Aliscience https://aliscience.in Educational Videos and Notes Thu, 14 Feb 2019 13:26:08 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.0.3 https://i1.wp.com/aliscience.in/wp-content/uploads/2018/12/cropped-new-favicon-512.png?fit=32%2C32&ssl=1 Aliscience https://aliscience.in 32 32 138428798 मानव श्वसन तन्त्र https://aliscience.in/human-respiratory-system-hindi/ https://aliscience.in/human-respiratory-system-hindi/#respond Thu, 14 Feb 2019 13:26:08 +0000 https://aliscience.in/?p=10934 श्वसन वह जैविक प्रक्रिया है, जिसमें भोजन के घटक जैसे कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन का दहन होता है। इसके परिणामस्वरूप कोशिकाओं

The post मानव श्वसन तन्त्र appeared first on Aliscience.

]]>
श्वसन वह जैविक प्रक्रिया है, जिसमें भोजन के घटक जैसे कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन का दहन होता है। इसके परिणामस्वरूप कोशिकाओं में CO2 जल, तथा ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

C6H12O2 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O + ऊर्जा

श्वसन के प्रकार (Types of Respiration)

ऑक्सीजन के उपभोग के आधार (On the basis on consumption of oxygen) पर श्वसन दो प्रकार का होता है–

  1. वायुवीय श्वसन (Aerobic Respiration)
  2. अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration)

वायुवीय श्वसन (Aerobic Respiration)

इस प्रकार के श्वसन में  भोजन के दहन में O2 का उपयोग होता है। यह श्वसन सभी जीवित कोशिकाओं में होता है।

श्वसन के दौरान ग्लूकोज (C6H12O2 ) के एक अणु का ऑक्सीकरण (Oxidation) निम्न प्रकार से होता है–

C6H12O2 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O + ऊर्जा

वायुवीय श्वसन में ग्लूकोज के एक अणु से 38 ATP का निर्माण होता है।

 

अवायवीय श्वसन  (Anaerobic Respiration)

इस प्रकार के श्वसन में कार्बोहाइड्रेट के ऑक्सीकरण के लिए O2 आवश्यक नहीं होती है। अवायवीय श्वसन में ग्लूकोज का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है जिससे उत्पादों के रूप में CO2, एथिल एल्कोहल या लैक्टिक अम्ल बनता है।

C6H12O2 + 6O2 → 6CO2 + C2H5OH+ ऊर्जा

 

अवायवीय श्वसन में ग्लूकोज के अणु से केवल 2 ATP बनते हैं ।

इस प्रकार का श्वसन जीवाणुओं, कवकों, अंकुरण करने वाले बीजों, RBC में होता है।

मानव श्वसन तन्त्र (Human Respiratory System)

श्वसन तन्त्र की उत्पति (Origin) भुर्णीय एण्डोडर्म (Endoderm) से होती है।

मानव के श्वसन तन्त्र (Respiratory System) को दो भागों में बांटा गया है–

(a) श्वसन पथ (Respiratory Path)

(b) श्वसन अंग (Respiratory organs)

श्वसन पथ (Respiratory Path)

यह वायु के आवागमन का पथ है। इसके निम्न भाग हैं-

  1. बाहा नासाछीद्र (External Nares)
  2. नासा मार्ग (Nasal Tract)
  3. ग्रसनी (Parynx)
  4. वायु नाल (Wind Pipe)

 

1. बाहा नासाछिद्र (External Nasal Pore)

नासाछिद्र की संख्या दो होती है। ये नासामार्ग के प्रघाण (Vestibule) भाग में खुलते है।

2. नासा मार्ग (Nasal Tract)

नासा मार्ग के तीन भाग होते है  –

  1. प्रघाण (Vestibule)
  2. श्वसन (Respiratory Part)
  3. घ्राण भाग (Olfactory Part )
 प्रघाण (Vestibule)

ये नासामार्ग का सबसे छोटा भाग होता है। यह केरेटिन विहीन स्तरित उपकला (Non keratinized squamous epithelium) से ढका होता है।

श्वसन भाग (Respiratory region)

ये नासामार्ग (Nasal Passage) का मध्य है। जो घ्राण (Olfactory) भाग में खुलता है।

घ्राण भाग (Olfactory region)

यह नासा मार्ग का पश्च ऊपरी भाग है, जो तंत्रिका संवेदी उपकला (Neuro sensory epithelium) से अस्तरित होता है। इस उपकला को घ्राण उपकला (Olfactory epithelium) या शनीडेरियन झिल्ली भी कहते है। इस उपकला के द्वारा गंध का पता लगाया जाता है।

ग्रसनी (Pharynx)

ग्रसनी श्वसन तंत्र तथा पाचन तंत्र दोनों का उभयनिष्ट भाग है। इसके तीन भाग होते हैं-

  1. नासा ग्रसनी
  2. मुख ग्रसनी
  3. कंठ ग्रसनी

वायु नाल (Wind Pipe)

यह नलिका वायु के फेफड़ों में आवागमन का मुख्य भाग है। यह नलिका दो भागों में विभक्त होती है–

  • लैरिंक्स (Larynx)
  • श्वासनली (Trachea)

कंठ या ध्वनि बॉक्स (Larynx or Sound box)

यह श्वास नली का अग्र रूपांतरित भाग होता है। इसे ध्वनी उत्पादक अंग (Sound producing organ) भी कहते है।

ग्लोटिस (Glottis)

लेरिंक्स कंठ में एक छिद्र (slit aperture) के रूप में खुलती है, जिसे ग्लोटिस कहते है। यह ग्रसनी के अधर पर स्थित होता है।

वायु लेरिंक्स में ग्लोटिस से ही होकर प्रवेश करती है।

एपिग्लोटिस (Epiglottis)

यह ग्लोटिस पर पाया जाने वाला झिल्लीनुमा ढक्कन है जो भोजन को निगलते समय ग्लोटिस छिद्र को ढक लेता है। यह प्रत्यास्थ उपास्थि (Elastic Cartilage) का बना होता है।

कंठ की कार्टिलेज (Cartilage of the larynx)

कंठ का निर्माण उपास्थि (Cartilage) के 9 टुकड़े द्वारा हैं। जो निम्न है-

  •  थाइरोइड उपास्थि इसे एडम का एप्पल (Adam’s Apple) भी कहते है।
  • क्रिकॉयड उपास्थि
  • ऐरिटीनॉइडस
  • सैंटोरिनी की उपास्थि
  • क्युनिफॉर्म उपास्थि

 

वाक् तन्तु (Vocal cord)

लेरिंक्स श्वसन मार्ग के साथ ध्वनी उत्पादन का कार्य भी करता है।   इसमें ध्वनि उत्पादन के लिए वाक् तन्तु (Vocal cord) पाए जाते हैं। जो झिल्लीनुमा होते है ।

 

श्वास नली (Trachea)

श्वास नली (Trachea) C आकार में उपास्थिमय छल्लों (Cartilage Ring) से बनी नलिका है। यह वक्षीय गुहा में जाकर दो शाखाओं दांयी एंव बांयी में बंट जाती है, जिन्हें श्वसनी (Bronchi) कहते हैं।

प्रत्येक श्वसनी फेफड़ों में जाकर छोटी-छोटी नलिकाओं में विभक्त हो जाती है, जिन्हें क्रमशः द्वितीयक श्वसनी (Secondary Bronchi), तृतीयक श्वसनी (Tertiary Bronchi) कहते है।

तृतीयक श्वसनी (Tertiary Bronchi) छोटी-छोटी नलिकाओं शाखित नलिकाओं में विभक्त होती है। जिनको श्वसनिकाएँ (bronchioles) कहते हैं।

इन श्वसनिकाओं के अंतिम सिरे कुपिका (Alveoli) में खुलते है।

human respiratory system in hindi 1 श्वसन तंत्र

श्वसन अंग (Respiratory organs)

फेफड़े या फुफ्फुस (Lungs)

फेफड़े फुफ्फुसीय गुहा (Pleural Cavities) में स्थित होते है। ये संख्या में दो,शंकुवाकार, गुलाबी ठोस तथा स्पंजी होते है।

फुफ्फुसीय गुहा (Pleural cavity) में लसिका भरी रहती है, जिसे फुफ्फुसीय द्रव (Pleural fluid) कहते हैं । जो ग्लाइकोप्रोटीन है तथा प्लुरा द्वारा स्त्रावित किया जाता है।

प्रत्येक फुफ्फुसीय गुहा (Pleural cavity) के चारों ओर से फुफ्फुसावरण (Pleural Membrane or Pleura) घेरे रहता है। इस फुफ्फुसावरण (Pleural Membrane) के दो भाग होते है

  1. Parietal Pleura देह भीति से लगा हुआ आवरण
  2. Visceral Pleura फेफड़ों से लगा आवरण

मानव के बांयें फेफड़े में दो पिण्ड (Lobes) होते है। जिनको सुपीरियर (Superior) तथा इनफीरियर (inferior) पिण्ड तथा दायें में तीन पिण्ड होते है, जिनको सुपीरियर, मिडिल, इनफीरियर पिण्ड कहते है।

दोनों फेफडों के बीच मिडिया स्टीनम नामक अवकाश होता है।

कुपिका (Alveoli)

श्वसनिकाएँ (bronchioles) के अंतिम सिरे प्रत्येक फेफड़ों में जाकर गुब्बारेनुमा संरचना बना लेती है, जिनको कुपिका (Alveoli) कहते है। मानव के फेफड़ों में लगभग 30-35 करोड़ कुपिकाएँ (Alveoli) पाई जाती है।

human respiratory system in hindi श्वसन तंत्र

कुपिकाएँ फुफ्फुस की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई (Structural and functional unit) होती है।

कुपिकाओं की पतली भित्ति शल्की उपकला (Squamous Epithelium) की बनी होती है। कुपिकाओं की भित्ति में सूक्ष्म छिद्र (Micro pore) पाये जाते हैं। इन्हें “कुहन के रन्ध्र (Pores of Kuhn)” कहते हैं।

 

मानव में श्वसन  की क्रियाविधि (Mechanism of respiration in human)

अंत:श्वसन (Inspiration)

अंत:श्वसन के समय डायफ्राम (Diaphragm) तथा अन्तरापर्शुक पेशियों (Intercostal muscle) में संकुचन (Contraction) होते है। डायफ्राम चपटा होकर उदर गुहा की ओर खिसक जाता है। पसलियाँ बाहर तथा उपर की तरफ तथा उरोस्थि (Sternum) अधर व अग्र भाग की ओर खिसक जाता है।

वक्षीय गुहा (Thoracic cavity) का आयतन बढ़ जाता है, व फेफड़ों पर देहगुहा द्रव का दबाव घटता है फेफड़े फैल जाते हैं व फेफडों में वायुदाब, वायुमंडलीय दाब की तुलना में 1-3mmHg तक घट जाता है व बाहर की वायु निम्न मार्ग से फेफड़ों में जाती है –

नासाछिद्र – नासामार्ग –ग्रसनी– ग्लोटिस – श्वास नली – प्राथमिक श्वसनी – द्वितीयक श्वसनी – तृतीयक श्वसनी ––श्वसनिका ––कुपिका

बहि:श्वसन (Expiration)

बहि :श्वसन के दौरान डायफ्राम अन्तरापर्शुक पेशियाँ (Intercostal muscle) शिथिल (Relax) हो जाती हैं, इससे डायफ्राम, उरोस्थि (Sternum) तथा पसलियाँ (Ribs) अपनी पूर्व स्थिति में आ जाती है। वक्षीय गुहा का आयतन (Volume) घट जाता है, फेफडों का वायुदाब दबा वायुमंडलीय दाब की तुलना में बढ़ जाता है। इससे फेफड़ों में भरी वायु श्वसन मार्ग से होती हुई बाहर निकल जाती है।

 

गैसों का विनिमय (Exchange of gases)

मानव में गैसों का विनिमय (Exchange of gases) दो प्रकार से होता है। जिनको बाह्य तथा अन्तः श्वसन (External and Internal Respiration) कहा जा सकता है।

कुपिकाओं में गैसों विनिमय (Exchange of gases in alveoli)

फेफडों में O2 व CO2 का कुपिकाओं में विनिमय बाह्य श्वसन (External Respiration) कहलाता है। इस श्वसन को “हिमेटोसिस” भी कहते हैं।

कुपिका में उपस्थित O2 का आंशिक दाब (PO2) 104 mmHg होता है व धमनी रुधिर में इसका मान 40 mm of Hg होता है, जिससे  कुपिका से O2 निकलकर धमनी रुधिर में चली जाती है।

कुपिका में उपस्थित CO2 का आंशिक दाब (PCO2) mmHg होता है जबकि धमनी रुधिर में इसका मान 46 mmHg होता है, जिससे CO2 धमनी रुधिर से निकलकर कुपिका में आ जाती है।

 

ऊतकों में गैसों विनिमय (Exchange of gases in tissue)

ऑक्सीजनित रुधिर O2 को लेकर ऊतकों तक जाता है। तथा ऊतकों तथा रुधिर के मध्य गैसों का आदान-प्रदान होता है। जिसे अन्तः श्वसन (Internal Respiration) कहते है।

ऊतकों में O2 का आंशिक दाब (PO2) 40mmHg जबकि धमनी में  95mmHg होता है जिससे रक्त धमनी से ऊतकों में चला जाता है। इसी प्रकार ऊतकों में CO का आंशिक दाब (PCO2) 45mmHg जबकि शिरा में 40 mmHg होता है जिससे रक्त ऊतकों से शिरा में चला जाता है।

गैसों का परिवहन (Transport of gases)

ऑक्सीजन का परिवहन

O2 का परिवहन दो रूपों में होता है –

  1. प्लाज्मा के साथ घुलित अवस्था में O2 का परिवहन

100ML ऑक्सीजनित रुधिर में 20ml ऑक्सीजन होती है। इसमें से 0.3ml से 0.6ml ऑक्सीजन प्लाज्मा के साथ घुलित अवस्था में परिवहित होते है।

  1. ऑक्सी-हीमोग्लोबिन के रूप में O2 का परिवहन

ऑक्सी-हीमोग्लोबिन के रूप में 97-99% ऑक्सीजन  का परिवहन होता है।

 

हीमोग्लोबिन (Hemoglobin)

हीमोग्लोबिन RBC में पाया जाने वाला श्वसन वर्णक है, इसमें हीम प्रोस्थेटिक समूह तथा ग्लोबिन प्रोटीन होती है। हीम प्रोस्थेटिक समूह में आयरन Fe2+ अवस्था में होता है।

O2 हीमोग्लोबिन  के साथ जुड़कर इसके परिवहन में सहायता करता है। हीमोग्लोबिन की प्रतिशत संतृपत्ता व O2 की सांद्रता के मध्य आरेखित वर्क को “वियोजन वक्र” कहते हैं । यदि CO2 की सांद्रता बढती है तो हिमोग्लोबिन की संतृपता घटती है। CO2 की उच्च सांद्रता पर वियोजन वक्र दांयीं तरफ खिसक जाता है इसे “बोहर प्रभाव” भी कहते हैं ।

 

हीमोग्लोबिन की कार्बनमोनो ऑक्साइड से बंधुता

हीमोग्लोबिन की O2 की तुलना में CO के साथ 230-250 गुणा ज्यादा बंधन क्षमता होती है जिसके कारण हीमोग्लोबिन CO के साथ एक कार्बोक्सी-हिमोग्लोबिन बनाता है, इसका रंग काला होता है, कार्बोक्सीहिमोग्लोबिन में आयरन Fe3+ अवस्था में आ जाता है। जो जानलेवा होता है। इसके कारण मानव की मृत्यु हो जाती है।

 

कार्बनडाइऑक्साइड का परिवहन

CO2 का परिवहन निम्न तीन प्रकार से होता है-

1. प्लाज्मा में घुलित अवस्था में (7%)

रक्त प्लाज्मा में उपस्थित जल के साथ CO2 क्रिया करके कार्बोनिक अम्ल बनाती है और इसी घुलित अवस्था में 7% CO2 का परिवहन होता है।

100 ml रुधिर लगभग 0.3 ml CO2 का परिवहन प्लाज्मा के साथ घुलित अवस्था में करता है।

2. बाइकार्बोनेट के रूप में (70%)

रक्त प्लाज्मा में बना कार्बोनिक अम्ल अत्यधिक आयनीकरण के कारण जल्दी ही H+ व HCO32- में वियोजित हो जाता है।

3.कार्बो-मीनो हिमोग्लोबिन के रूप में (23%)

लगभग 20-25 प्रतिशत CO2 का हिमोग्लोबिन द्वारा कार्बेमिनो-हिमोग्लोबिन के रूप में वहन की जाती है। यह बंधन CO2 के आंशिक दाब पर निर्भर करती है।

 

संवातन का नियमन (Regulation of Breathing)

सांस लेने की क्रिया का नियमन मस्तिष्क द्वारा किया जाता है इसके लिए मस्तिष्क में दो केन्द्र होते हैं-

  • श्वसन केन्द्र (Respiratory centre)

यह केंद्र पश्च मस्तिष्क के Medula Oblongata  में पाया जाता है।

  • न्युमोटेक्सिस केन्द्र (Pneumotaxis Centre)

यह केन्द्र पश्च मस्तिष्क पोंस विरोलाई में पाया जाता है।


वेबसाइट कैसे बनाए यहा सीखिए- Click here

 

The post मानव श्वसन तन्त्र appeared first on Aliscience.

]]>
https://aliscience.in/human-respiratory-system-hindi/feed/ 0 10934
विभिन्न पादपों के वानस्पतिक नाम https://aliscience.in/plants-botanical-name-in-hindi/ https://aliscience.in/plants-botanical-name-in-hindi/#respond Fri, 08 Feb 2019 12:32:20 +0000 https://aliscience.in/?p=10920 फलों के वानस्पतिक नाम (Botanical Name of Fruits) क्र.स. साधारण नाम अंग्रेजी नाम वानस्पतिक नाम बोटनिकल नाम 1. आम Mango

The post विभिन्न पादपों के वानस्पतिक नाम appeared first on Aliscience.

]]>
फलों के वानस्पतिक नाम (Botanical Name of Fruits)
क्र.स. साधारण नाम अंग्रेजी नाम वानस्पतिक नाम बोटनिकल नाम
1. आम Mango मेंजिफेरा इंडिका Mangifera indica
2. अनार Pomegranate प्युनीका ग्रेनेटम Punica granatum
3. अमरूद Guava सिडियम गुआवा Psidium guava
4. केला Banana म्युसा पाराडिसिकम Musa paradisicum
5. सेव Apple पाइरस मेलस Pyrus malus
6. ककड़ी Cucumber कुकुमिस सेटाइवस Cucumis sativas
7. तरबूज Watermelon सिट्रुलस वल्गरिस Citrullus vulgaris
8. संतरा Orange सिट्रस ऑरेंटियम Citrus aurantium
9. अनानास Pineapple अननुस सेटाइवस Ananus sativus
10. नारियल Coconut कोकोस न्यूसीफेरा Cocos nucifera
11. सीताफल Custard apple एनोना रेटिकुलाटा Annona reticulata
12. स्ट्रोबेरी Strawberry फ्रेगेरिया अन्नासा Fragaria ananassa
13. अंगूर Grapes विटिस विनीफेरा Vitis vinifera
14. चीकू Chiku अकरस सपोटा Achras sapota
15. ड्रैगन फ्रूट Dragon fruit हाइलोकेरेस अनडूटस Hylocereus undutus
16. किवी Kiwi एक्टिनिडिया डेलिसिओसा Actinidia deliciosa
17. रसबेरी Rasberry रूबस इडियस Rubus idaeus
18. बेर Berry
19. खरबूजा Muskmelon ककड़ी मेलो Cucumis melo
20. लीची Lychee लीची चिनेंसिस Litchi chinensis
21. चेरी Cherry प्रूनस एवियम Prunus avium
22. जामुन Blackberry रूबस Rubus
23. आलू बुखारा Plum प्रूनस डोमेस्टिका Prunus domestica
24. खुबानी Apricot प्रूनस आर्मेनियाका Prunus armeniaca
25. आडू Peach प्रूनस पर्सिका Prunus persica
26. पपीता papaya केरिका पपाया Carica papaya
27. नाशपाती Pear पाइरस कम्युनिस Pyrus communis

 

सब्जियों के वानस्पतिक नाम (Botanical Name of Vegetables)

क्र.स. साधारण नाम अंग्रेजी नाम वानस्पतिक नाम बोटनिकल नाम
1. बैंगन Brinjal सोलनम मेलोंगेना Solanum melongena
2. टमाटर Tomato लाइकोपर्सिकन एस्कुलेंटम Lycopersican esculentum
3. पालक Spinach स्पिनेसिया ओलेरेसिया Spinacia oleracea
4. शिमला मिर्च Capsicum कैप्सिकम फ्रूटस्केन्स Capsicum fruitscence
5. मूली Radish रेफेनस सेटाइवस Raphanus sativus
6. गाजर Carrot डाकस केरोटा Daucas carota
7. आलू Potato सोलेनम ट्यूबरसम Solanum tubersum
8. प्याज Onion एलियम सीपा Allium cepa
9. मटर Pea पाइसम सेटाइवम Pisum sativam
10. नींबू Lemon साइट्रस लिमोनियम Citrus Limonium
11. सहजन या शेरना Drumstick मोरिंगा ओलीफेरा Moringa oleifera

 

अनाजों के वानस्पतिक नाम (Botanical Name of Grains)

क्र.स. साधारण नाम अंग्रेजी नाम वानस्पतिक नाम बोटनिकल नाम
1. जौ Barley होर्डियम वल्गरे Hordeum vulgare
2. मक्का Maize ज़िया मेज Zea mays
3. चावल Rice ओराइजा सेटाइवा Oryza sativa
4. गेंहू Wheat ट्रिटिकम एस्टाइवम Triticum aestivum
5. ज्वार Jowar सोरघम वल्गर Sorghum vulgare
6. मेथी दाना Fenugreek seeds ट्राइगोनेला फेनम-ग्रेकोम Trigonella foenum-graecum

यह भी पढ़े

 

दालों के वानस्पतिक नाम (Botanical Name of Pulses)

क्र.स. साधारण नाम अंग्रेजी नाम वानस्पतिक नाम बोटनिकल नाम
1. सोयाबीन Soya bean ग्लाइसीन मैक्स Glycine max
2. Horse Gram डोलिचोस बिफॉउस Dolichos biffoeus
3. अरहर Red Gram केजेनस केजन Cojonus cgjan
4. मूँग Green Gram फेजोलिस औयिकस Phaseolies auicus
5. उड़द Black Gram प्लासो मुंगो Plasoes mungo
6. चना Chickpea साइसर एराइटिनम Cicer arietinum
7. चौलाई / लोबिया Black eyed beans or cowpea विग्ना अनगुइकलाटा  Vigna unguiculata
8. मसूर Lentil लेन्स क्युलीनेरिस Lens culinaris
9. सेम Lima Bean फेजोलस लुनेटस Phaseolus lunatus
10. राजमा Alubia or Red Bean फेजोलस वल्गरिस Phaseolus vulgaris

 

मसालों पादपों के वानस्पतिक नाम (Botanical Name of Spices Plant)

क्र.स. साधारण नाम अंग्रेजी नाम वानस्पतिक नाम बोटनिकल नाम
1. इमली Tamarind tree टेमेरिन्डस इन्डिका Tamarindus indica
2. करीपत्ता Curry plant (leaves) मुरैना कोइनिगि Murraya koenigii
3. पुदीना Mint मेंथा आरवेंसिस Mentha arvensis
4. धनिया  Coriander कोरीएनड्रम सेटाइवम Coriandrum sativum
5. अदरक Ginger ज़िन्ज़िबर ओफिसिनेल Zingiber officinale
6. लहसुन Garlic एलियम सैटिवम Allium sativum
7. काली मिर्च Black Pepper पाइपर नाइगरम Piper nigrum
8. लौंग Clove सियाजियम एरोमेटीकम Syzygium aromaticum
9. हल्दी Turmeric कुरकुमा लोंगा Curcuma longa
10. तेजपत्ता tejpatta Indian cassia bark, सिनेमेमम टमाला Cinnamomum tamala

 

औषधीय पादपों के  वानस्पतिक नाम (Botanical Name of Medicinal Plants)

क्र.स. साधारण नाम अंग्रेजी नाम वानस्पतिक नाम बोटनिकल नाम
1. नीम Neem आज़ाधिरेक्टा इंडिका Azadhirachta indica
2. बरगद Banyan फाइकस बेंगालेंसिस Ficus benghalensis
3. तम्बाकू Tobacco निकोटिना टोबैकम Nicotina tobaccum
4. तुलसी Tulsi ओसिमम सेन्कटम Ocimum sanctum
5. चंदन Sandalwood सेन्टेलम एल्बम Santalum album
6. ताल मख़ाना Hygrophila, Temple plant or Marsh Barbel ह्यग्रोफिला ऑरिक्युलेटा Hygrophila auriculata
7. करंबल Water willow, Shrimp plant जस्टिसिया प्रोकुबेन्स Justicia procumbens
8. अडुळसा Malabar Nut जस्टिसिया एडहाटोडा Justicia adhatoda
9.  Wild Nongmangkha फ़्लोगैन्थस कर्विफ़्लोरस Phlogacanthus curviflorus
10. वज्राद्नती Porcupine flower बारलेरिया प्रियोनाइटिस Barleria prionitis
11. घोरबच या सफ़ेद बच sweetroot or flagroot एकोरस कैलमस Acorus calamus
12. सर्पगंधा Indian snakeroot or Serpentine wood राउवोल्फिया सर्पेनटाइना Rauwolfia serpentina
13. सदाबहार Tiny Periwinkle or Vinca कैथरैनथस रोजस Catharanthus roseus
14. जंगली प्याज indian squill अर्जिनिया इन्डिका Urginea indica
15. गोरख इमली Baobab एडंसोनिया डिजिटाटा Adansonia digitata
16. नाग चम्पा नागकेसर Indian rose chestnut मेसुआ फेरीया Mesua ferrea
17. हरड़ Chebulic Myrobalan, Myrobalan टर्मिनेलिया चेबुला Terminalia chebula
18. जंवासा अलनगी स्यूडोल्हागे Alnagi pseudoalhage
19. बहेड़ा टर्मिनेलिया Terminalia
20. रति अब्रस प्रीकटेरियस Abrus precatarius
21. केबांच Kabanch
22. धतुरा Datura डटूरा स्ट्रैमोनियम Datura stramonium
23. कुळीथ Horse gram, Madras gram मैक्रोटिलोमा यूनिफ़्लोरम Macrotyloma uniflorum
24. बबूल या कीकर Arabic Gum Egyptian thorn अकेशिया नीलोटिका Acacia nilotica
25. अशोक Ashoka सरका इंडिका Saraca indica
26. शिकाकाई Soap pod अकेसिया कोनसिन्ना Acacia concinna
27. मुलेठी Cultivated Liquorice, Sweetwood ग्लाइसीराइजा ग्लेबर Glycyrrhiza glabra
28. बड़ा नागर मोथा Common Nut Sedge, Coco grass, Nutgrass, Purple nutsedge साइपरस रोटंडस Cyperus rotundus

 

सूखे मेवे के वानस्पतिक नाम (Botanical Name of Dried Fruit)

क्र.स. साधारण नाम अंग्रेजी नाम वानस्पतिक नाम बोटनिकल नाम
1. काजू Cashew एनाकार्डियम ऑक्सिडेन्टल Anacardium occidentale
2. बदाम Almond प्रूनस डलसिस Prunus dulcis
3. अखरोट Walnut जुग्लंस रेजिया Juglans regia
4. चिलगोजा Chilgoza पाइनस जिरार्डियाना Pinus gerardiana
5. पिस्ता Pistachios पिस्टेशिया विरा Pistacia vera
6. मुंगफली Groundnut अरेकिस हाइपोजिया Arachis hypogaea
7. सौंफ Fennel फोइनिकुलम वल्गरे Foeniculum vulgare
8. सुपारी Betel पाइपर बीटल Piper betle
9. शाहबलूत Chestnut
10. नारियल Coconut कोकोस न्यूसीफेरा Cocos nucifera
11. चिरौंजी Chironji बुकानेनिया लन्जान Buchanania lanzan
12. खजूर Date फियोनिक्स डेक्टाइलिफेरा Phoenix dactylifera
13. अंजीर Fig फाइकस केरिका Ficus carica

 

अन्य पादपों के  वानस्पतिक नाम (Botanical Name of Other Plants)

क्र.स. साधारण नाम अंग्रेजी नाम वानस्पतिक नाम बोटनिकल नाम
1. कदम्ब Kadamb एंथोसेफ्लस इन्डिकस Anthocephalus indicus
2. गुलमोहर Peacock Flower डेलोनिक्स रेजिया राफिन Delonix regia rafin
3. कचनार Purple orchid tree (Kachnar) बहुनिया पुरपुरिया Bauhinia purpurea
4. पीपल peepal फाइकस रेलीजीओसा लिन. Ficus religiosa Linn
5. लाल मेपल Red maple एसर रूब्रम Acer rubrum
6. सूरजमुखी Sunflower हेलियनथस एनुअस Helianthus annuus
7. टीक Teak टेक्टोना ग्रैंडिस लिन Tectona grandis Linn.
8. Lettuce लैक्टुका सेटाइवा Lactuca sativa
9. लाजवन्ती / छुई-मुई मिमोसा प्युडिका Mimosa pudica
10. शालपर्णी Indian Telegram Plant डेस्मोडियम गाइरेन्स Desmodiun gyrans
11. बाँस Bamboo बाँबोसा आर्दिनेरिफ़ोलिया Bamboosa aridinarifolia
12. कपास Cotton गॉसिपियम हर्बेसम Gossypium herbaceum
13. मनी प्लांट Money Plant एपिप्रीमनम ऑरियम Epipremnum aureum
14. मेंहदी Henna (Mehndi) लॉसनिया इनर्मिस Lawsonia inermis
15. मुश्कदाना, कस्तूरीदाना जंगली भिंडी Okra, Musk mallow, एबेलमोसस मोस्कैटस Abelmoschus moschatus
16. गुडहल Hibiscus, Chinese hibiscus हिबिस्कस रोजासाइनेंसिस Hibiscus rosa-sinensis
17. कंघी Indian Mallow, Country Mallow एबूटिलोन इंडिकम Abutilon indicum
18. क्लब मोस Club Moss, Quillwort आइसोइटीस कोरोमेंडिलीना Isoetes coromandelina
19. आक apple of Sodom Rubber bush कैलोट्रोपिस प्रोसेरा Calotropis procera

 

Our other website – Click here


If you like this post and want to help us then please share it on social media like Facebook, Whatsapp, Twitter etc.

 

The post विभिन्न पादपों के वानस्पतिक नाम appeared first on Aliscience.

]]>
https://aliscience.in/plants-botanical-name-in-hindi/feed/ 0 10920
मानव पाचन तंत्र https://aliscience.in/human-digestive-system-hindi/ https://aliscience.in/human-digestive-system-hindi/#respond Sun, 03 Feb 2019 11:22:54 +0000 https://aliscience.in/?p=10911 मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System) पाचन वह प्रक्रिया है, जिसमें जटिल कार्बनिक पदार्थों (Complex organic material) को जल अपघटनीय

The post मानव पाचन तंत्र appeared first on Aliscience.

]]>
मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)

पाचन वह प्रक्रिया है, जिसमें जटिल कार्बनिक पदार्थों (Complex organic material) को जल अपघटनीय एंजाइमों के द्वारा सरल कार्बनिक पदार्थों में बदल दिया जाता है। पाचन दो प्रकार का होता है-

  1. अन्तःकोशिकीय पाचन (Intracellular digestion)
  2. बाह्य कोशिकीय पाचन (Extracellular digestion)

अन्तःकोशिकीय पाचन (Intracellular digestion)

जब पाचन की प्रक्रिया कोशिका के अन्दर होती है, तो इसे अन्तःकोशिकीय पाचन (Intracellular digestion) कहते है। यह निम्न श्रेणी के जीवों में सम्पन्न होती है। जैसे अमीबा, पैरामिशियम, स्पंज आदि।

 

बाह्य कोशिकीय पाचन (Extracellular digestion)

जब पाचन की प्रक्रिया कोशिका के बाहर होती है, तो इसे बाह्य कोशिकीय पाचन (Extracellular digestion) कहते है। यह उच्च श्रेणी के जीवों में सम्पन्न होती है। जैसे एनेलिडा, मोलस्का, कोर्डेटा

 

कुछ जीव ऐसे भी होते है। जिनमें दोनों प्रकार का पाचन पाया जाता है। जैसे सीलेन्ट्रेटा, मुक्तजीवी प्लेटिहेल्मिनथिज

मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)

मानव में पाचन के लिए पाचन तंत्र पाया जाता है। जिसके दो भाग होते हैं-

  1. आहारनाल (Alimentary canal)
  2. सहायक पाचक ग्रंथियाँ (Assecosry Digestive glands)

मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System in hindi)

आहारनाल (Alimentary canal)

आहारनाल मुख से प्रारम्भ होकर गुदा तक फैली रहती है। इसमें निम्न अंग होते है-

  1. मुख एवं मुख गुहा (Mouth and Buccal cavity)
  2. ग्रसनी (Pharynx)
  3. ग्रसिका या ग्रास नली (Oesophagus or Esophagus)
  4. आमाशय (Stomach)
  5. छोटी आंत (Small Intestine)
  6. बड़ी आंत (Large Intestine)
  7. गुदा (Anus)

 

मुख एवं मुख गुहा (Mouth and Buccal cavity)

मुख होठों से घिरा हुआ छिद्र होता है। जो मुख गुहा में खुलता है। होठ ओरबीक्युलेरिस-ओरिस पेशियों का बना होता है।

मुखगुहा (Buccal cavity)

मुखगुहा पृष्ठ सतह पर दो प्रकार के तालू (Hard and Soft Palate), अधर सतह पर गले (Throat) तथा दोनों ओर गाल (Cheek) की पेशियों से घिरा रहता है। इसमें दांत तथा जीभ स्थित होती हैं।

दांत (Teeth)

दांत भोजन को काटने, चीरने-फाड़ने, चबाने आदि कार्य करते है। मानव में चार प्रकार के दांत पाए जाते हैं-

  1. कृंतक (Incisor)
  2. रदनक (Canine)
  3. अग्र-चर्वणक (Pre-molar)
  4. चर्वणक (Molar)

 

कृंतक (Incisor)

ये भोजन का काटने का कार्य करते है। शाकाहारी जीवों में अधिक विकसित होते है। मानव में इनकी संख्याँ 8 होती है।

 

रदनक (Canine)

ये चीरने-फाड़ने का कार्य करते है। मांसाहारी जीवों में अधिक विकसित होते है। मानव में इनकी संख्याँ 4 होती है।

 

अग्र-चर्वणक (Pre-molar)

ये भोजन को चबाने का कार्य करते है। मानव में इनकी संख्याँ 8 होती है।

चर्वणक (Molar)

ये भोजन को चबाने का कार्य करते है। मानव में इनकी संख्याँ 12 होती है। अंतिम चर्वणक (Last Molar) दांत को अकल दाढ़ (wisdom tooth) कहते है।

 

मानव में पुरे जीवन में दो प्रकार के दांत आते है-

  1. अस्थायी दांत
  2. स्थायी दांत

 

अस्थायी दांत

ये दूध के दांत होते है, जो टूट कर स्थायी दांतों से प्रतिस्थापित हो जाते है। इनकी संख्याँ 20 होती है।

स्थायी दांत

ये दूध के दांत टूटने आने वाले नये दांत अगर ये टूट जाए तो दांत पुनः नहीं आ सकते।

दांतों की संरचना (Structure of Teeth)

दांत की संरचना निम्न तीन भागों में विभेदित रहती है –

टोपी (Crown) :- यह दांत का सबसे बाहरी भाग होता है।  इस पर इनेमल (enamel) का आवरण होता है। जो कैल्शियम फॉस्फेट से बना, शरीर का सबसे कठोर भाग होता है। इसकी उत्पत्ति एक्टोडर्म से होती है।

ग्रीवा (Neck) :- यह दांत का मध्य भाग है, जो मसुडे के अंदर रहता है।

मूल (Root) :- यह दांत की जड़ होती है, जो अस्थि गर्त (bony socket) में स्थित रहती है। मूल के चारों तरफ डेन्टिन (dentine)  का बना आवरण होता है। जिसकी उत्पति मिसोडर्म की ओड़ोंटोब्लास्ट (mesodermal odontoblast)  से होती है।

 

जीभ (Tongue)

यह पेशीय संरचना है। जो एक संवेदी अंग भी है। इस पर स्वाद का पता लगाने के लिए रस-कलिकाएँ पायी जाती है। जो चार प्रकार की होती हैं-

  1. फिलीफॉर्म पैपिला
  2. फॉलिऐट पैपिला
  3. फंजीफॉर्म पैपिला
  4. वेलेट पैपिला

जीभ का पिछला भाग हॉयोइड अस्थि से जुड़ा रहता है। तथा फ्रेनुलम लिंगुअल के द्वारा यह मुख गुहा की फर्श से जुड़ी रहती है।

ग्रसनी (Pharynx)

यह श्वसन मार्ग तथा पाचन मार्ग का उभयनिष्ट है। ग्रसनी (Pharynx)

तीन भागों में विभेदित होता है –

(i)  नासा ग्रसनी (Nasopharynx)

(ii) मुख ग्रसनी (Oropharynx)

(iii) कंठ ग्रसनी (Laryngo pharynx)

ग्रसनी ग्रसिका में खुलती है।

ग्रसिका या ग्रास नली (Oesophagus or Esophagus)

यह आमाशय तथा ग्रसनी को जोडती है। यह डायफ्राम को क्रास करते हुए आमाशय में खुलती है। इसमें क्रमानुकुंचन (Peristalsis) द्वारा भोजन आमाशय तक पहुँचता है।

 

आमाशय (Stomach)

यह मनुष्य के शरीर में बायीं तरफ होता है। इसके तीन भाग होते हैं-

  1. जठरागम (Cardiac)
  2. फंडस या काय (Fundic/Body)
  3. जठरनिर्गम (Pyloric)

आमाशय की भित्ति में जठर ग्रंथि (Gastric Glands) पायी जाती है।

 

छोटी आंत (Small Intestine)

यह सबसे लम्बी, संकरी तथा नलिकाकार संरचना है। इसके तीन भाग होते हैं-

(i) ग्रहणी या ड्यूडीनम (Duodenum)

यह C – आकर की होती है। आमाशय इसमें ही खुलता है।

(ii) अग्र क्षुद्रान्त्र या जेजुनम (Jejunum)

यह ग्रहणी (Duodenum) तथा पश्च क्षुद्रान्त्र (Ileum) के मध्य का भाग है।

(iii) पश्च क्षुद्रान्त्र या इलियम (Ileum)

यह आहारनाल का सबसे बड़ा भाग है। जो बड़ी आंत (Large Intestine) के अन्धनाल में खुलता है।

बड़ी आंत (Large Intestine)

इसका व्यास छोटी आंत से बड़ा होने के कारण इसको बड़ी आंत कहते है। इसका व्यास 4-6 cm होता है।

इसके तीन भाग होते हैं-

(i) अन्धनाल (Caecum)

(ii) वृहदांत्र (Colon)

(iii) मलाशय (Rectum)

 

अन्धनाल (Caecum)

छोटी आंत का पश्च क्षुद्रान्त्र अन्धनाल में खुलता है। इसमें कोई पाचन नहीं होता लेकिन पशुओं के अन्धनाल में सेल्यूलोज का पाचन करने वाले एंजाइम पाए जाते है।

पश्च क्षुद्रान्त्र तथा अन्धनाल के जुड़ने वाले स्थान पर अंगुलीनुमा उभार पाया जाता है, जिसे कृमिरुपी परीशेषिका (Vermiform Appendix) कहते है। जो मनुष्य में एक अवशेषी अंग है।

वृहदांत्र (Colon)

यह बड़ी आंत (Large Intestine) का सबसे बड़ा भाग है। इसके चार भाग होते हैं-

1. आरोही वृहदांत्र (Ascending Colon)

2. अनुप्रस्थ वृहदांत्र (Transverse Colon)

3. अवरोही वृहदांत्र (Descending Colon)

4. सिग्मोइड वृहदांत्र (Sigmoid Colon)

 

 

मलाशय (Rectum)

सिग्मोइड वृहदांत्र (Sigmoid colon) मलाशय में खुलती है। जिसमें मल एकत्र रहता है। इसका अंतिम भाग गुदानाल (Anal canal) कहलाता है। यह गुदा (Anus) द्वारा बाहर खुलता है।

गुदा (Anus)

यह एक छिद्र है जिसके द्वारा मल को त्यागा जाता है। इनमें अवरोधनी पेशियाँ (sphinctor muscle) होती है। जिनके द्वारा गुदा छिद्र के बंद होने अथवा खुलने का नियंत्रण होता है।

इसमें भीतर की तरफ अनैच्छिक अवरोधनी (involuntary sphinctor) तथा बाहर की तरफ ऐच्छिक अवरोधनी (voluntary spinctor) होती है।


Keywords

  1. मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)
  2. मानव के पाचन तंत्र के विभिन्न अंग
  3. पाचन तंत्र की संरचना
  4. पाचन तंत्र के विभिन्न अंगों के कार्य

Accessory Digestive Glands (सहायक पाचक ग्रंथियाँ)

लार ग्रंथि (Salivary Gland)

ये मुख गुहा में खुलती है इनकी उत्पत्ति एक्टोडर्म से होती है। मानव में इनकी संख्या तीन जोड़ी होती है। जो निम्न हैं-

1. कर्णपूर्व लार ग्रंथि (Parotide Gland)

यह कानों के आगे की ओर स्थित होती है।

2. अधोजम्भ लार ग्रंथि (Sub-Maxillary or Sub-Mandibular Gland)

Maxilla तथा Mandibul जबड़े (जम्भ) को कहते है। यह जबड़े के नीचे स्थित होती है।

3. अधोजिह्वा लार ग्रंथि (Sub-Lingual Gland)

Lingual शब्द जीभ (जिह्वा) के लिए उपयोग में लिया जाता है। यह जीभ के नीचे स्थित होती है।

मानव में तीनो प्रकार की लार ग्रंथियों द्वारा प्रतिदिन 1-1.5 लिटर लार (Saliva) सावित होती है।

लार (Saliva)

यह लारग्रंथि द्वारा स्रावित रस है। लार का pH 6.8 होता है। लार में पानी, लवण, श्लेष्मा (mucin), लाइसोजाइम (lysozyme), एमिलेज या टाइलिन (Amylase/Ptyalin) तथा thyocyanate  होता है।

मुखगुहा में लार मिले हुए भोजन को बोलस (Bolus) कहते है।

 

जठर ग्रंथि (Gastric Glands)

यह आमाशय की भित्ति (Wall) में पायी जाती है। इसमें निम्न प्रकार को कोशिकाएँ होती हैं –

1. गॉब्लेट कोशिका (Goblet cell) :- ये श्लेष्मा (Mucous) का स्त्राव करती है। यह आमाशय की भित्ति को HCl से बचाता है।

2.अम्लजन कोशिका (Oxyntic cell) :- ये केवल फंडस भाग में स्थित होती है। ये HCI स्त्रावित करती है।  इनको parietal cells भी कहते है।

3. मुख्य कोशिका (Chief Cells) :-  ये कोशिकाएँ निष्क्रिय पाचन एंजाइम (digestive enzyme) का स्त्रवण करती है, जिन्हें जाइमोजन्स कहते है। जैसे पेप्सिन तथा रेनिन।

हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के कार्य (Function of HCl)

यह भोजन में पाए जाने वाले कीटाणुओं को मारता है जिससे भोजन सड़ने से बचता है। HCl निष्क्रिय पाचक एंजाइम जैसे Propepsinogen को सक्रिय Pepsin बनता है।

आमाशय में अर्द्ध पचे हुए भोजन के तरल पेस्ट  को “काइम” (Chyme) कहते है।

यकृत (Liver)

यह शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है इसकी उत्पत्ति एन्ड़ोडर्म से होती है। यकृत (Liver) का वयस्क मनुष्य में भार लगभग 1.2-1.5 किलोग्राम होता है।

यकृत की संरचना (Strucure of Liver)

इसकी दो पलियां (lobes) होती है। जिनको यकृत पलियां (Hepatic lobes) कहते है। ये यकृत की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाइया (Structural and functional unit) है। प्रत्येक पलियाँ संयोजी ऊतक (Connective tissue) की एक पतली परत से ढकी होती है, जिसे ग्लिसंस केपसूल (Glissons Capsules)कहते है।

यकृत की कोशिकाओं (Hepatocytes) से पित (Bile) का स्त्राव होता  है। जो यकृत नलिका से होते हुए एक पतली पेशीय थैली –पित्ताशय में जमा होता है।

पित्ताशय (Gall Bladder)

यह हरे रंग की थैली है। जो यकृत पर पायी जाती है। इनमें पित (Bile) जमा तथा सांद्रित होता है। पित (Bile) का ग्रहणी में स्राव भी पित्ताशय (Gall Bladder) ही करता है। यह चूहे, ऊंट तथा घोड़े में अनुपस्थित होता है।

 

पित्ताशय की नलिका (duct) यकृतीय नलिका (Hepatic duct) से मिलकर एक पित्तवाहिनी (Bile duct) बनती है। पित्ताशयी नलिका एंव अग्नाशयी नलिका (Pancreatic duct), दोनों मिलकर यकृतअग्नाशयी वाहिनी (hapeto-pancreatic duct) द्वारा ग्रहणी में खुलती है जो ओडी अवरोधिनी (Odi spinctor) से नियंत्रित होती है।

 

पित्त रस (Bile juice)

पित्तरस एक हल्के पीले-हरे रंग का तरल है। इसमें कोई पाचक एंजाइम नहीं होता। यह वसा का पायसीकरण करता है।

पित्त रस में निम्न रसायन होते हैं-

(a)अकार्बनिक लवण (Inorganic Salts) जैसे Bicarbomates, Chlorides, Carbonates तथा sodium, potassium, calcium के फॉस्फेट

(b) कार्बनिक लवण Organic salts जैसे Sodium taurocolate तथा sodium Glycolate

(c) पित्त वर्णक (Bile pigments) जैसे Bilirubin (पिला), Biliverdin (हरा)

(d) वसीय पदार्थ (Fatty substance) जैसे Cholestrol, Lecithin तथा Phospholipids

कभी-कभी किसी विकार के कारण पित्ताशय को काट कर हटा दिया जाता है जो कोलेसायस्टेकटोमी (Choleysestectomy) कहलाता है।

अग्न्याशय (Pancreas)

