अर्द्धचालक (semiconductor) एवं डोपिंग (Doping) | Aliscience

अर्द्धचालक (semiconductor) एवं डोपिंग (Doping)

semiconductor in Hindi, अर्द्धचालक क्या है,  डोपिंग किसे कहते है, What is doping,  Concept of holes in semiconductors in Hindi, Methods of doping in Hindi,

अर्द्धचालक की परिभाषा (Definition of semiconductor)

वे पदार्थ जिनमें विद्युतीय गुण चालक पदार्थ तथा कुचालक पदार्थ के मध्य होते हैं। जैसे सिलिकॉन (Si) तथा जर्मेनियम (Ge)

ऊर्जा बैंड अवधारणा (Energy band concept) के अनुसार अर्द्धचालक (semiconductor) वे हैं पदार्थ जिनके:

चालन बैण्ड (Conduction Band) व संयोजी बैंड संयोजी बैण्ड (Valance Band) आंशिक रूप से भरे तथा आंशिक रूप से खाली होते है।

इनका वर्जित उर्जा बैंड (Forbidden energy band) काफी संकरा (1eV) होता है।

 

back to menu ↑

अर्द्धचालक पदार्थों में कोटर की अवधारणा (Concept of holes in semiconductors)

ताप बढ़ाने पर संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence electrons) को अतिरिक्त उर्जा (Extra energy) मिलने के कारण वह संयोजी बैण्ड (Valence band) से चालन बैण्ड (Conduction Band) में चला जाता है। जिससे संयोजी बैण्ड में इलेक्ट्रॉन की कमी हो जाती है। और यह कमी ही होल या कोटर कहलाती है।

होल इलेक्ट्रॉन जितना ही आवेश होता है किन्तु वह धनावेश होता है। यह होल छद्म आवेश वाहक (Pseudo charge carrier) की भाँति व्यवहार करता है इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता है।

अर्द्धचालक पदार्थों में कोटर या होल की निम्न विशेषता होती है-

  1. होल संयोजकता बंध (Valence bond) में इलेक्ट्रॉन की कमी है।
  2. कोटर या होल धनावेश (Positive charge) की भाँति व्यवहार करती है।
  3. होल प्रभावी द्रव्यमान (Effective mass) इलेक्ट्रॉन से अधिक होता है।
  4. होल की गतिशीलता (Mobility) इलेक्ट्रॉन से कम होती है।

 

ताप T केल्विन पर संयोजी बैण्ड से चालन बैण्ड में जाने वाले इलेक्ट्रान की संख्या

n=A T^{3 / 2} e^{-\frac{E g}{2 k T}}=A T^{3 / 2} \exp \left[-\frac{E g}{2 k T}\right]

 

जहाँ,

k  = बोल्ट्जमान नियतांक = 1.38 x 10-23 J/K

T = परम ताप

A = नियतांक

Eg = संयोजी बैण्ड व चालन बैण्ड मे ऊर्जा अन्तराल

 

सामान्य ताप पर सिलिकॉन (Si) के 1012 परमाणुओं में से केवल 1 परमाणु संयोजी बैण्ड से चालन बैण्ड मे जाता है।

सामान्य ताप पर जर्मेनियम (Ge) के 109 परमाणुओं में से केवल 1 परमाणु संयोजी बैण्ड से चालन बैण्ड मे जाता है।

 

back to menu ↑

अर्द्धचालक पर ताप का प्रभाव (Effect of Temperature on semiconductor)

  • परम शून्य ताप (Absolute zero temperature) पर सहसंयोजी बंध (Valence bond) काफी मजबूत होते हैं, तथा कोई भी मुक्त इलेक्ट्रॉन उपस्थित नहीं होता है। अतः इस ताप पर ये आदर्श कुचालक की तरह व्यवहार करते है।
  • परमशून्य ताप (Absolute zero temperature) ताप पर सहसंयोजी बंध (Valence bond) पूर्णतया भरा तथा चालन बंध (Conduction Band) पूर्णतया खाली होता है

semiconductor in Hindi, अर्द्धचालक क्या है,  डोपिंग किसे कहते है, What is doping,  Concept of holes in semiconductors in Hindi, Methods of doping in Hindi,

  • परम शून्य ताप (Absolute zero temperature) से ऊपर ताप बढ़ाने पर सहसंयोजी बंध (Valence bond) के कुछ इलेक्ट्रॉन उष्मीय ऊर्जा (Heat Energy) के कारण निकल कर चालन बंध (Conduction Band)  में चले जाते है और यह अल्पचालकता (Low conductivity) प्रदर्शित करता है।
  • परमशून्य ताप (Absolute zero temperature) से अधिक ताप पर सहसंयोजी बंध (Valence bond) आंशिक यानि थोडा खाली तथा चालन बंध (Conduction Band) आंशिक भरा होता है।

 

back to menu ↑

अर्द्धचालकों में अशुद्धियों का प्रभाव  (Effect  of impurity in semiconductor)

जब शुद्ध अर्द्धचालकों (Pure Semiconductors) में वांछित अशुद्धियां (Impurities) मिलायी जाती है तो इसके चालकीय गुण (Conducting properties) कई गुना बढ़ जाते है, इसे डोपिंग कहते हैं।

back to menu ↑

डोपिंग किसे कहते है? (What is doping?)

शुद्ध अर्द्धचालक के चालकीय गुणों में परिवर्तन करने के लिये इनमें उचित मात्रा में अशुद्धि मिलाने की प्रक्रिया डोपिंग कहलाती है।

back to menu ↑

डोपिंग की विधियाँ (Methods of doping)

डोपिंग की दो मुख्य विधियाँ है-

मिश्र धातु विधि (Alloy method)

अलग-अलग धातुओं का मिश्रण बना कर

विसरण विधि (Diffusion method)

धातु में किसी अशुद्धि को विसरण प्रक्रिया द्वारा मिलकर  यह सर्वोतम विधि है।

 

back to menu ↑

अर्द्धचालकों में अशुद्धि की मात्रा (Amount of impurities in semiconductors)

अर्द्धचालक में अशुद्धि की मात्रा लगभग 1 ppm (part per million) यानि प्रति दस लाख परमाणुओं पर एक अशुद्धि परमाणु होता है। अर्द्धचालक में मिलाई गई यह अशुद्धि ‘‘अपद्रव्य (Waste)’’ कहलाती है। इसकी निम्न विशेषता होती है-

  1. अपद्रव्यी परमाणुओं की सांद्रता बहुत कम यानि क्रिस्टल परमाणुओं (Crystal atom) की संख्या के 1% या उससे कम होनी चाहिये।
  2. अपद्रव्यी परमाणु का आकार लगभग क्रिस्टल के परमाणु (Crystal atom) के आकार के बराबर होता है।
  3. अपद्रव्यी का परमाणु क्रिस्टल जालक (Crystal lattice) में अर्द्धचालक परमाणु का स्थान ले लेता है।
  4. अपद्रव्यी परमाणु के कारण अर्द्धचालक परमाणु की क्रिस्टल संरचना (Crystal structure) में परिवर्तन नहीं आता है।
back to menu ↑

इन्हें भी पढ़े

back to menu ↑

बाहरी कड़ियाँ

back to menu ↑

लेक्चर विडियो

Coming soon

back to menu ↑

ऑनलाइन टेस्ट

Coming soon

We will be happy to hear your thoughts

      Leave a Reply

      Aliscience
      Logo
      Enable registration in settings - general
      %d bloggers like this: