ठोसों में ऊर्जा बैण्ड  (Energy Bands in Solids)

Energy Bands in Solids in Hindi, ठोसों में ऊर्जा बैण्ड , ठोसों में ऊर्जा बैण्ड के प्रकार, चालन ऊर्जा बैण्ड (conduction energy band) , संयोजी ऊर्जा बैंड (valance energy band) , वर्जित ऊर्जा अन्तराल (forbidden energy band)

ठोसों में ऊर्जा बैण्ड  (Energy Bands in Solids)

एक विलगित परमाणु (Isolated or Separated Atom) में इलेक्ट्रॉन भिन्न-भिन्न ऊर्जा स्तरों में विद्यमान होते हैं। किन्तु ठोसों में असंख्य परमाणु (Numerous atoms) एक दूसरे के निकट होने से उनमें अन्योन्य क्रिया (Inter Action) के कारण उनके उर्जा स्तर (Energy Level) विभिन्न उर्जा स्तरों में विभाजित हो जाते है।

ठोसों में ऊर्जा बैण्ड पाउली के अपवर्जन सिद्धांत (Pauli exclusion principle) पर आधारित होते है।

ऊर्जा स्तरों की संख्या अन्योन्य क्रिया (Inter Actioon) करने वाले परमाणुओं की संख्या (Number of atom) पर निर्भर करती है।

इनका विभाजन तीक्ष्ण होने के कारण अतिनिकट बहुत पास-पास ऊर्जा स्तरों के कारण ऊर्जा बैण्ड प्राप्त होता है।

 

ऊर्जा बैण्ड की प्रकृति (Nature of Energy Bands)

इसकी प्रकृति विविक्त (Distinct) यानि थोड़ी अलग-अलग प्रकार की होती है।

उर्जा बैण्ड में उर्जा स्तरों की संख्या लगभग 1023  तथा उनमें उर्जा अन्तर लगभग 10.23 eV कोटि का होता है।

 

ऊर्जा बैण्ड (Energy Band, EB)

किसी ठोस में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा की परास (Energy range), ऊर्जा बैण्ड (EB) कहलाती है। ये तीन प्रकार के होते है-

  1. संयोजी ऊर्जा बैंड (valance energy band)
  2. चालन ऊर्जा बैण्ड (conduction energy band)
  3. वर्जित ऊर्जा बैण्ड या वर्जित ऊर्जा अन्तराल (forbidden energy band)

संयोजी बैण्ड (Valance Band, VB)

ऐसा बैण्ड जिसमें संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence electrons) होते है, संयोजी बैण्ड कहलाता है। संयोजी इलेक्ट्रॉन बन्ध बनाने में भाग लेने वाले इलेक्ट्रॉनों को कहते है।

इसकी निम्न विशेषता होती है-

  • संयोजी बैण्ड में बन्धित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  • इस बैंड में स्थित इलेक्ट्रॉन , नाभिक द्वारा दुर्बल बल (Weak Force) द्वारा बंधे रहते है।
  • इन इलेक्ट्रॉनों द्वारा धारा प्रवाह (Current flow) नहीं होती है।
  • संयोजी बैण्ड सदैव इलेक्ट्रॉनों से भरा रहता है।

 

चालन बैण्ड (Conduction Band. CB)

ऐसा बैण्ड जिसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free electron) पाये जाते हैं, चालन बैण्ड (CB) कहलाता है।

इसकी निम्न विशेषता होती है-

  • चालन बैण्ड में चालक इलेक्ट्रॉन होते है।
  • इन इलेक्ट्रॉनों द्वारा धारा प्रवाह होता है।
  • इसमें इलेक्ट्रॉन उपस्थित हो भी सकते है या उपस्थित नहीं भी यानि रिक्त हो सकता।
  • यदि चालन बैण्ड रिक्त हो तो धारा का प्रवाह नहीं होता है।
  • चालक पदार्थों (Conductors) में यह आंशिक भरा हुआ रहता है।
  • अर्द्धचालकों (Semiconductors) में परम शून्य ताप (Absolute zero temperature) पर चालन बैण्ड पूरी तरह से खाली रहता है लेकिन अर्द्धचालकों (Semiconductors) में जैसे-जैसे ताप (Temperature) को बढाया जाता है चालन बैंड में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढती जाती है।
  • कुचालकों (Non-conductors)) में यह बैंड खाली रहता है।

 

वर्जित उर्जा अन्तराल (Forbidden energy gap) (FEG)

चालन बैण्ड व संयोजी बैण्ड के बीच का वह ऊर्जा अन्तराल जिसमें कोई भी मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free electron) विद्यमान नहीं रह सकता है। वर्जित उर्जा अन्तराल (Forbidden energy gap) कहलाता है।

इसको Δ Eg से दर्शाते है। इसको निम्न सूत्र से ज्ञात किया जाता है-

Δ Eg = (CB)min – (VB)max 

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वर्जित उर्जा बैण्ड की चौड़ाई (Width of forbidden energy band)

वर्जित उर्जा बैण्ड की चौड़ाई पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करती है। वर्जित बैण्ड की चौडाई को eV  (इलेक्ट्रान वाल्ट) में व्यक्त करते है।

इस ऊर्जा बैंड में कोई भी इलेक्ट्रॉन (Electron) उपस्थित नहीं होते पूरी तरह खाली होता रहते है ।

यह चौड़ाई ताप पर निर्भर करती है। ताप बढ़ने पर वर्जित ऊर्जा अन्तराल कम होता है। चौड़ाई जितनी अधिक होगी संयोजी इलेक्ट्रान का नाभिक के साथ बंधन उतना ही तीव्र होगा।

 

वर्जित ऊर्जा अंतराल इसी के आधार पर ही चालक ( (Conductors) , कुचालक(Non-conductors) और अर्धचालक ( (Semiconductors) के मध्य पदार्थों का वर्गीकरण किया जाता है।

 

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  1. आवेश संरक्षण तथा आवेश का क्वांटीकृत सिद्धांत, कुलाम का नियम (Theory of conservation of charge, quantization of charge and columb’s law)
  2. प्रकृति के 4 मूल बल (4 fundamental forces of nature)
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