अग्नाशय ग्रहणी के C आकर के भाग में स्थित होती है। इसका अंतिम सिरा प्लीहा को छूता है। यह बहि: स्त्रावी (Exocrine) और अत:स्त्रावी (Endocrine), दोनों ही ग्रन्थियों की तरह कार्य करती है। इसलिए इसे मिश्रित ग्रंथि (Mixed gland) भी कहते है।

यह यकृत के बाद शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि है। इसके द्वारा बहि: स्त्रावी ग्रंथि (Exocrine Gland) के रूप में अग्न्याशयी रस (Pancreatic juice) का स्राव होता है।

अग्न्याशयी रस (Pancreatic juice)

यह क्षारीय, रंगहीन है। इसका pH 7.5-8.5 होता है।

इसमें निम्न प्रकार के पाचक एन्जाइम होते हैं –

(i) अग्न्याशयी एमिलेज (Pancreatic amylase)

(ii) प्रोटीन का पाचन करने वाले प्राकएंजाइम (Proteolytic proenzymes) जैसे Trypsinogen, Chymotrypsinogen, Procarboxypeptidase

(iii) अग्न्याशयी लाइपेज (Pancreatic Lipase or Steapsin)

(iv) न्यूक्लिक अम्ल का पाचन करने वाले एंजाइम (Nucleases) जैसे DNAse and RNAase

 

आंत्र ग्रंथि (Intestinal Gland)

यह छोटी आंत की भित्ति के म्युकोसा झिल्ली में गॉब्लेट तथा ब्रूस बॉर्डर की कोशिकाएँ पाई जाती है। ये इसके द्वारा आंत्ररस (Intestinal juice) स्रावित होता है। जिसे सक्कस एंटेरिकस कहते है।

आंत्ररस (Intestinal juice)

आंत्ररस (Intestinal juice) में निम्न एंजाइम पाए जाते हैं-

1.  प्रोटीन का पाचन करने वाले एंजाइम जैसे Peptidase, Aminopeptidase

2.  कार्बोहाइड्रेजेज (Carbohydrases) जैसे Amylases, Maltase, Lactase, Invertase,

3.  वसा के पाचन के लिए Lipase

4.  न्युक्लियोटाइड के पाचन के लिए Nucleotidase, Nucleosidase

5.  Phosphatase

भोजन के पाचन की क्रियाविधि (Mechanism of Digestion of Food)

कार्बोहाइड्रेट का पाचन (Digestion of Carbohydrate)

कार्बोहाइड्रेट के पाचन की शरुआत मुखगुहा से हो जाती है। लार के एंजाइम Amylases पॉलीसेकैराइड कार्बोहाइड्रेटस को डाइसेकैराइड में बदलता है। तथा अन्य कार्बोहाइड्रेजेज डाइसेकैराइड को मोनोसेकैराइड में बदल देते है। जैसे-

  • स्टार्च → माल्टोज [Amylase]
  • माल्टोज → ग्लूकोज + ग्लूकोज [Maltase]
  • सुक्रोज → ग्लूकोज + फ्रुक्टोज [Sucrase]
  • लेक्टोज → ग्लूकोज + ग्लेक्टोज [Lactase]

 

वसा का पाचन (Digestion of Fat)

लिपिड यानि वसा का पाचन Lipases के द्वारा किया जाता है। लेकिन लाइपेज केवल इमल्सिकृत की हुई वसा का पाचन करता है। जो पित्त के द्वारा किया जाता है।

  • इमल्सिकृत वसा → वसीय अम्ल + ग्लिसरोल [Lipase]

प्रोटीन का पाचन (Digestion of Protein)

भोजन में उपस्थित प्रोटीन के पाचन की क्रिया आमाशय से शुरू हो जाती है जैसे

  • प्रोटीन → पेप्टोन + प्रोटिएज [Pepsin, Trypsin, Chymotrypsin]
  • पेप्टोन + प्रोटिएज → अमीनो अम्ल [Carboxypeptidase, Peptidase, Aminopeptidase]

रेनिन दूध में पाए जाने वाली कैसीन प्रोटीन को पैराकेसीन में बदल देता है।

 

न्यूक्लिक अम्लों का पाचन (Digestion of Nucleic Acids)

न्यूक्लिक अम्ल जैसे DNA, RNA का पाचन छोटी आंत्र में होता है। जैसे

  • DNA → Nucleotides [Deoxyribonuclease]
  • RNA → Nucleotides [Ribonucleases]

 

पचित भोजन का अवशोषण (Absorption of digested food)

आंत्र की भित्ति में अंगुलीनुमा उभार पाए जाते है जिनको विलई, अंकुर, या दीर्घरोम (Villi) कहते है। पचित भोजन का अवशोषण अंकुर के द्वारा ही किया जाता है।

ग्लूकोज, गैलेक्टोज वसा अम्ल और अमीनो अम्ल का अवशोषण सक्रिय परिवहन (Active transport), फ्रुक्टोज का अवशोषण सुसाध्य विसरण (Facilitated Diffusion) द्वारा होता है।  अवशोषण के पश्चात इन सभी को खून में पहुंचाया जाता है। जबकि वसा तथा वसा में घुलनशील विटामिनों को लसिका (Lymph) में पहुंचाया जाता है।

 

अपचित पदार्थ का निष्कासन तथा मल (Removal of  undigested food and stool/ Feces)

मलाशय में मल एकत्र होता है, और नियत समय पर मलाशय की भित्तियों से संवेग (impulses) उत्पन्न होते है। जो सवेदी तंत्रिका के माध्यम से मेरुरुज्जू (spinal cord) तक जाते हैं,  वहाँ से संवेग प्रेरक तंत्रिका द्वारा मलाशय में पहुँचते है। और गुदा की अवरोधिनी पेशियों (sphincter Muscle)  में विस्तार कर देते जिससे मलत्याग (defecation) की इच्छा होती है जब मस्तिष्क के द्वारा भेजे गये संवेग से अवरोधिनी पेशियां ढीली होती है तो मलत्याग होता है।

भोजन के पाचन तथा अवशोषण के पश्चात्‌ अपशिष्ट आंत्र में बच जाता है,  मल  (stool/ Feces) कहलाता है। मल में भोजन का अपच्य भाग, आंत्र की श्लेष्मल झिल्ली के टुकड़े, जीवाणुओं आदि उपस्थित होते है। मल का पिला रंग पित्त वर्णक बिलीरुबिन तथा बिलीवरडीन के कारण होता है।

 


Keywords

  1. मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)
  2. मानव के पाचन तंत्र के विभिन्न अंग
  3. पाचन तंत्र की संरचना

 

visit our other website – Aliseotech


 

The post मानव पाचन तंत्र appeared first on Aliscience.

]]>
https://aliscience.in/human-digestive-system-hindi/feed/ 0 10911
कोशिका सिद्धांत https://aliscience.in/cell-theory-by-scliden-schwann-hindi/ https://aliscience.in/cell-theory-by-scliden-schwann-hindi/#respond Wed, 30 Jan 2019 14:24:12 +0000 https://aliscience.in/?p=10906 कोशिका सिद्धांत (Cell Theory) कोशिका सिद्धांत मैथियास जैकब श्लाइडेन (Mathias Jacob Scliden, 1838) व थियोडोर श्वान (Theodore Schwann, 1839) ने

The post कोशिका सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
कोशिका सिद्धांत (Cell Theory)

कोशिका सिद्धांत मैथियास जैकब श्लाइडेन (Mathias Jacob Scliden, 1838) व थियोडोर श्वान (Theodore Schwann, 1839) ने दिया। उन्होंने कहा की पादपों तथा जंतुओं का शरीर कोशिका तथा कोशिका के उत्पादों से मिलकर बने है।

सर्वप्रथम रुडोल्फ विर्चो (Rudolf Virchow) ने बताया की ओमनिस सेलुला–इ–सेलुला (Omnis Cellulaie Cellula means all cells arise from pre-existing cells ) अथार्त कोशिका विभाजित होती है, और नई कोशिकाओं की उत्पति पूर्ववर्ती (pre-exiting) कोशिकाओं के विभाजन से होती है।

आधुनिक कोशिका सिद्धांत (Modern cell theory)

रुडोल्फ विर्चो (Rudolf Virchow) ने श्लाइडेन व श्वान के इस सिद्धांत में बदलाव कर नया कोशिका सिद्धांत प्रतिपादित की, जिसे आधुनिक कोशिका सिद्धांत (Modern cell theory) कहते है। जिसके अनुसार-

  1. प्रत्येक सजीव का शरीर एक या अधिक कोशिकाओं से बना होता है।
  2. कोशिका सजीवों की संरचनात्मक एंव क्रियात्मक इकाई (Structural and functional unit) है।
  3. सभी कोशिकाएँ आधारी रूप से (basically) एक समान होती हैं। जिसमें जीवद्रव्य (Cytoplasm), केन्द्रक (Nucleus) एवं कोशिकांग (Organelles) होते है।
  4. कोशिका पर पतली कोशिका झिल्ली (Cell memberane) एवं कोशिका भित्ति (Cell wall) का आवरण होता है। कोशिका भित्ति केवल पादप कोशिकाओं (Plant cells) में पाई जाती है, प्राणी कोशिकाओं (Animal cells) में नहीं पाई जाती है।
  5. सभी कोशिकाओं का रासायनिक संगठन (Chemical compostion) एंव उपापचयी क्रियाएँ (Metabolic reaction) एक समान होती हैं। इसलिए कोशिका को सजीवों की क्रियात्मक इकाई (Functional unit) कहा जाता है।
  6. नई कोशिकाएँ पूर्ववर्ती कोशिकाओं के विभाजन से बनती है।
  7. कोशिकाओं आनुवंशिक पदार्थ उपस्थित होता है जो एक सन्तति से दूसरी सन्तति में वंशागत होता है। इसलिए कोशिका को वंशागति की इकाई  (unit of heredity) कहा जा सकता है।

 


कोशिका सिद्धांत के अपवाद (Exeption of Cell Theory)

कोशिका सिद्धांत के अपवाद  निम्न  है-

(I) विषाणु (Virus) 

वायरस अकोशिकीय होते है इनमें केवल न्यूक्लिक अम्ल  (DNA अथवा RNA) और प्रोटीन  होता है।

(II) विषाणु कण/ विरोइडस (Viriods)

विरोइडस केवल आरएनए कण को कहा जाता है।

(III) विरिओन (Virions) 

ये विषाणुविय जीनोम के निष्क्रिय वाहक (Inactive carrier) होते हैं।

(IV) प्रीओन (Prions)

ये विषाणु का बाहरी केवल प्रोटीन का आवरण होता है  इनमें न्यूक्लिक अम्ल अनुपस्थित होते है।

(V) लाल रक्त कणिकाएँ (RBC) 

स्तनधारियों के रक्ताणु में केन्द्रक अनुपस्थित होता है। ऊँट व लामा के आरबीसी में केन्द्रक उपस्थित होते है।

(VII) लसिकाणु (Lymphocytes)

बी और टी लसिकाणु में प्रारुपी आनुवांशिक पदार्थ (Formative genetic material) अनुपस्थित होते हैं।

 

इनको के निम्न कारणों से अपवाद कहा जाता हैं –

  1. इनमें कोशिका झिल्ली, जीवद्रव्य, कोशिकांगो, एन्जाइम तथा अन्य कोशिकीय अवयव (Cell Componant) आदि का अभाव होता है।
  2. इनमें विभाजन की क्षमता नहीं पाई जाती है। इनकों विभाजन के लिए जीवित परपोषी कोशिका (Live host cell) की आवश्यकता है
  3. सामान्यत: इनमें DNA अथवा RNA में से कोई एक ही उपस्थित होता है। जबकि प्रत्येक कोशिका में दोनों केन्द्रक अम्ल पाये जाते हैं।

 


यह भी पढ़े

 

