धातु मिलती हैं ।

उदाहरण – हार्नसिल्वर (AgCl) , फ्लुओरस्पार (CaF2) , खनिज लवण (NaCl), क्रायोलाइट (AlF3.3NaF) आदि।

6. सिलिकेट अयस्क

लिथियम, बेरिलियम, मैग्नीशियम, एल्युमीनियम आदि धातुएँ सिलिकेट अयस्कों के रूप में पियी जाती हैं ।

उदाहरण – बेरिल (3BeO.Al2O3.6SiO2) टेल्क (3MgO.4SiO2.2H2O), स्पोडूमिन [LiAl(SiO3)2] ,  केओलिन या चीनी मिटटी (Al2O3.2SiO2.2H2O) आदि ।

 

विभिन्न प्रकार के अयस्कों के नाम (Name of Different Types of Ores)

एल्युमीनियम बॉक्साइट Al2O3.2H2O
क्रायोलाइट Na3AlF6
कोरन्डम Al2O3
जिंक जिंक ब्लेंड ZnS
कैलेमाइन ZnCO3
जिंकाइट ZnO
लोहा हेमेटाइट FeO3
मैग्नेटाइट Fe3O4
आयरन पाइराइटीज FeS2
तांबा मैलाकाइट CuCO3.Cu(OH)2
कैलोपाइराइट या कॉपर पाइराइटीज CuFeS2
कॉपर ग्लांस Cu2S
सोडियम खनिज नमक NaCl
सोडियम कार्बोनेट Na2Co3
पोटैशियम केरनालाइट KCl.MgCl2.6H2
साल्ट पीटर Na2Co3
लेड एंगलीसाइट PbCl2
गैलेना PbS
टिन टिन पाइराइटीज Cu2FeSnS4
केस्सिटेराइट SnO2
चाँदी सिल्वर ग्लांस Ag2S

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जयपुर से जुडी जनरल नॉलेज https://aliscience.in/general-knowledge-about-jaipur/ https://aliscience.in/general-knowledge-about-jaipur/#respond Mon, 23 Nov 2020 14:31:50 +0000 https://aliscience.in/?p=17104 जयपुर से जुडी जनरल नॉलेज राजस्थान की राजधानी जयपुर की स्थापना कछवाहा वंश के राजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 9 खेलों का अधिग्रहण करके की थी। जुलाई 2019 में यूनेस्को द्वारा जयपुर को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा दिया गया है। इसकी स्थापना 18 नवंबर 1727 में हुई जयपुर के स्थापना के लिए नींव का […]

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जयपुर से जुडी जनरल नॉलेज

राजस्थान की राजधानी जयपुर की स्थापना कछवाहा वंश के राजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 9 खेलों का अधिग्रहण करके की थी। जुलाई 2019 में यूनेस्को द्वारा जयपुर को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा दिया गया है।

Contents

इसकी स्थापना 18 नवंबर 1727 में हुई जयपुर के स्थापना के लिए नींव का पत्थर गंगापोल पर लगाया गया था।
जयपुर को भारत का पेरिस, गुलाबी नगर, रंगश्री का द्वीप, आइसलैंड ऑफ ग्लोरी आदि नामों से जाना जाता है। जयपुर की बसावट जर्मनी के शहर एल्ट स्टडट एर्लग के आधार पर किया गया।

पूरे शहर में नो आड़ी रेखाएं तथा नौ सीधी रेखाएं है जो चौपड़ पैटर्न बनाती है। जयपुर के प्रमुख वास्तुकार विद्याधर चक्रवर्ती और आनंद राम मिस्त्री थे और इनके सलाहकार मिर्जा इस्माइल थे। जिनके नाम पर एमआई रोड का निर्माण हुआ। जयपुर का पुराना नाम जयनगर था।

जयपुर को गुलाबी रंग करवाने का श्रेय कछवाहा राजा रामसिंह द्वितीय को जाता है। इन्होने इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ तथा प्रिंस ऑफ वेल्स युवराज अल्बर्ट के स्वागत में जयपुर को गुलाबी रंग करवाया।

