अवपंक कवक / फफूंद

slime moulds in hindi , अवपंक कवक / फफूंद

अवपंक कवक / फफूंद (Slime moulds)

ये अपघटनकारी प्रोटिस्टा (decomposer protists) है। ये कैरोलस लीनियस के दो जगत वर्गीकरण में कवक के मिक्जोमाइसीटीज (myxomycetes) वर्ग में सम्मिलित किया गया।
ये जन्तुओं से घनिष्ट सम्बन्धित होते हैं। इसलिए डी बेरि द्वारा माइसीटोजोआ (mycetozoa) कहा गया।

अवपंक कवक के सामान्य अभिलक्षण (Common characteristics of slime moulds)

ये प्रायः मुक्तजीवी होते हैं, तथा मलबे जैसे गिरी हुई पत्तियों तथा काष्ठ के गले हुए लट्ठों पर वृद्धि करते हैं।
इनमें नग्न प्रोटोप्लास्ट होता है, तथा कायिक अवस्था में कोशिका भित्ति नहीं होती है। लेकिन इनके बीजाणुओं में सेल्युलाॅज की बनी कोशिका भित्ति होती है, अतः इनकी कायिक अवस्था जन्तुओं के समान होती है, जबकि प्रजननिक अवस्था पादपों समान होती है। तथा बीजाणु निर्माण की प्रकृति कवक समान होती है।

बीजाणु अत्यधिक प्रतिरोधी होते हैं, तथा प्रतिकूल परिस्थितियों में भी कई वर्षों तक जीवित रह सकते हैं। बीजाणु वायु प्रवाह द्वारा फ़ैलते हैं।

इनमें पर्णहरित का अभाव होता है, तथा ये विषमपोषी होते है। प्रजनन अलैंगिक तथा लैंगिक दोनों प्रकार का होता है।

यदि आप केवल एनसीईआरटी का अध्ययन करते हैं। तो इतना ही लेख आपके लिए काफी है। अगर आप अवपंक कवकों के बारे में विस्तार से जानना चाहते तो नीचे वाला लेख पढ़िए

अवपंक कवक का वर्गीकरण (Classification of slime moulds)

यह समूह जीवों के दो पृथक प्रकारों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है-

  1. अकोशिकीय या प्लाज्मोडियम अवपंक कवक
  2. कोशिकीय या काॅम्युनल अवपंक कवक

1. अकोशिकीय या प्लाज्मोडियम अवपंक कवक (Acellular or Plasmodial slime moulds)

  • ये पतली सड़ी-गली पत्तियों तथा इमारती काष्ठ पर पाई जाती है। इनका शरीर मुक्तजीवी (free living), बहुकेन्द्रीय(multinucleate), नग्न (naked) एवं द्विगुणित (diploid mass)  होता है, जिसे प्लाज्मोडियम कहते हैं। गति कूटपादों (pseudopodia) द्वारा होती है।
  • प्रतिकूल परिस्थितियों में पूर्ण प्लाज्मोडियम अनेक बहुकेन्द्रकीय(polycentric) फलनकाय (fruiting bodies) बनाते है। ये फलनकाय स्पोरोकार्प (sporocarp) कहलाते है, जिसमें एक वृन्त होता है, तथा जिसके शीर्ष पर स्पोरेन्जियम (sporangium)  या बीजाणुधानी होती है। इनमें बीजाणु बनते है। स्पोरेन्जियम की भित्ति पेरिडियम (peridium) कहलाती है।
  • स्पोरेन्जियम में धागों के समान संरचना का उलझा हुआ जाल होता है, जिसे केपिलिटियम (capillitium) कहते हैं।अवपंक कवक
  • इन स्पोरेन्जियम में द्विगुणित प्रोटोप्लास्ट (कोशिका भित्ति विहीन कोशिक) अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित बीजाणु बनाते है।
  • अंकुरित होने पर बीजाणु द्विकशाभिक युग्मक बनाते हैं, ये स्वार्म कोशिकाएँ (swarm cells) या अगतिशील मीक्सअमीबी  (non-motile myxamoebae) कहते है।
  • लैंगिक जनन समयुग्मकी (homogamous) प्रकार का होता है। द्विगुणित युग्मनज (Zygote) प्रत्यक्ष रूप से प्लाज्मोडियम बनाता है, जो द्विगुणित केन्द्रक के बार-बार समसूत्री विभाजन द्वारा बहुकेन्द्रकीय हो जाता है।
  •  अलैंगिक जनन विखण्डन (fission) विधि द्वारा होता है।
  • उदाहरण- फाइसेरम, फाइसेरेला, फ्युलिगो, डिक्टिडियम, लाइकोगेला