The post कोशिका सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
https://aliscience.in/cell-theory-by-scliden-schwann-hindi/feed/ 0 10906
सामाजिक अधिगम सिद्धांत https://aliscience.in/theory-of-social-learning-hindi/ https://aliscience.in/theory-of-social-learning-hindi/#respond Tue, 29 Jan 2019 13:11:30 +0000 https://aliscience.in/?p=10903 सामाजिक अधिगम सिद्धांत (Theory of Social Learning) इस का प्रतिपादन किया था अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) ने किया था।  इसके

The post सामाजिक अधिगम सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
सामाजिक अधिगम सिद्धांत (Theory of Social Learning)

इस का प्रतिपादन किया था अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) ने किया था।  इसके अनुसार व्यक्ति अवलोकन, नकल और आदर्श व्यवहार के प्रतिमान के माध्यम से एक-दूसरे से सीखते हैं।

समाज द्वारा स्वीकार किए जाने वाले व्यवहार को अपनाना तथा वर्जित व्यवहार को नकारना ही सामाजिक अधिगम है।

सामाजिक अधिगम सिद्धांत को व्यवहारवाद और संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धांतों के बीच की योजक कड़ी कहा जाता है क्योंकि यह सिद्धांत ध्यान(motivation), स्मृति (attention) और प्रेरणा (memory) तीनों को संयोजित करता है।

 

इसलिए अल्बर्ट बंडूरा को प्रथम मानव व्यवहार-संज्ञानवादी कहते है।

बंडूरा का प्रयोग (Experiment of Bandura)

बंडूरा ने एक बालक पर बेबीडॉल प्रयोग किया। बंडूरा ने एक बालक को तीन तरह की मूवी दिखाई गई।

प्रथम मूवी में सामाजिक मूल्य (Social value) आधारित थी। जिसे देख कर बालक बेबी डॉल के साथ सामाजिक व्यवहार (social behavior) दर्शाता है।

सामाजिक अधिगम सिद्धांत Theory of Social Learning hindi

दूसरी मूवी प्रेम पर आधारित थी। जिसे देख कर बालक डॉल से स्नेह करता है, उसे सहलाता है।

तीसरी मूवी हिंसात्मक (violent) दृश्य-युक्त थी। जिसे देख कर बालक गुड़िया की गर्दन को तोड़ देता है।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

इस प्रयोग के आधार बंडूरा ने यह निष्कर्ष निकला की छोटे बच्चों को यह नहीं पता होता, की उनको क्या सीखना चाहिए और क्या नहीं सीखना चाहिए। इसलिए बच्चों के सामने हमेशा आदर्श व्यवहार के प्रतिमान (Ideal Model) को प्रस्तुत करना चाहिए।


यह भी पढ़े

बंडूरा ने सामाजिक अधिगम के चार उपाय बताये हैं-

  1. ध्यान
  2. अवधारण
  3. पुनः प्रस्तुतीकरण
  4. पुनर्बलन

 

 

 

ध्यान या अवधान (Attention)

अधिगम विषयवस्तु (जिस को सीखना है) को आकर्षक तथा प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना अवधान कहलाता है।

 

अवधारण या धारण करना (Retention)

अधिगम के लिए प्रस्तुत किए गए विषय वस्तु को कितना सिखा गया है।

 

पुनः प्रस्तुतीकरण (Reproduction)

उस वस्तु का अधिगम कम प्रभावशाली हो तो अधिगम की विषय वस्तु को पुनः प्रस्तुत करना चाहिए। जैसे छात्र किसी विषय वस्तु को कम सीख पाते हैं तो उसको पुनः दोहराना चाहिए। सिखाने के लिए मॉडल, चित्र, चार्ट आदि सामग्री का उपयोग करना चाहिए।

 

पुनर्बलन (Rehabilitation)

विषय वस्तु की पुनः प्रस्तुतीकरण के पश्चात यदि बालक अधिगम की प्रतिपुष्टि कर दे तो यह प्रतिपुष्टि ही पुनर्बलन है। बालक यदि उसे अच्छी तरह सीख लेता है। उसकी प्रशंसा द्वारा उसे प्रेरित करना चाहिए।

 

 

 

बंडूरा ने सामाजिक अधिगम के निम्न  कारक बताए हैं-

  • अभिप्रेरणा (Motivation)
  • स्व नियंत्रण (Self-control)
  • स्वविवेक (Self discretion)
  • स्व निर्णय (Self-determination)
  • स्वअनुक्रिया (Self response)

 

 

सामाजिक अधिगमवाद का शैक्षिक महत्व (Ecucational Importance of social learning theory)

  1. बच्चों के व्यक्तित्व विकास में सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत सामाजिक अधिगम वाद है।
  2. यदि बच्चों के सामने अच्छे गुणों वाले व्यवहार को प्रदर्शित किया जाता है। तो उस बालक में वांछित गुणों का किया जा सकता है।
  3. सामाजिक अधिगम का आधार अनुकरण (Imitation) है।
  4. बच्चे के सामने आदर्श मॉडल प्रस्तुत करना चाहिए।
  5. बच्चों के सामने बुरे व्यवहार, अनैतिक मॉडल से बचाना चाहिए।

Our other website – Click here


If you like this post and want to help us then please share it on social media like Facebook, Whatsapp, Twitter etc.

The post सामाजिक अधिगम सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
https://aliscience.in/theory-of-social-learning-hindi/feed/ 0 10903
पुनर्बलन सिद्धांत https://aliscience.in/theory-of-reinforcement-hindi/ https://aliscience.in/theory-of-reinforcement-hindi/#respond Mon, 28 Jan 2019 11:21:10 +0000 https://aliscience.in/?p=10896 पुनर्बलन सिद्धांत (Theory of Reinforcement) यह सिद्धांत क्लार्क एस हल के द्वारा दिया गया।  इनके अनुसार आवश्यकता (Need) अधिगम का

The post पुनर्बलन सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
पुनर्बलन सिद्धांत (Theory of Reinforcement)

यह सिद्धांत क्लार्क एस हल के द्वारा दिया गया।  इनके अनुसार आवश्यकता (Need) अधिगम का आधार है अथार्त आवश्यकता ही चालक (Drive) है। आवश्यकता पूरी होते ही चालक कम हो जाता है जिससे अधिगम की दर कम होने लगती है।

 

मिलर एवं डॉलार्ड का प्रयोग (Experiment of Miller & Dollard)

मिलर एवं डॉलार्ड ने छः वर्ष की एक लड़की पर प्रयोग किया जब लड़की भूखी थी तो उसे बताया गया की किताबों की अलमारी में एक किताब के नीचे कैंडी छिपी हुई है।

लड़की कैंडी को पाने के लिए किताबों को बाहर निकालना शुरू कर देती है। और लगभग 210 सेकंड के बाद वह सही किताब पा लेती जिसके नीचे कैंडी छुपी है।

पुनर्बलन सिद्धांत (Theory of Reinforcement)

इसके पश्चात उसे कमरे से बाहर भेज दिया जाता है। और उसी किताब के नीचे एक अन्य कैंडी को छिपा दिया जाता है। इस बार वह लड़की कैंडी को 86 सेकंड में ही ढूंढ लेती है।

 

इस प्रयोग को बार-बार दोहराने पर नौवें पुनरावृत्ति पर वह लड़की तुरंत 2 सेकंड में ही उस कैंडी उस पा लेती है।

 

कैंडी को पाना लड़की के लिए चालक (Drive) का प्रदर्शन है और पुस्तकों के नीचे कैंडी को ढूँढना उस चालक को कम करने के लिए की गयी अनुक्रिया (Response) है।

अंततः सही पुस्तक मिलने पर उसे अनुक्रिया के लिए पुरस्कार मिला जिसके कारण उसकी आदत बना गई।

 

 

क्लार्क एस हल के अनुसार

यदि थार्नडाइक के प्रयोग में भूखी बिल्ली को भोजन दे दिया जाए। तो वह उछल कूद करना बंद कर देती है। तथा उस पर बाह्य उद्दीपक का प्रभाव नहीं पड़ता है।

बिल्ली की आवश्यकता भोजन को बिल्ली के लिए चालक है। इसकी पूर्ति होते ही बिल्ली का अधिगम करना बंद हो जाता है।

क्लार्क एस हल ने उद्दीपक के बजाय आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि कोई भी जीव अपनी आवश्यकता पूरी करने के लिए जो क्रिया करता है। वह उसे आसानी से सीख लेता है।

यह भी पढ़े

 

पुनर्बलन सिद्धांत के अन्य (Other Names of Theory of Reinforcement)

  1. चालक न्यूनता सिद्धांत (Drive reduction theory)
  2. आवश्यकता की कमी पूर्ति का सिद्धांत (Need satisfaction theory)
  3. यथार्थ का सिद्धांत (The principle of reality)
  4. उद्दीपक-प्रतिक्रिया सिद्धांत (Stimulus-response theory)

 

स्किनर ने इसे आदर्श एवं सर्वश्रेष्ठ अधिगम सिद्धांत (Ideal and most elegant theory) कहा है।

 

पुनर्बलन सिद्धांत का शैक्षिक महत्व (Educational importance of reinforcement theory)

  1. यह सिद्धांत बालको में अधिगम के लिए प्रेरणा पर बल देता है।
  2. इस सिद्धांत के अनुसार पाठ्यक्रम का निर्माण बालको की आवश्यकता के अनुसार करना चाहिए।
  3. बालको की क्रिया तथा आवश्यकता में मध्य सम्बन्ध होना चाहिए।
  4. अधिगम बालको की आवश्यकता की पूर्ति करने वाला होना चाहिए।

मोबाइल से संबंधित ब्लॉग – Click here

वेबसाइट कैसे बनाए यहा सीखिए- Click here

Our other website – PCB


If you like this post and want to help us then please share it on social media like Facebook, Whatsapp, Twitter etc.

The post पुनर्बलन सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
https://aliscience.in/theory-of-reinforcement-hindi/feed/ 0 10896
गेस्टाल्टवाद या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत https://aliscience.in/theory-of-gestalt-or-insight-theory-hindi/ https://aliscience.in/theory-of-gestalt-or-insight-theory-hindi/#respond Sun, 27 Jan 2019 11:33:29 +0000 https://aliscience.in/?p=10884 गेस्टाल्टवाद सिद्धांत (Theory of Gestalt) गेस्टाल्ट जर्मन शब्द है, जिसका अर्थ पूर्ण (whole) या समग्र आकार (total pattern or configuration)

The post गेस्टाल्टवाद या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
गेस्टाल्टवाद सिद्धांत (Theory of Gestalt)

गेस्टाल्ट जर्मन शब्द है, जिसका अर्थ पूर्ण (whole) या समग्र आकार (total pattern or configuration) है। इनको सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत (Insight theory) भी कहते है।

इस सिद्धांत में समस्या की प्रकृति को संपूर्ण आकार में अध्ययन करने पर बल दिया गया है। इसके अनुसार “the whole is more important than the parts” यानि पूर्ण अंश से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

इसलिए कहा जा सकता है कि यह सिद्धांत पूर्ण से अंश (Whole to part) की ओर की और या स्थूल से सूक्ष्म (Macro to micro) का प्रतिपादित करते है।

गेस्टाल्टवाद सिद्धांत के प्रवर्तक मैक्स वर्दीमर, कोफ्का तथा कोहलर है। इनको गेस्टाल्टवादी (Gestalt psychologists) कहते है।

 

गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों ने ‘प्रयास और त्रुटी (trial and error),  ‘प्रयास और सफल (strive and succeed) के सिद्धांतों का खण्डन किया है।

 

इनके अनुसार करके सीखना व अनुभव से सीखना छोटे बच्चों द्वारा अपनाया गया अधिगम है। कुछ कार्य ऐसे होते हैं, जिन्हें बालक पहली बार अपने आप सीख लेते है। गेस्टाल्टवाद सिद्धांत विवेकशील तथा चिंतनशील (Prudent and Reflective) बालकों के अधिगम पर बल देता है।

 

कोहलर का प्रयोग (Kohlar’s Experiment)

प्रथम प्रयोग (First Experiment)

कोहलर ने सुल्तान नामक एक चिंपेंजी पर प्रयोग किया। कोहलर ने भूखे सुल्तान को एक कमरे में बंद रखा तथा उसकी छत से केले लटका दिए। सुल्तान इन्हें प्राप्त करने का प्रयास करता है। लेकिन असफल रहता है।

सुल्तान ने कमरे का बारीकी से पूर्ण आकार  (समग्र आकार) में अध्ययन किया और पाया कि कमरे में एक बड़ा बॉक्स था। सुल्तान ने बॉक्स का प्रयोग किया और केले प्राप्त किए।

 

सुल्तान द्वारा कमरे में बॉक्स को देखना समस्या के पूर्ण आकार का अध्ययन तथा बॉक्स का प्रयोग करना सुल्तान की अंतर्दृष्टि व सूझ-बुझ (Insight and sense) का परिणाम है।

गेस्टाल्टवाद या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत theory of gestalt or insight theory hindi

 

द्वितीय प्रयोग (Second Experiment)

एक अन्य प्रयोग में कोहलर ने सुल्तान के पिंजरे में दो छड़ें रखीं। इन छड़ियों में ऐसी व्यवस्था रखी की छोटी छड़ी एक छोर को लंबी छड़ी के एक छोर में फिट किया जा सकता है,  जिससे छड़ी लम्बी हो जाती है।

सुल्तान को परीक्षण और त्रुटि के माध्यम से दोनो छड़ियों को जोड़कर लम्बी बनाने का विचार नहीं मिला।

लेकिन जब कोहलर ने बड़ी छड़ी में अपनी उंगली डालकर संकेत दिया, तो सुल्तान ने पूरी स्थिति देखी और अंतर्दृष्टि के माध्यम से सही कार्य किया।

 

उपरोक्त प्रयोग के आधार पर हम कह सकते है कि प्यासा कौवा कहानी तथा न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण प्रयोग भी सूझ व अंतर्दृष्टि का ही परिणामहै।

यह भी पढ़े

 

सूझ या अंतर्दृष्टि के सिद्धांत पर आधारित नियम (Law base on Insight theory)

 

  • समानता का नियम (Law of Similitude)
  • निकटता का नियम (Law of Proximity)
  • समापन का नियम (Law of Closure)
  • निरंतरता का नियम (Law of Continuity)
  • समग्रता का नियम (Law of completeness)

 

 

गेस्टाल्टवाद सिद्धांत का शैक्षिक महत्व  (Educational significance of Gestalt theory)

  1. शिक्षक को सिखाने के लिए गेस्टाल्टवाद सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए अपने अनुभव के आधार पर सरल, ठोस और छोटी-छोटी इकाइयों के रूप में अपने छात्रों को पाठ्यक्रम सामग्री पेश करनी चाहिए।
  2. पाठ्यक्रम का निर्माण गेस्टाल्ट वाद सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए।
  3. गेस्टाल्टवाद सिद्धांत के द्वारा बालको मे चिंतन (Thinking), मनन (contemplation), स्वाध्याय (Self-study), कल्पनाशीलता (Imagination), तार्किकता (Logic), आदि गुणों का विकास किया जा सकता है।
  4. गणित विद्यार्थियों द्वारा उपयोगी समस्या समाधान विधि (Problem Solving Method) इसी सिद्धांत पर आधारित है।
  5. अनुसंधान विधि (Research Method) तथा खोज विधि (Search Method) गेस्टाल्ट वाद सिद्धांत पर आधारित है।
  6. यह सिद्धांत रचनात्मक कार्य (creative work) के लिए उपयोगी है यह रटने (Rote) जैसी क्रिया का खण्डन करता है।

मोबाइल से संबंधित ब्लॉग – Click here

वेबसाइट कैसे बनाए यहा सीखिए- Click here

Our other website – PCB


If you like this post and want to help us then please share it on social media like Facebook, Whatsapp, Twitter etc.

The post गेस्टाल्टवाद या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
https://aliscience.in/theory-of-gestalt-or-insight-theory-hindi/feed/ 0 10884
अधिगम का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत https://aliscience.in/pavlov-classical-conditioning-theory-of-learning/ https://aliscience.in/pavlov-classical-conditioning-theory-of-learning/#respond Sat, 26 Jan 2019 11:07:02 +0000 https://aliscience.in/?p=10844 अधिगम का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत (Classical Conditioning Theory of Learning) इस सिद्धांत के प्रवर्तक पावलोव है। अनुबंधन (Conditioning) में किसी

The post अधिगम का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
अधिगम का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत (Classical Conditioning Theory of Learning)

इस सिद्धांत के प्रवर्तक पावलोव है। अनुबंधन (Conditioning) में किसी भी वस्तु अथवा परिस्थिति को उद्दीपन के रूप में काम में लिया जाता है। इस उद्दीपन के कारण अधिगमकर्ता (Learner) अनुक्रिया प्रकट करता है।

उद्दीपन (Stimulus) तथा अनुक्रिया (Response) के बीच सम्बन्ध ही अनुबंधन (Conditioning) है।

 

पावलोव का प्रयोग (Expriment of Pavlov)

मनोवैज्ञानिक पावलोव ने कुत्ते की लार ग्रंथि पर प्रयोग किया।

पावलोव ने कुत्ते को भोजन देने से पहले घंटी बजायी तथा यह प्रक्रिया कई दिनों तक दोहराई जैसे ही खाना देने के पहले घंटी बजाई जाती थी कुत्ते के मुँह में लार आने लगती ।

अधिगम का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत pavlov Classical Conditioning Theory of Learning hindi

उन्होंने पाया कि कुत्ते को भोजन न देकर केवल घंटी ही बजाए जाए, तो भी कुत्ते के मुँह से लार टपकने लगती है।

कुत्ते की घंटी के प्रति इस प्रतिक्रिया को पावलोव ने सहज-संबंध क्रिया की संज्ञा दी।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

पावलोव का प्रयोग के प्रयोग में भोजन स्वाभाविक उद्दीपक (Natural stimulant) है, जिसे अनअनुबन्धित उद्दीपन (Unconditioned Stimulus,UCS) कहा जाता है।

भोजन को देखने पर कुत्ते के मुँह में लार आना एक स्वाभाविक अनुक्रिया (Natural  Response) है, जिसे अनअनुबन्धित अनुक्रिया (Unconditioned Response ,UCR) कहा गया है।

भोजन देने से पहले घंटी बजाना अनुबंधित उद्दीपक (Conditioned Stimulus ,CS) कहा है

अगर कुत्ते को भोजन न देकर केवल घंटी (अनुबंधित उद्दीपक CS) ही बजाई जाए तो लार आना अनुबंधित अथवा अस्वाभाविक अनुक्रिया (Conditioned Response, CS)  है।

 

इस सिद्धांत को इस प्रकार समझ सकते है, की जैसे अध्यापक के आने (स्वाभाविक उद्दीपक) पर कक्षा में विद्यार्थी चुप हो जाते (स्वाभाविक अनुक्रिया) है। लेकिन यदि अध्यापक कक्षा में नहीं हो और मॉनिटर कक्षा में ये बोल के गुरुजी आ रहे है। तो विद्यार्थी चुप हो जाते है जो अनुबंधित अथवा अस्वाभाविक अनुक्रिया (Conditioned Response, CS)  है।

यह भी पढ़े

शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत के अन्य नाम (Other Names of Classical Conditioning)

  • अनुबंधन सिद्धांत (Conditioning theory)
  • अधिगम का प्राचीनतम सिद्धांत (The oldest theory of learning)
  • अनुबंधन-अनुक्रिया सिद्धांत (Condition-response theory)
  • संबंध-प्रतिक्रिया सिद्धांत (Conditioned- reflex theory
  • प्रतिबद्ध-अनुक्रिया सिद्धांत (Committed-response theory)
लैड़ल के अनुसार

संबंध-प्रतिक्रिया (Conditioned reflex) में किसी काम के लिए स्वाभाविक उद्दीपक (Natural Response) के स्थान पर एक प्रभावहीन उद्दीपक (Ineffective Response) काम में लिया जाता है। जो स्वाभाविक उद्दीपक से सबंधित होने के कारण प्रभावी (effective) हो जाता है।

जॉन बी. वॉटसन द्वारा शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत का मानव पर प्रयोग (Experiment of Classical Conditioning Theory on Human by John B. Watson)

जॉन बी. वॉटसन ने पावलोव के प्रयोग को मनुष्य पर लागू किया 1921 ई. में वाटसन ने एक 11 महीने के शिशु अल्बर्ट का अध्ययन किया। वाटसन में अल्बर्ट को सफेद चूहे से डरने के लिए सफेद चूहे को तेज तथा डरी हुई आवाज के साथ फैंकते।

पहले  अल्बर्ट के सामने चूहा आने पर डर का कोई संकेत नहीं दिखाता, लेकिन जब चूहे को तेज तथा डरी हुई आवाज (UCS) छोड़ा, तो अल्बर्ट चूहों से डरने लगा।

इस प्रयोग से यह कहा जा सकता है कि तेज आवाज (UCS) प्रेरित भय (UCR) के कारण बच्चे में चूहे से भय (CR) उत्त्पन्न हुआ।

 

शिक्षा में अनुबंधन सिद्धांत के अनुप्रयोग (Uses of Classical Conditioning Theory in Education)

  1. यह सिद्धांत सीखने की स्वाभाविक विधि पर आधारित है।
  2. अनुबंधन सिद्धांत पशु-पक्षियों में प्रशिक्षण में सहायता करता है।
  3. इस सिद्धांत के उपयोग से मंदबुद्धि बालकों में अधिगम को बढ़ाया जा सकता है।
  4. यह सिद्धांत बालकों में अच्छी आदतों के निर्माण में तथा बुरी आदत को छुड़ाने में सहायता करता है।
  5. शिक्षण में शिक्षण सहायक सामग्री का उपयोग इसी सिद्धांत के आधार पर किया जाता है।

Image Source for educational purpose – kidskunst.info


मोबाइल से संबंधित ब्लॉग – Click here

वेबसाइट कैसे बनाए यहा सीखिए- Click here

Our other website – PCB


If you like this post and want to help us then please share it on social media like Facebook, Whatsapp, Twitter etc.

The post अधिगम का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
https://aliscience.in/pavlov-classical-conditioning-theory-of-learning/feed/ 0 10844
अन्तः प्रद्रव्यी जालिका https://aliscience.in/endoplasmic-reticulum-in-hindi-ser-rer/ https://aliscience.in/endoplasmic-reticulum-in-hindi-ser-rer/#respond Sat, 26 Jan 2019 05:51:20 +0000 https://aliscience.in/?p=10839 अन्तः प्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic reticulum) Endoplasm का अर्थ है जीवद्रव्य में और रेटिकुलम (reticulum) का अर्थ है एक प्रकार का

The post अन्तः प्रद्रव्यी जालिका appeared first on Aliscience.

