राजस्थान में पर्यटन उद्योग (Tourism Industry in Rajasthan) | Aliscience

राजस्थान में पर्यटन उद्योग

राजस्थान में पर्यटन उद्योग (Tourism Industry in Rajasthan)

भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या 0.38% है, जिसमे से 22 प्रतिशत  विदेशी पर्यटक हर साल राजस्थान के प्राचीन किले व  महल, उनका इतिहास और यंहा की प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ़ उठाने आते हैं। यह बात बिलकुल सच है की भारत भ्रमण का हर तीसरा विदेशी सैलानी अपने आप को राजस्थान आने से नहीं रोक पाता है।

राजस्थान के कुछ प्रसिद्ध पर्यटक स्थल जयपुर, बीकानेर, पुष्कर, अजमेर, जोधपुर, माऊंट आबू, उदयपुर, रणथम्बोर, चित्तौडगढ़, जैसलमेर, बूंदी, कोटा में स्थित हैं और यंहा सबसे ज्यादा विदेशियों को घूमने आते हुए देखा जा सकता है।

राजस्थान के प्रमुख महोत्सव

हमारे राज्य राजस्थान के कई जिलों में कुछ प्रमुख महोत्सव मनाया जाता है जो वंहा के कुछ विशेष व महत्वपूर्ण बातों को दर्शाता है। ऐसे महोत्सव एक निर्धारित महीने में होते है, और यही कारण है की यंहा विदेशी सैलानी ज्यादा से ज्यादा देखे जाते हैं।

राजस्थान में पर्यटन उद्योग (Tourism Industry in Rajasthan)

राजस्थान में पर्यटन उद्योग (Tourism Industry in Rajasthan)

आइये जानते है ऐसे ही कुछ प्रमुख महोत्सव के बारे में:

  • जैसलमेर में जनवरी-फरवरी महीने में अंतर्राष्ट्रीय मरू महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
  • बीकानेर में भी जनवरी महीने में ही ऊंट महोत्सव मनाया जाता है।
  • फरवरी-मार्च के महीने में बाड़मेर का अंतर्राष्ट्रीय थार महोत्सव मनमोहक होता है।
  • सावन के शुक्ल पक्ष की तीज को जयपुर में बेहद ही आकर्षक तीज महोत्सव होता है जो पुरे राजस्थान में प्रसिद्ध है।
  • भाद्र महीने के कृष्ण पक्ष की तीज को बूंदी में कजली तीज का मेले का आयोजन किया जाता है।
  • चैत्र शुक्ल की तीज को जयपुर में गणगौर का मेला लगता है जिसकी झांकियां देखने लायक होती है।
  • कार्तिक महीने की पूर्णिमा को पुष्कर में कार्तिक महोत्सव मनाया जाता है।
  • माघ महीने की पूर्णिमा को डूंगरपुर में वेणेश्वर महोत्सव का आयोजन होता है।
  • फरवरी महीने में भरतपुर में ब्रज महोत्सव उल्लास के साथ मनाया जाता है।
  • शेखावाटी महोत्सव राज्य के शेखावाटी इलाके जैसे, झुंझनू और चूरू में फरवरी महीने में होता है।
  • माउंट आबू में मई में ग्रीष्मकालीन महोत्सव और नवम्बर में शरदकालीन महोत्सव का आयोजन होता है।
  • जनवरी में मकर संक्रात के त्योंहार पर जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर में पतंग महोत्सव मनाया जाता है।
  • मारवाड़ महोत्सव जोधपुर में अक्टूबर महीने में मानते है।
  • साल में चार बार राज्य के बाड़मेर जिले में बैलून महोत्सव का आयोजन होता है।
  • मार्च महीने में हाथी महोत्सव से जयपुर की शोभा  और बढ़ जाती है।
  • उदयपुर का मेवाड़ महोत्सव भी काफी जाना माना है जो अप्रैल महीने में होता है।
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शाही रेलगाड़ियां

राज्य में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए शाही रेलगाड़ियों की शुरुआत की गयी। जिससे पर्यटक उद्योग में भी काफी फायदा मिला। शाही रेलगाड़ियों के बारें में कई रोचक बातें हैं, जिनके बारें में जानकारी रखना बेहद जरुरी है। जैसे:

  • सबसे पहली शाही रेलगाडी 1982-83 में चलाई गयी थी। इसके बाद 3 सितम्बर 1995 में इसमें कुछ बदलाव किये गए इसका नाम पहियों पर चलने वाला नया राजमहल यानी पैलेसों ऑन व्हील्स रखा गया। वैसे इस शाही रेलगाडी को ‘द आरियण्टल एक्सप्रेस‘ के नाम से भी लोग जानते हैं। यह रेलगाड़ी दिल्ली से राजस्थान चलती है जिसमे जयपुर, जोधपुर, चितौड, जैसलमेर आदि जगह रुकते हुए पर्यटकों को उनकी मंजील तक पहुँचाती है।
  • इसके अलावा 2003 में फेयरी क्वीन नाम की ट्रैन चलाई गयी जो की शेखावाटी क्षेत्र में जाने के लिए है। 2006 में फिर से शेखावाटी क्षेत्र  में हैरिटेज आँन व्हीलस शुरू की गयी जो की जयपुर से चलकर सीकर, झुंझुनू, चूरू होते हुए  बीकानेर जाती है।
  • 11 जनवरी 2009 में रॉयल राजस्थान आँन व्हीलस नाम की ट्रैन चलायी गयी जो की पर्यटकों के लिए काफी लाभदायक साबित हुई।
  • पर्यटन क्षेत्र में राज्य की ‘द ग्रेट अरावली सफारी ट्रेन‘ चलाने की बात हो रही है। यह ट्रैन अजमेर, राजसमंद व उदयपुर के बीच कामली घाट वादियों में चलेगी।

राजस्थान में पर्यटन उद्योग (Tourism Industry in Rajasthan)

राजस्थान में पर्यटन उद्योग (Tourism Industry in Rajasthan) (Image Source RTDC)

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पर्यटन बसों की सेवा

ट्रैन की तरह ही राजस्थान के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बसों कि सेवा भी शुरू की गयी है। 2003 में जयपुर प्राइड 24 नामक डबल डेकर बस की शुरुआत जयपुर से की गयी। इस बस को सियाराम सिटी संस्था संचालित करती है। इसके अलावा बीकानेर में धौरा एक्सप्रैस की भी शुरुआत की गयी है।

पर्यटन में अपना पैर पसारने के लिए केवल रेल या बस ही नहीं बल्कि राजस्थान में  पैलेस आँन एयर के माध्यम से सैलानियों को राजस्थान की प्राकृतिक सुंदरता का भी भ्रमण करवाया जाता है। आने वाले कुछ सालों में पैलेस आँन वेव्ज  भी सुरु करने की बात हो रही है जिसमे पर्यटकों को हुगली, चम्बल, यमुना नदियों पर कोलकाता से धौलपुर तक नाव की सैर करवाई जाएगी।

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पर्यटन से जुड़ी कुछ विशेष बातें

भारत पर्यटन के क्षेत्र में विदेशी मुद्रा देने वाले राज्यों में  राजस्थान का नंबर दूसरा है। ऐसी ही और भी बहुत सारी बातें है जिनपर आजतक किसी ने गौर नहीं किया। आइये जानते हैं ऐसी कुछ विशेष बातों के बारे में:

  • दिल्ली, आगरा तथा जयपुर को स्वर्णिम त्रिकोण कहा जाता है।
  • मरू त्रिकोण में जैसलमेर, बीकानेर तथा जोधपुर जिले आते है।
  • भारत में आने वाले विदेशी सैलानियों में से हर तीसरा सैलानी राजस्थान भ्रमण पर जरूर आता है।
  • अधिकतर विदेशियों की पहली पसंद जयपुर और दूसरी उदयपुर होती है।
  • मार्च महीने में सबसे ज्यादा पर्यटक भारत भरम पर आते है वंही जून के महीने में राजस्थान आने से बचते हैं।
  • अजीत भवन जोधपुर राज्य कास पहला हेरिटेज होटल है।
  • अगर हम बात करें स्वदेशी की तो भारत में राजस्थान का नंबर सातवां है।
  • स्वदेशी सबसे ज्यादा अजमेर और पुष्कर जाना पसंद करते है।
  • सितम्बर महीने में सबसे ज्यादा स्वदेशी पर्यटक का आना होता है वंही गर्मी से बचने के लिए विदेशियों की तरह ये भी जून में निकलना काम ही पसंद करते हैं।
  • भारत में सबसे ज्यादा पर्यटक फ्रांस से आते है और इसके पश्चात इग्लैण्ड, अमेरिका, जर्मनी, इटली का स्थान आता है।
  • राजस्थान में पर्यटन निदेशालय की स्थापना जयपुर ममें 1955 में हुई थी।
  • इंडिया टूरिज्म पर्यटक वाक्य है , ” अतिथि देवों भव;” उसी तरह राजस्थान का है “जाने क्या दिख जाये।”
  • 25 जनवरी को भारतीय पर्यटन दिवस मनाया जाता है ।
  • 1 अप्रैल, 1979 में जयपुर में ही राजस्थान पर्यटन विकास निगम ( RTDC) की स्थापना की गयी थी।
  • राजस्थान ही है जिसने भारत को पहली बार पर्यटन के उद्योग का दर्जा दिलवाया था।
  • मोहम्मद युनुस समिति की सिफारिश पर पर्यटन को उद्योग का दर्जा 1989 में दिया गया था।
  • नीमराणा बावड़ी (अलवर) को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने 2018 में राष्ट्रिय स्मारक घोषित किया है। इसके अलावा 5 ओर राष्ट्रिय स्मारक घोषित किये गये है जो निम्न है-
  1. रानीपुर झरेल मंदिर, बोलांगीर (ओडिशा)
  2. उच्च न्यायालय का पुराना भवन, नागपुर (महाराष्ट्र)
  3. कोटली के विष्णु मंदिर, पिथोरागढ़ (उत्तराखंड)
  4. आगा खान की हवेली, आगरा (उत्तर प्रदेश)
  5. हाथी खान की हवेली, आगरा (उत्तर प्रदेश)

 

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राजस्थान में पर्यटन विकास

हमारे राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जिलों को मिलाकर पर्यटन सर्किट या परिपथ का निर्माण किया गया है जिनकी संख्या 12 है, जो निम्न है-

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1. शेखावाटी सर्किट

इस के अन्तर्गत सीकर, चुरू तथा झुंझुनू जिले आते है।

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2. ढुढाॅड सर्किट

इसमें जयपुर, दौसा तथा आमेर शामिल है।

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3. ब्रज-मेवात सर्किट

इस सर्किट में अलवर, भरतपुर, टोंक तथा सवाई माधोपुर जिले आते है।

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4. मेरवाड़ा सर्किट

अजमेर, नागौर इस सर्किट के भाग है।

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5. मेवाड़ सर्किट

इसमें उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा शामिल है।

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6. मरू सर्किट

इसके अन्तर्गत मरुस्थलीय क्षेत्र जैसे जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर तथा बाड़मेर शामिल है।

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7. वागड़ सर्किट

बांसवाड़ा, डुंगरपुर इस सर्किट में आते है।

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8. हाड़ौती सर्किट

कोटा, झालावाड़, बुंदी, बारा हाड़ौती पर्यटन सर्किट में आते है।

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9. गौड़वाड़ सर्किट

पाली, जालौर तथा सिरोही जिले इसके अन्तर्गत शामिल है।

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10. रणथम्भोर सर्किट

रणथम्भोर तथा सवाई माधोपुर

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11. स्वर्णिम त्रिकोण

राजस्थान में पर्यटन उद्योग (Tourism Industry in Rajasthan)

राजस्थान में पर्यटन उद्योग (Tourism Industry in Rajasthan)  (Image Source Wikihow) 

उपरोक्त वर्णित

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12. मरू त्रिकोण

उपरोक्त वर्णित

 

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राजस्थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड

राज्य में पर्यटन उद्योग को बदावा देने, पर्यटन से सम्बन्धित योजना बनाने तथा उनको किर्यान्वित करने, पर्यटन स्थलों की सुरक्षा के लिए 1978 Rajasthan Tourism Development Corporation Limited (RTDC) की स्थापना की गई जिसका मुख्यालय जयपुर में है। जिसका कथन पधारों म्हारे देश है।

घर से दूर पर्यटकों को घर जैसी अनुभूति करवाने के लिए पेइंग गेस्ट योजना को RTDC द्वारा प्रारम्भ किया गया।

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राजस्थान के यूनेस्को विश्व धरोहर

राज्य राजस्थान के तीन स्थलों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर में शामिल किया गया है जो  निम्न है-

  1. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान
  2. जयपुर का जंतर मंतर
  3. कुम्भलगढ़ दुर्ग
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यह भी पढ़े

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बाहरी कड़ियाँ

  1. RTDC
  2. wikihow
1 Comment
  1. Very nice sir,
    Bhot hi achhe se likha h aapne post.
    It is very useful for students.
    Thanks for sharing

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