अग्नाशय अन्तःस्त्रावी ग्रंथि

Pancreas in Hindi

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अग्नाशय (Pancreas)

अग्नाशय बहिस्त्रावी (Exocrine) तथा अन्तःस्रावी (Endocrine) दोनों प्रकार का कार्य करता है, अतः इसे मिश्रित ग्रन्थि (Mixed Gland) भी कहते है।

एसीनाई (Acini) ऊतक इसमें बहिस्त्रावी कार्य करते है।

अन्तःस्त्रावी भाग हाॅर्मोन स्रावित करने वाली कोशिकाओं का बना होता है, जिसे लैंगरहैन्स के द्वीप (Islet of Langerhans) कहते हैं। लैंगरहैन्स के द्वीप में निम्न प्रकार की कोशिकाएँ पायी जाती है-

  1. α कोशिका
  2. β कोशिका
  3. δ कोशिका
  4. γ  कोशिका
  5. PP कोशिका

α कोशिका (α Cells)

यह ग्लुकागोन (Glucagon) का स्राव करती है। जो पोलिपेप्टाइड हॉर्मोन है। यह यकृत के एडिपोज ऊतक (वसा ऊतक) पर कार्य करती है। तथा यकृत में ग्लाइकोजन को ग्लुकाॅज में तोड़ने को प्रेरित करती है। जिससे रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है।

साथ ही यह यकृत में अमिनों अम्ल व लेक्टिक अम्ल का ग्लुकोज में परिवर्तन करके रक्त में ग्लुकाॅज की मात्रा को बढ़ाती है।

 

β कोशिका (β-Cells)

यह इन्सुलिन (Insulin) का स्राव करती है। जो पोलिपेप्टाइड हॉर्मोन है। यह यकृत, पेशियाँ तथा एडिपोज ऊतकों पर कार्य करता है

यह हॉर्मोन ग्लुकाॅज के आॅक्सीकरण (Oxidation) तथा यकृत कोशिकाओं (Hepatocytes) व पेशियों में ग्लुकोज के ग्लाइकोजन में परिवर्तन दोनों को बढ़ाती है। जिससे रक्त में ग्लुकाॅज का स्तर कम हो जाता है।

ये एडिपोज ऊतकों द्वारा ग्लुकाॅज से वसा के संश्लेषण को बढ़ाता है, तथा यह वसा के उपापचयी अपघटन (Metabolic dissociation) को कम करता है।

यकृत तथा पेशीय कोशिकाओं द्वारा अमिनों अम्ल के उपभोग (Consumption) को बढाता है, तथा प्रोटीन संश्लेषण को उद्दीप्त करती है, जबकि प्रोटीन अपघटन को कम करता है।

 

 

δ कोशिका (δ -Cells)

ये सोमेटोस्टेटिन (Somatostatin) का स्राव करती है। यह भी पोलिपेप्टाइड हॉर्मोन है। ये ग्लुकागोन तथा इन्सुलिन के स्रावण को संदमित करती है, तथा पाचन नली में स्रावण गतिशीलता व अवशोषण को कम करती है।

 

γ  कोशिका (γ-Cells)

इससे गैस्ट्रीन (Gastrin) का स्राव होता है।

 

PP कोशिका (PP-Cells)

ये pancreatic peptidases का स्राव करती है।

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अग्नाशय हॉर्मोन से जुड़े विकार (Pancreatic hormone related disorders)

डायबीटीज मेलिटस (Diabetes mellitus)

इन्सुलिन हॉर्मोन के कम स्राव से डायबीटीज मेलिटस (Diabetes mellitus) होता है। जिसमें रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है।

ग्लाईकोसुरिया (Glycosuria)

मूत्र में ग्लुकोज की मात्रा बढ़ जाती है। जिसे ग्लाईकोसुरिया कहते है।

कीटोन्यूरिया (Ketoneuria)

वसा का आॅक्सीकरण बढ़ता है, जिससे शरीर में कीटोन काय जैसे एसीटोएसीटेट तथा एसीटोन उत्पन्न होती है, जिसे कीटोसीस कहते है। मूत्र में कीटोन की मात्रा पाई जाती है। जिसे कीटोन्यूरिया कहते है।

रक्त काॅलेस्ट्राॅल भी बढ़ता है।

पॉलीयूरिया (Polyuria / Diuresis)

मूत्र में ग्लुकाॅज का परासरणी प्रभाव अधिक होने से मूत्र का आयतन बढ़ाता है जो पोलियूरिया कहलाता है।

पॉलीडिप्सिया (Polydipsia)

मूत्र में जल की हानि के कारण प्यास बढ़ती है। जिसे पॉलीडिप्सिया कहते है।

चोट के भरने में अधिक समय लगता है, तथा यह गेन्ग्रीन्स में परिवर्तित होती है।

इसकी चरम स्थिति में रोगी कोमा से पीड़ित होता है, तथा मर जाता है।

हाइपरग्लाइसीमिया (Hyperglycemia)

इंसुलिन के कम स्राव से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा अधिक होना।

 

हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia)

इंसुलिन हार्मोन के अधिक स्राव से रक्त का ग्लूकोज ग्लाइकोजन में बदल जाता है। जिससे रक्त में ग्लूकोज की कमी हो जाती है।

Pancreas in Hindi

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  2. पैराथायराॅइड ग्रंथि
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