जयपुर में 7 प्रवेश द्वार  है। जो-

  1. अजमेरी गेट
  2. सांगानेरी गेट
  3. घाट गेट
  4. चांदपोल गेट
  5. सूरजपोल गेट
  6. न्यू गेट
  7. ध्रुवपोल गेट

 

जयपुर में सरकारी संस्थाएं

जयपुर में निम्नलिखित सरकारी संस्थाएं स्थित है-

  1. राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान
  2. राजस्थान लोक प्रशासन संस्थान
  3. हस्तशिल्प कागज राष्ट्रीय संस्थान
  4. राजस्थान संगीत संस्थान
  5. राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट इसको मदरसा हुनरी कहा जाता था। इसका निर्माण सवाई राम सिंह द्वारा करवाया गया।
  6. भारतीय प्राचीन ज्योतिष संस्थान
  7. राजस्थान ललित कला अकादमी
  8. गुरु नानक संस्थान
  9. राजस्थान कला संस्थान
  10. राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी
  11. जयपुर कत्थक केंद्र
  12. राजस्थान सिंधी अकादमी
  13. जवाहर कला केंद्र

जयपुर के ऐतिहासिक तथा पर्यटन स्थल

जयपुर में निम्नलिखित ऐतिहासिक तथा पर्यटन स्थल स्थित है

हवा महल

इसका निर्माण सवाई प्रताप सिंह के द्वारा 1799 ईस्वी में करवाया गया। यह पांच मंजिला भव्य इमारत है इसके कारीगर लालचंद कारीगर थे। इसका आकार कृष्ण के मुकुट के समान है।
हवा महल में निम्नलिखित मंजिलें हैं-

  1. पहली मंजिल शरद मंदिर
  2. दूसरी मंजिल रतन मंदिर
  3. तीसरी मंजिल विचित्र मंजिल
  4. चौथी मंजिल प्रकाश मंदिर
  5. पांचवी मंजिल हवा मंदिर

 

जंतर मंतर

इसका निर्माण 1718 में सवाई जयसिंह द्वितीय के द्वारा करवाया गया। इसकी स्थापना ज्योतिष एवं नक्षत्र विद्या की वेधशाला प्रयोगशाला के आधार पर किया गया।

यहां विश्व की सबसे सौर घड़ी है, जिसका नाम सम्राट यंत्र है। इनके अलावा यहां पर प्रकाश नापने के लिए जय प्रकाश यंत्र व ऊंचाई मापने हेतु राम यंत्र है।

तख्ते शाही महल

यह मोती डूंगरी में एक पहाड़ी पर स्थित है इसका निर्माण सवाई माधो सिंह द्वारा किया गया।

ईसरलाट

इसकी स्थापना 1750 में महाराजा ईश्वरी सिंह ने टोंक के राज महल पर युद्ध विजय होने के उपलक्ष में विजय स्तंभ के रूप में करवाया गया। इसे स्वर्गसुली भी कहा जाता है।

राज महल

इसको सिटी पैलेस भी कहा जाता है। इसकी स्थापना 1980 में महाराजा सवाई माधो सिंह द्वितीय द्वारा की गई थी।

इसे पूर्वी प्रदेश द्वार को शिर्डी कहते हैं।

सिटी पैलेस में मुबारक महल, चंद्र महल, सीलखाना, दीवाने आम, दीवाने खास तथा पोथीखाना स्थित है। दीवाने आम में स्थित राजा के निजी पुस्तकालय को पोथीखाना कहा जाता है। सिटी पैलेस में मुबारक महल अतिथियों के ठहरने के लिए बनवाया गया था।

सिटी प्लेस में विश्व के सबसे बड़े चांदी के पत्थर तथा बिछावन पर सुई से बारीक काम विश्व प्रसिद्ध है।

शीश महल

यह आमेर में स्थित है। इसको जय मंदिर तथा यश मंदिर भी कहा जाता है। इसमें शीशे व कांच के टुकड़ों की सजावट के कारण इस को शीश महल कहा जाता है‌।

इसका निर्माण मिर्जा राजा जयसिंह द्वारा करवाया गया। महाकवि बिहारी ने इसे दर्पण धाम कहा है।

आमेर का महल

आमेर की झील के पास पहाड़ी पर स्थित महल आमेर का महल है। इसका निर्माण राजा मान सिंह द्वारा 1592 में करवाया गया।

