पादपो में रसारोहण (Ascent of Sap)

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रसारोहण (Ascent of Sap in plants in Hindi)
मृदा से मूल रोम के द्वारा जल के अवशोषण के पश्चात जल का वायवीय भागों की ओर स्थानांतरित होना रसारोहण कहलाता है। यह ऊपरिदिशिक अर्थात ऊपर की ओर होता है।

रसारोहण (Ascent of Sap in plants in Hindi)

जल के स्थानांतरण में जाइलम की वाहिकाओं तथा वाहिनी का का की प्रमुख भूमिका होती है। गुल-मेहंदी अथवा बालसम पादप की जड़ को काटकर इसके एक सिरे को सेफ्रेनिन के विलयन में दो-तीन घंटों तक डुबोकर रखा जाता है। तो दो-तीन घंटों पश्चात अवलोकन करने पर पता चलता है, कि बालसम की पतियों की शिराएं (Veins) लाल दिखाई देने लगती है।
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रसारोहण (Ascent of Sap in plants in Hindi)

क्योंकि सेफ्रेनिन लाल अभिरंजक (Dye) होता है। जो लिग्निन युक्त जाइलम दृदोतक (Sclerenchyma) को लाल कर देता है। अतः इस प्रयोग से पता चलता है। कि जाइलम नलिकाओं में ही लाल रंग दिखाई देने से जाइलम नलिकाएं ही जल का स्थानांतरण करती है।

जल स्थानांतरण की क्रियाविधि या रसारोहण की क्रियाविधि (Mechanism of Ascent of Sap)

रसारोहण में जल गुरुत्व बल के विपरीत ऊपर की ओर चढ़ता है। अतः इसके ऊपर की ओर चढ़ने की क्रियाविधि के लिए सिद्धांतों के तीन वर्ग हैं-
जैव बल सिद्धांत
मूल दाब सिद्धांत
भौतिक बल सिद्धांत
 

जैव बल सिद्धांत (Vital Force Theories)

इसके अनुसार रसारोहण पादपों के तने की जीवित कोशिकाओं में होने वाली विभिन्न प्रकार की क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले बल के कारण होता है। इसके अंतर्गत निम्न सिद्धांतों को रखा गया है-
 

  1. वेस्टरमायर सिद्धांत
  2. रिले पंप सिद्धांत
  3. स्पंदन सिद्धांत

 

वेस्टरमायर सिद्धांत (Westmayar Theory)

इस सिद्धांत के अनुसार रसारोहण की क्रिया जाइलम मृदुतक की कोशिकाओं में होने वाली जैविक क्रियाओं के द्वारा होता है।

रिले पंप सिद्धांत (Relay Pump Theory)

यह सिद्धांत गॉडलेवस्की के द्वारा दिया गया। इसके अनुसार जाइलम मृदुतक या जाइलम पैरेंकाइमा मज्जा किरणों की जीवित कोशिकाओं के द्वारा परासरण दाब में परिवर्तन होते रहते हैं। जिसके कारण रसारोहण होता है।

स्पंदन सिद्धांत (Pulsation Theory)

इसके अनुसार पादपों में रसारोहण तने के वल्कूट भाग की सबसे भीतरी कोशिकाएं (जो एंडोडर्मिस के समीप होती है) में नियमित स्पंदन होता है। जिसके कारण रसारोहण होता है।
यह सिद्धांत जे.सी. बोस के द्वारा दिया गया। उन्होंने अपना प्रयोग भारतीय टेलीग्राफ पादप पर किया।
बोस ने अपने प्रयोग में गैल्वेनोमीटर का प्रयोग किया।
स्टार्सबर्गर ने अपने प्रयोग के द्वारा जैव बल सिद्धांत को गलत साबित किया। उन्होंने कहा कि यदि पादप को पिक्रिक अम्ल के द्वारा मृत कर दिया जाए तो भी इनमें रसारोहण होता है। अतः इसमें जीवित कोशिकाएं भाग नहीं लेती।
 

मूल दाब सिद्धांत (Root Pressure Theory)

इस सिद्धांत के प्रतिपादक प्रीस्टले है। इसके अनुसार जब जल मूलरोम से जाइलम की कोशिकाओं में प्रवेश करता है। तो जाइलम की कोशिकाओं की भित्ति पर एक तनाव उत्पन्न होता है। जो कोशिका में अंदर की ओर एक दाब डालती है।
जिससे इस कोशिका से द्रव्य निकलकर जाइलम वाहिकाओं में चला जाता है। इस द्रव्य के कारण जाइलम वाहिकाओं में दाब उत्पन्न होता है। जिसे मूल दाब कहते हैं, जो धनात्मक दाब होता है।
 
किसी भी पादप में मूल दाब का मान 2 वायुमंडलीय दाब से अधिक नहीं होता। यदि 20 मीटर ऊंचाई पर जल पहुंचाना होता है। तो कम से कम 12 वायुमंडलीय दाब की आवश्यकता होती है। इतना अधिक दाब मूल में उत्पन्न नहीं होता। अतः यह सिद्धांत कम महत्व का है।

भौतिक बल सिद्धांत (Physical Force Theory)

इस सिद्धांत के अनुसार रसारोहण केवल विभिन्न प्रकार के भौतिक बलों के द्वारा होता है। इनमें पादप की जीवित कोशिकाएं भाग नहीं लेती।
इस वर्ग के अंतर्गत निम्न सिद्धांत आते हैं-

  1. केशिकत्व सिद्धांत
  2. श्रंखला सिद्धांत
  3. सासंजन तथा वाष्पोत्सर्जन खिंचाव सिद्धांत

केशिकत्व सिद्धांत (Capillary Force Theory)

बोहम के अनुसार जाइलम वाहिनी तथा वाहीकाओं में केशिकत्व के कारण जल ऊपर की ओर चढ़ता है।

श्रंखला सिद्धांत (Chain Theory)

इसके अनुसार जाइलम में वायु तथा जल एकांतर क्रम में एक श्रंखला बनाते हैं। जब वायु की परत फैलती है, तो जल ऊपर की ओर धकेला जाता है।

सासंजन तथा वाष्पोत्सर्जन खिंचाव सिद्धांत (Cohesion- Transpiration Pull Theory)

डिक्सन एवं जौली के अनुसार निम्न चार कारक पादप में जल को ऊपर की ओर चढ़ने में सहायता करते हैं।

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रसारोहण (Ascent of Sap in plants in Hindi)

वाष्पोत्सर्जन खिंचाव (Transpiration Pull)

वाष्पोत्सर्जन के कारण पादप के वायवीय भाग में जल की कमी हो जाती है। जिससे खिंचाव उत्पन्न होता है। जो वाष्पोत्सर्जन खिंचाव कहलाता है। यह जल को ऊपर की ओर खींचता है।

ससंजन बल (Cohesion Force)

जल के अणुओं के मध्य ससंजन बल पाया जाता है। जिसका मान 45-207 वायुमंडलीय दाब तक हो सकता है। यह जल का एक निरंतर प्रवाह जाइलम में बनाए रखता है। जिससे वाष्पोत्सर्जन के खिंचाव से जुड़ा जल स्तंभ नहीं टूटता।

आसंजन बल (Adhesion force)

जाइलम की वाहिकाओं तथा जल के मध्य में आकर्षण बल होता है। जो जल को ऊपर की ओर खींचने में सहायता करता है।

मूलदाब (Root Pressure)

मूलदाब के कारण जल ऊपर की ओर धकेला जाता है।
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