]]>
अन्तः प्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic reticulum)

Endoplasm का अर्थ है जीवद्रव्य में और रेटिकुलम (reticulum) का अर्थ है एक प्रकार का जाल या जालिका।

इसकी खोज तथा नामकरण पोर्टर (Porter) द्वारा की गयी।

एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम को झिल्लीयों का तंत्र (system of membrane) भी कहा जाता है।

यह परिपक्व RBC को छोड़कर सभी यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाता है। मांसपेशियों में एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम को सार्कोप्लाज्मिक रेटिकुलम कहा जाता है। जिसमें Ca की अधिकता होती है।

उपापचय रूप से अधिक सक्रिय कोशिकाओं जैसे आंत्रकोशिका, प्लाज्मा कोशिका, अग्न्याशय कोशिका आदि में इसकी संख्या अधिक विकसित होते हैं।

विश्रांति अवस्था वाली कोशिकाओं और प्रारंभिक भूर्ण कोशिकाओं में इनकी संख्या कम होती है। स्पर्मेटोसाइट में यह कम विकसित होता है।

अन्तः प्रद्रव्यी जालिका की संरचना (Structure of Endoplasmic reticulum)

एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम तीन प्रकार के घटकों का एक जाल है-

  1. सिस्टर्नी (Cisternae)
  2. पुटिका (Vesicle)
  3. नलिकाएँ (Tubule)

 

सिस्टर्नी (Cisternae)

ये लंबी, चपटी, अशाखित झिल्ली से बनी संरचना है। ये सिस्टर्नी समानांतर व्यवस्थित होकर  लैमिली (lamellae) का निर्माण करती हैं। ये RER में अच्छी तरह से विकसित होती है।

पुटिका (Vesicle)

ये सिस्टर्नी से अलग, गोल और अंडाकार थैलीनुमा संरचना हैं, जो SER में प्रचुर मात्रा में पायी जाती हैं।

नलिकाएँ (Tubule)

ये पुटिका तथा सिस्टर्नी से अलग-थलग और शाखित संरचना हैं। ये SER में अच्छी तरह से विकसित है।

 

अन्तः प्रद्रव्यी जालिका गोल्जी काय के समान होती है, लेकिन इसके घटक भागों को अलग किया जा सकता है। गोल्जी काय की तरह जीवद्रव्य में इसका कोई निश्चित स्थान नहीं है

अन्तः प्रद्रव्यी जालिका के प्रकार (Types of Endoplasmic reticulum)

खुरदरी अन्तः प्रद्रव्यी जालिका (Rough Endoplasmic Reticulum)

RER में राइबोसोम की बड़ी उपइकाई राइबोफ़ोरिन नामक ट्रांसमेम्ब्रेन ग्लाइकोप्रोटीन द्वारा जुड़ी होती है।

RER अग्न्याशय, यकृत और गॉब्लेट कोशिकाओं में पाया जाता है। अनुवादन (Translation) के द्वारा बनी पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला को राइबोसोम से RER में स्थान्तरित क्र दिया जाता है जहाँ पर प्रोटीन फोल्डिंग (Protein Folding) और प्रोटीन प्रसंस्करण (Protein Processing) का कार्य होता है। तथा यहाँ पर प्रोटीन छांटनी (protein sorting) का कार्य भी होता है।

अन्तः प्रद्रव्यी जालिका Endoplasmic reticulum in Hindi

चिकनी अन्तः प्रद्रव्यी जालिका (Smooth Endoplasmic Reticulum)

इस प्रकार की ER पर राइबोसोम और राइबोफोरिन अनुपस्थित होते हैं। यह मांसपेशियों और ग्लाइकोजन भंडारण करने वाली यकृत कोशिकाओं में पाया जाता है।

SER कोशिकाझिल्ली के लिपिड का संश्लेषण तथा स्टेरॉयड हार्मोन संश्लेषण का प्रमुख स्थल है।

एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम के रूपांतरण (Modification of Endoplasmic Reticulum)

सारकोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Sarcoplasmic reticulum)

ये SER के रूपांतरण से बनते है। इनमें Ca2+ संचित रहता है। कंकाली पेशियों और हृद पेशियों में सारकोप्लाज्मिक रेटिकुलम पाए जाते है।

ग्लाइकोसोम (Glycosome)

यकृत कोशिकाओं में SER ग्लाइकोजन का संग्रहण करता है जिसे ग्लाइकोसोम कहते है।

माइलॉयड काय (Myeloid Bodies)

ये रेटिना की वर्णकित उपकला कोशिकाओं (pigmented epithelial cells) में मौजूद विशेष प्रकार की SER हैं। ये प्रकाश संवेदी (light sensitive) होते है

एर्गैस्टोप्लाज्म (Ergastoplasm)

ये ER की लैमिला (lamellae) में पाए जाने वाले राइबोसोम का समूह हैं।

माइक्रोसोम (Microsome)

ये राइबोसोम से संबंधित ER का हिस्सा हैं। जो जीवित कोशिकाओं में नहीं पाया जाता। इनका पात्रे प्रोटीन संश्लेषण (in vitro protein synthesis) के अध्ययन में उपयोग किया जाता है।

टी-नलिकाएं (T-Tubules)

ये कंकाली पेशियों और हृद पेशियों की कोशिकाओं में अनुप्रस्थ व्यवस्थित होते हैं। ये पेशियों की कोशिकाओं में संकुचन को उत्तेजित और संचालित करते हैं।

 

चिकनी अन्तः प्रद्रव्यी जालिका के कार्य (Functions of Smooth Endoplasmic Reticulum)

  • SER पर एस्कॉर्बिक एसिड (Vitamin C) का संश्लेषित किया जाता है।
  • SER पर विटामिन ए से रेटिना के वर्णकों का निर्माण होता है।
  • ये लिपिड संश्लेषण और स्टेरॉयड हार्मोन में भाग लेता है
  • ऑक्सीजन स्थानांतरण एंजाइम (ऑक्सीजिनेज) की सहायता से SER आविषालु पदार्थ की विषालुता को कम (Detoxification of drug) किया जाता है।
  • पौधों में SER स्फिरोसोमे (Sphaerosomes) का निर्माण करती है।

खुरदरी अन्तः प्रद्रव्यी जालिका के कार्य (Functions of Rough Endoplasmic Reticulum)

  • विभिन्न प्रकार की प्रोटीन का संश्लेषण (Synthesis of Protein)।
  • ग्लाइकोसिलेशन (Glycosylation) की प्रक्रिया RER में ही होती है।
  • RER में प्रोटियोसोम (proteasome) की सहायता से अनफोल्डेड प्रोटीन (Unfolded protein) को नष्ट किया जाता है।
  • RER द्वारा लाइसोसोम के एंजाइमों का निर्माण किया जाता है।

मोबाइल से संबंधित ब्लॉग – Click here

वेबसाइट कैसे बनाए यहा सीखिए- Click here

Our other website – PCB


If you like this post and want to help us then please share it on social media like Facebook, Whatsapp, Twitter etc.

 

The post अन्तः प्रद्रव्यी जालिका appeared first on Aliscience.

]]>
https://aliscience.in/endoplasmic-reticulum-in-hindi-ser-rer/feed/ 0 10839
अधिगम का क्रिया-प्रसूत सिद्धांत https://aliscience.in/operant-conditioning-theory-of-learning-hindi/ https://aliscience.in/operant-conditioning-theory-of-learning-hindi/#respond Fri, 25 Jan 2019 06:57:28 +0000 https://aliscience.in/?p=10830 अधिगम का क्रिया-प्रसूत सिद्धांत (Operant Conditioning Theory of Learning) यह सिद्धांत फेडरिक स्किनर (Burrhus Frederic Skinner) द्वारा दिया गया। बी.एफ. स्किनर

The post अधिगम का क्रिया-प्रसूत सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
अधिगम का क्रिया-प्रसूत सिद्धांत (Operant Conditioning Theory of Learning)

यह सिद्धांत फेडरिक स्किनर (Burrhus Frederic Skinner) द्वारा दिया गया।

बी.एफ. स्किनर बीसवीं सदी के पहले मानव मौलिक व्यवहारवादी (Human fundamentalist behaviorist) थे।

स्किनर ने अपनी पुस्तक “टेक्नोलॉजी ऑफ टीचिंग (Techology of technology)” में ‘माइक्रो टीचिंग (Micro Teaching)’ तथा ‘अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Instruction)’ शब्द दिए।

 

स्किनर का चूहे पर प्रयोग (Skinner’s Experiment on Rat)

स्किनर ने सफेद चूहे पर अधिगम के प्रयोग किए। स्किनर में अपने प्रयोग के लिए एक बॉक्स का निर्माण करवाया। इस बॉक्स में घुमावदार मार्ग बनाये गये जिसमें चूहा दौड़ लगाता। इस बॉक्स में ऐसी अवस्था की गई की लीवर के दबने पर भोजन प्राप्त हो सके।

 

जब चूहा बॉक्स में विभिन्न मार्गो में दौड़ लगाता है तो अचानक उसका पैर लीवर पर पड़ता और लीवर दब जाता है। लीवर के दबने से उसको भोजन की प्राप्ति होती है।

अधिगम का क्रिया-प्रसूत सिद्धांत ( Operant Conditioning Theory of Learning)

चूहे का विभिन्न मार्गो से गुजरना एक अनुक्रिया (response) और उसे भोजन की प्राप्ति होना उद्दीपक (stimulate) तथा प्रोत्साहन है। इसलिए इसे अनुक्रिया उद्दीपक सिद्धांत (response-stimulus theory)  भी कहा जाता है।

इससे निष्कर्ष निकलता है कि क्रिया-प्रसुत व्यवहार (Operant behavior), उद्दीपक (stimulate) पर आधारित ना होकर अनुक्रिया (response) पर आधारित होता है।

यदि किसी क्रिया को करने के बाद कोई बल प्रदान करने वाला उद्दीपन मिलता है, तो अधिगम की शक्ति बढ़ जाती है। जैसे किसी विद्यार्थी को जब अंक प्राप्ति या किसी कार्य को करने पर ईनाम दिया जाता है, या प्रशंसा की जाती है। तो उसके कार्य करने की शक्ति में वृद्धि हो जाती है।

 

स्किनर का कबूतर पर प्रयोग (Skinner’s Experiment on Pigeon)

कबूतर पर प्रयोग के लिए स्किनर ने एक ऐसे बॉक्स का प्रयोग किया जिसमे कुंजी को दबाने से दाना प्राप्त हॉप सके कबूतर जब इस कुंजी पर चोंच मरता है। तो उसको दाने के प्राप्ति होती है।

 

क्रिया-प्रसूत सिद्धांत के अन्य नाम (Other Names of Theory Operant Conditioning)

  1. नैमेतिक सिद्धांत (Ethics theory)
  2. अनुकूलित-अनुक्रिया सिद्धांत (Conditioned Response Theory)
  3. अनुक्रिया-उद्दीपक सिद्धांत (Response-stimulate Theory)

 

सूक्ष्म शिक्षण (Micro-teaching)

एक शिक्षक अपनी पाठ्य पुस्तक को छोटे-छोटे खण्डो में बांट कर प्रस्तुत करता है तथा प्रत्येक खंड की समाप्ति के बाद आवश्यक पुनर्बलन (Reinforcement) देता है।

 

अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed learning)

इसके अंतर्गत शिक्षक शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षण मशीनों एवं विभिन्न सहायक शिक्षण साधनों का उपयोग करता है।

 

स्किनर के अभिक्रमित अनुदेशन (क्रमादेशित निर्देश) में निम्न घटक शामिल हैं-

  1. व्यवहारिक उद्देश्य (Behavioral objectives)
  2. अनुदेशन के छोटे-खण्ड, सूक्ष्म शिक्षण (Small frames of instruction)
  3. स्व- पदानियमन (Self-pacing)
  4.  प्रश्न पर शिक्षार्थी की सक्रिय प्रतिक्रिया (Active learner response to the inserted question)
  5. तत्काल प्रतिक्रिया(Immediate feedback)

Keyword

  1. क्रिया-प्रसूत सिद्धांत (Operant Conditioning Theory)
  2. स्किनर का चूहे पर प्रयोग (Skinner’s Experiment on Rat)
  3. स्किनर का कबूतर पर प्रयोग (Skinner’s Experiment on Pigeon)

मोबाइल से संबंधित ब्लॉग – Click here

वेबसाइट कैसे बनाए यहा सीखिए- Click here

Our other website – PCB


If you like this post and want to help us then please share it on social media like Facebook, Whatsapp, Twitter etc.

 

The post अधिगम का क्रिया-प्रसूत सिद्धांत appeared first on Aliscience.

]]>
https://aliscience.in/operant-conditioning-theory-of-learning-hindi/feed/ 0 10830