हाड़ी रानी का मंदिर

यह आमेर में स्थित है।

जल महल

जयपुर से जुडी जनरल नॉलेज

जयपुर से जुडी जनरल नॉलेज

जयपुर के आमेर में आमेर की घाटी के नीचे जयसिंहपुरा खोर गांव के पास दो पहाड़ियों के बीच की घाटी को काटकर एक झील का निर्माण करवाया गया है। इस झील में जल महल स्थित है। इसकी स्थापना मानसिंह द्वितीय ने की थी। तथा झील को मानसागर झील कहा जाता है।

सामोद महल

चोमू से 9 किलोमीटर दूर सामोद महल स्थित है‌। जिसमें शीश महल व सुल्तान महल दर्शनीय स्थल है। शीश महल में कांच का कार्य तथा सुल्तान महल में शिकार के दृश्य देखने योग्य हैं।

जयपुर के प्रसिद्ध किले एवं गढ़

जयपुर में निम्नलिखित प्रसिद्ध किले एवं गढ़  स्थित है- –

नाहरगढ़ का किला

इसको सुदर्शन गढ़ भी कहा जाता है। इसका निर्माण 1734 में सवाई जयसिंह ने प्रारंभ किया था और वर्तमान स्वरूप सवाई राम सिंह द्वारा प्रदान किया गया।

यह अरावली पर्वत माला पर स्थित है। यह जयपुर के मुकुट के समान है। इसमें सवाई माधो सिंह द्वितीय के द्वारा अपनी 9 पासवानों के लिए 9 महलों का निर्माण करवाया गया है, जो निम्न है

  1. सूरज प्रकाश
  2. चांद प्रकाश
  3. लक्ष्मी प्रकाश
  4. ललित प्रकाश
  5. बसंत प्रकाश
  6. फूल प्रकाश
  7. खुशहाल प्रकाश
  8. आनंद प्रकाश
  9. जवाहर प्रकाश

 

जयगढ़ का किला

इसका निर्माण सवाई जयसिंह ने 1726 ईस्वी में करवाया इसको चिल्ह का टोला कहा जाता है, क्योंकि इसमें दबे हुए खजाने स्थित है।

जयगढ़ में एशिया की सबसे बड़ी तोप जयबाण तोप है। जयगढ़ के प्रमुख प्रवेश द्वार-डूंगर दरवाजा, अवनी दरवाजा तथा भेरुव दरवाजा है।

जय गढ़ में सात मंजिला प्रकाश स्तंभ बना हुआ है जिसे दिया बुर्ज कहते हैं।

जयगढ़ के अंदर छोटा दुर्ग बना हुआ है, जिसे विजयगढ़ी दुर्ग कहते हैं। इसमें सवाई राजा जयसिंह ने अपने छोटे भाई विजय सिंह को कैद करके रखा था।

आमेर का किला

दरअसल यह एक दुर्ग है जो गिरी दुर्ग प्रकार का दुर्ग है। इसका निर्माण 1150 में धोलाराय ने करवाया था। आमेर का प्रवेश द्वार गणेशपोल कहलाता है। जिसके ऊपर चतुर्भुज गणेश की आकृति स्थित है। गणेश द्वार या गणेश पोल पर फ्रेस्को पद्धति का रूप दिखाई देता है।

आमेर के दुर्ग में सौभाग्य मंदिर तथा आमेर का महल स्थित है।

माधो राजपुरा का किला

जयपुर में स्थित इस किले के साथ आमिर खान पिंडारी की बैगमों को पकड़ कर लाने वाले राजपूत भगत सिंह नरूका की वीरता की दास्तान जुड़ी हुई है।

मोरीजा किला

यह जयपुर जिले की के गोविंदगढ़ में स्थित है।

करणसर किला

यह जयपुर से 50 किलोमीटर दूर हिंगोनिया के निकट करणसर किला स्थित है। इसका निर्माण बहादुर सिंह राणावत ने करवाया था। यह चौबुजा किला कहलाता है।

जयपुर से जुडी जनरल नॉलेज

 