2. कोशिकीय या काॅम्युनल अवपंक कवक (Cellular slime moulds or communal slime moulds )

  • ये एककेन्द्रकीय (uninucleate) कोशिका वाले होते है। इनमें कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है।
  • कोशिकीय अवपंक कवक कोलोनियल अवस्था में होती है, जिसमें 100 एककेन्द्रकीय, अगुणित कोशिकाएँ कोलोनियों के रूप में एकत्रित रहती है।
  • काॅलोनियाँ प्रोटोप्लाज्म (नग्न कोशिका) के एकल बहुकेन्द्रकीय संरचना के रूप में रहती है, जिसे कूटप्लाज्मोडियम (pseudoplasmodium) कहते हैं।
  • कूट प्लाज्मोडियम के निर्माण के दौरान रसायनुचलन गति (chemotactic movement ) द्वारा  अनेक कोशिकाएँ एक-दूसरे के पास आती है।
  • कूट प्लाज्मोडियम बहुकोशिकता (multicellularity) एवं श्रम विभाजन (division of labour) की आद्य (primitive)अवस्था दर्शाते हैं। अतः इन्हे कोम्युनल अवपंक कवक भी कहते हैं।
  • बहुकोशिकता (multicellularity) एवं श्रम विभाजन (division of labour) उच्च श्रेणी के जीवों में पाया जाता है।
  • उपरोक्त आधारों पर अवपंक फफूंद को जगत प्रोटिस्ट तथा आद्य कवक माना गया है।
  • लैंगिक प्रजनन असमयुग्मकी (anisogamous) होता है। इनमें भी मिक्सअमीबी युग्मक का निर्माण होता है जो प्रतिकूल परिस्थितियों के दौरान सिस्ट (cyst) बनाती है, जिसे माइक्रोसिस्ट (Microcyst) कहते हैं।
  • शुष्क परिस्थितियों के दौरान कूटप्लाज्मोडियम पर स्पोरोकार्प उत्पन्न होता है, जो शाखित या अशाखित हो सकता है, स्पोरोकार्प की प्रत्येक शाखा में एक एककेन्द्रकीय (monocentric) स्पारेंजियम यानि बीजाणुधानी होती है। स्पोरेन्जियम (Sporangium) भित्ति रहित होती है।
  • स्पोरेन्जियम के अन्दर बीजाणु बनते है।अनुकूल परिस्थितियों के आने पर बीजाणु (Spore) मुक्त हो जाते हैं।
  • प्रत्येक बीजाणु द्वारा अंकुरित होता है, तथा मिक्सअमीबा (myxamoeba) बनाता है। मिक्स अमीबी स्वतंत्र रूप से रहते हैं, तथा बार-बार समसूत्री विभाजन करके अनेक कोशिकाएं बनाते हैं जो एकत्रित तथा बहुगुणित होकर कूट प्लाज्मोडियम बनाते हैं।
  • इनमें से एक मिक्सअमीबा (myxamoeba) बड़ा हो जाता है, तथा अपने चारों ओर उपस्थित छोटे-छोटे मिक्सअमीबी को निगल लेता है और प्लाज्मोगेमी (यानि उनका जीव द्रव्य जुड़ता है) होती है, तथा संलयित प्रोटोप्लास्ट चारों ओर मोटी भित्ति स्त्रावित करता है, जो मेक्रोसिस्ट बनाती है मेक्रोसिस्ट में केरियोगेमी होती है, तथा यह युग्मनज बन जाता है।
  • युग्मनज में बाद में इसमें अर्द्धसूत्री विभाजन होता है, तथा अनेक समसूत्री विभाजन अनेक अगुणित मिक्सअमीबी बनाते हैं, जो कि मेक्रोसिस्ट भित्ति के विघटन द्वारा मुक्त होते हैं।
  • उदाहरण-डिक्टियोस्टीलियम, पोलिस्पोन्डिलियम

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