थायराइड ग्रंथि

Thyroid gland hindi

Thyroid Gland in Hindi, थायराइड के लक्षण, हाइपरथाइरॉयडिज़्म के लक्षण, थायराइड ग्रंथि के कार्य क्या है,

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थायराइड ग्रंथि (Thyroid Gland) की स्थिति

यह श्वास नली के दोनों को अधर तथा पार्श्व (Dorsolateral) भाग में पाई जाने वाली H आकार की द्विपालित ग्रंथि (Bilobed Gland) है। थायराइड ग्रंथि शरीर की सबसे बड़ी अंतः स्रावी ग्रंथि होती है।

थायराइड ग्रंथि (Thyroid Gland) की संरचना

थायराइड ग्रंथि में  छोटी-छोटी गोलाकार पुटिकाए (Follicles) पाई जाती है,  जिनमें पीले रंग का कोलाइडी पदार्थ भरा रहता है। जो आयोडीन युक्त ग्लाइकोप्रोटीन (Glycoprotein) है, इसे आयोडोथायरोग्लोबुलीन (Iodothyroglobulin) कहते हैं। इसके द्वारा ही थाइरोइड हारमोन का स्राव होता है।

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source NCERT

पुटको (Follicles) के बीच-बीच में संयोजी ऊतकों (Connective tissue) से बना हुआ स्ट्रोमा (Stroma) पाया जाता है,, जिसमें सी कोशिकाएं (C-clles) पाई जाती है जिन्हें पैरापुटकिय कोशिकाएं या पैराफॉलिकुलर कोशिकाएं (Para follicular Cells) भी कहा जाता है।

Thyroid

थायराइड ग्रंथि (Thyroid Gland) से स्रावित हॉर्मोन

थायराइड ग्रंथि से निम्न हॉर्मोन स्रावित होते हैं-

  1. टेट्राआयोड़ोथाईरोनिन (Tetraiodothyronine)
  2. ट्राईआयोड़ोथाईरोनिन (Tri-iodothyronine)
  3. कैल्सिटोनिन (Calcitonin)

 

टेट्राआयोड़ोथाईरोनिन (Tetraiodothyronine)

यह चार अणु आयोडीन तथा एक अणु टायरोसिन अमीनो अम्ल से मिलकर बना होता है। यह मात्रा में अधिक परंतु कम सक्रिय होता है।

 

ट्राईआयोड़ोथाईरोनिन (Tri-iodothyronine)

यह तीन अणु आयोडीन तथा एक अणु टायरोसिन अमीनो अम्ल से मिलकर बना होता है। यह मात्रा में कम अधिक सक्रिय होता है।

T3 तथा T4 को सम्मिलित रूप से थाइरोइड हॉर्मोन कहते है। इनके कार्य (Functions) निम्न प्रकार है-

  1. यह प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट तथा वसा के उपापचय (Metabolism) का नियमन करता है।
  2. ये ऊष्मा उत्पादन बढ़ाते हैं, जो केलोरिजेनिक प्रभाव (Calorigenic Effect) कहलाता है।
  3. इस हार्मोन को जीवन की रफ्तार बढ़ाने वाला हार्मोन भी कहते हैं।
  4. यह हृदय स्पंदन की दर (Heart Beat Rate) को बढ़ाता है।
  5. ये लाल रक्त कोशिका निर्माण की प्रक्रिया में सहायक है।
  6. यह शरीर की आधारी उपापचय दर (Basal Metabolic Rate) को बढ़ाता है
  7. थाइरोइड हॉर्मोन मेंढक के टैडपोल लार्वा को वयस्क में कायांतरण (Metamorphosis) करने में मदद करता है।
  8. न्यूरोट्रांसमीटर जैसे एड्रीनलिन व नाॅरएड्रीनलिन की कुछ क्रियाओं को बढ़ाते हैं।
  9. वैद्युत अपघट्य संतुलन थायराॅइड हाॅर्मोन द्वारा प्रभावित होता है।

 

थायराइड हार्मोन के अल्प स्राव से होने वाले रोग (Hypothyroidism)

जड़मानवता (क्रीटीनिज्म, Cretinism)

बचपन में यदि थायराइड हार्मोन कम स्रावित (Secret) होता है। तो उपापचय दर (Metabolic Rate) कम हो जाती है। शरीर की मानसिक तथा शारीरिक वृद्धि कम होती है। हाथ पाव बेडौल रह जाते हैं। बच्चे बोने रह जाते हैं। जननांगों का विकास भी नहीं होता।

 

मिक्सिडिमा (Myxedema)

वयस्क व्यक्तियों में यदि यह हार्मोन कम स्रावित होता है। तो त्वचा मोटी हो जाती है। बाल झड़ने लगते हैं। यादाश्त कमजोर हो जाती है। जनन क्षमता (Reproductive Capacity) कम हो जाती है।

इसको गुल का रोग भी कहते है।

 

गलगंड या घेंघा रोग (Goiter)

आयोडीन की कमी होने पर थायराइड ग्रंथि के फूल जाती है। जिससे गला फूल जाता है। यह पहाड़ी इलाकों में अधिक होता है।

 

हाशिमोटो का रोग (Hashimoto’s Disease)

यदि कोई व्यक्ति थायराइड से संबंधित रोगों से ग्रस्त होता है। तो वह थायराइड के उपचार के लिए दवाओं का उपयोग करता है। इन दवाओं के कारण व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडी बनने लगते हैं, जो थायराइड ग्रंथि को नष्ट कर देते हैं। यह एक स्वप्रतिरक्षा रोग है। इसको थायराइड की आत्महत्या (Suicide of thyroid) भी कहते हैं।

Thyroid Gland in Hindi

थायराइड हार्मोन के अल्प स्राव से होने वाले रोग (Hyperthyroidism)

एक्सोपथैलेमिक गोइटर (Exophthalmic Goiter)

थायराइड हार्मोन के अधिक स्राव होने पर नेत्र गोलक (Eye ball) के नीचे श्लेष्मा (Mucus) जमा होने लगता है। जिसे नेत्र बाहर की ओर आ जाते हैं। दृष्टि घूरती हुई सी हो जाती है।

प्लुमर का रोग (Plummer’s Disease)

इसमें रोग में थायराइड में गांठ बन जाती है।

ग्रेवी का रोग (Grave’s Disease)

इसमें रोग में थायराइड ग्रंथि फूल जाती है

कैल्सिटोनिन (Calcitonin)

यह हार्मोन सी-कोशिकाओं / पैरापुटकिय कोशिका / पैराफॉलिकुलर कोशिका  द्वारा स्रावित होता है। यह हार्मोन पैराथर्मोन के विपरीत कार्य करता है।

कैल्सिटोनिन  मूत्र में कैल्शियम के उत्सर्जन को बढ़ाता है और यह हड्डियों के विघटन को कम करता है। जिससे रुधिर में कैल्शियम का लेवल कम हो जाता है।

यह हार्मोन  परासरण नियमन (Osmoregulation) तथा त्वकपतन (Ecdysis) का कार्य करता है।

इन्हें भी पढ़े

  1. अंत: स्रावी ग्रंथियां एवं हॉर्मोन
  2. हाइपोथैलेमस अन्तःस्त्रावी ग्रंथि के रूप
  3. पीयूष ग्रंथि एवं हॉर्मोन

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