जयपुर की प्रमुख झीलें

जय पुर की प्रमुख झीलें निम्नलिखित है-

सांभर झील

यह भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। इसमें देश का सर्वाधिक नमक उत्पादन होता है। इसमें झील उत्पादन नमक उत्पादन सांभर साल्ट लिमिटेड के द्वारा किया जाता है। जो हिंदुस्तान साल्ट कंपनी लिमिटेड की सहायक कंपनी है।

मावठा झील

इसके पास आमेर का महल स्थित है।

गतला झील

यह जयपुर का बनारस कहलाता है। इसका गालव ऋषि के आश्रम के लिए किया गया। इसमें एक कुंड है, जिससें गोमुख से निरंतर पानी बहता रहता केहै। इसमें बन्दरों की अधिकता होने पर इसे जयपुर की मंकी वैली कहते हैं। यहां पर पयोहारी जी के स्थल, अलखनाथ मंठ तथा सीताराम मंदिर स्थित है।

 

मानसागर झील

जल महल इसी झील में स्थित है। इसका निर्माण मानसिंह द्वितीय ने करवाया था।

 

जयपुर के  प्रसिद्ध मंदिर

जयपुर में निम्नलिखित प्रसिद्ध मंदिर स्थित है-

शीलादेवी का मंदिर

यह आमेर के महल में स्थित है, महाराजा मानसिंह ने बंगाल के जसौर के शासक केदार को हराकर शिला माता की मूर्ति को इस मंदिर में स्थापित किया।

जगत शिरोमणि मंदिर

यह मंदिर भी आमेर में स्थित है। इसका निर्माण महाराजा मानसिंह की रानी कनकावती ने अपने पुत्र जगत सिंह की याद में बनवाया था। इसमें मीराबाई द्वारा पूजा जाने वाली कृष्ण की काले पत्थर की मूर्ति स्थित है। यह एक वैष्णव मंदिर है।

गोविंद देव जी का मंदिर

इसका निर्माण 1735 में सवाई जयसिंह ने करवाया था। यह सिटी प्लस के पीछे जयनिवास बगीचे में स्थित है। इसमें वृदावन से लाई गई गोविंद देव जी की मूर्ति स्थित है। यह गौडिया वल्लभ संप्रदाय का प्रसिद्ध मंदिर है।

गणेश मंदिर

यह जयपुर के मोती डूंगरी की तलहटी में स्थित है। इसका निर्माण महाराजा माधोसिंह प्रथम ने करवाया था। इसमें गणेश की प्रतिमा स्थित है। जो माधो सिंह प्रथम की पटरानी अपने पीहर से लेकर आई थी।

बिड़ला मंदिर

जयपुर के मोती डूंगरी के निकट लक्ष्मी नारायण का मंदिर स्थित है। जिसका निर्माण गंगाप्रसाद बिड़ला के द्वारा करवाया गया था। इसमें भगवान नारायण व देवी लक्ष्मी की मूर्ति स्थित है। इसमें लगे हुए कांच बेल्जियम से आयात किए गए।

कनक वृंदावन मंदिर

जल महल के निकट यह मंदिर स्थित है‌। इसका निर्माण सवाई जयसिंह द्वारा करवाया गया।

राजेश्वर मंदिर

यह मंदिर केवल शिवरात्रि को ही खुलता है‌।

नकटी माता का मंदिर

जयपुर के निकट जय भवानीपुरा में नकटी माता का मंदिर स्थित है।

जयपुर से जुडी जनरल नॉलेज

बैराठ
सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन यहां पर मौर्य कालीन अशोक के शिलालेख तथा मध्यकालीन अवशेष प्राप्त हुए हैं।
प्राचीन काल में यह विराट नगर के नाम से प्रसिद्ध था। यहां खुदाई में एक गोल मबुद्ध मंदिर, मृदुपात्र तथा 36 मुद्राएं प्राप्त हुई है। जिनमें 8 चांदी की पंचमार्क मुद्राएं तथा 28indo-greek मुद्राएं हैं जिनमें राजा मिनेन्डर की प्रतिमा है।
यहां भीम की डूंगरी स्थित है। जहां पर पांडवों ने अज्ञातवास निकाला था। इसलिए से पांडू हिल भी कहते हैं।

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