वसा या लिपिड – वर्गीकरण तथा कार्य  (Lipid in Hindi)

वसा या लिपिड – वर्गीकरण तथा कार्य (Lipid in Hindi)

Hello Biology Lovers, आज में हमारे ब्लॉग का शीर्षक है वसा या लिपिड (Lipid in Hindi)


वसा या लिपिड (Lipids)


लिपिड लम्बी श्रंखला वाले वसा अम्ल (Fatty Acids) और एल्कोहॉल के एस्टर होते हैं। ये सभी जीवों में मौजूद मोमी या तैलीय (Oily) पदार्थ हैं। ये अध्रुवीय (Non-polar) तथा जलविरागी हाइड्रोफोबिक (Hydrophobic) यौगिक हैं। ये कार्बनिक विलायक (Solvent) जैसे क्लोरोफॉर्म, बेंजीन, इथर में घुलनशील जबकि पानी में अघुलनशील (Non-solubale) होते है।

सभी लिपिड कार्बन (C), हाइड्रोजन (H) और ऑक्सीजन (O) के द्वारा बने होते हैं। कुछ लिपिड में फॉस्फोरस(P), नाइट्रोजन (N) और सल्फर (S) भी मौजूद होते हैं। लिपिड प्रोटीन तथा कार्बोहायड्रेट की तरह बहुलक नहीं बनाते। और ना ही इनको वृहद अणु माना जाता है।

इनका सामान्य सूत्र CH3(CH2)nCOOH  होता है। जहाँ  n  एक पूर्ण संख्या है। लेकिन इनमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का अनुपात 2:1 नहीं होता।


लिपिड का वर्गीकरण


लिपिड को आमतौर पर चार  मुख्य समूहों में विभाजित किया जाता है –

1. सरल वसा (Simple Lipid)

2.संयुक्त वसा (Compound Lipid)

3. व्युत्पन्न वसा (Derived Lipid)

4. जटिल वसा (Complex Lipid)
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सरल वसा (Simple Lipid)


इसके अंतर्गत वसा अम्ल, ग्लिसराइड तथा मोम सम्मिलित है।


वसा अम्ल (Fatty Acids)


वसा अम्ल में कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह के साथ लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला जुड़ी होती है। इसलिए ये लम्बी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाले कार्बनिक अम्ल हैं।  इसके एक सिरे पर कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH) होता हैं। हाइड्रोकार्बन श्रृंखला की लम्बाई अलग-अलग वसा अम्ल (Fatty Acids) में अलग होती है। वसा अम्ल (Fatty Acids) में  कार्बन परमाणुओं के 4-36 बीच होती हैं। कार्बन परमाणुओं की सम संख्या वाले  वसा अम्ल (Fatty Acids)  अक्सर प्रकृति में होते हैं।

वसा अम्ल (Fatty Acids)  के उदाहरण-

लोरिक अम्ल, मिरिस्टिक अम्ल, पाल्मिटीक अम्ल, स्टिएरिक अम्ल,  ओलिक अम्ल


वसा अम्ल (Fatty Acids) के प्रकार –


C-C के मध्य पाए जाने वाले सहसंयोजक बंध के आधार पर वसा अम्ल (Fatty Acids) दो प्रकार के होते है –


संतृप्त वसा अम्ल (Fatty Acids)


संतृप्त वसा अम्ल (Fatty Acids) में कार्बन- कार्बन परमाणु के बीच केवल एकल आबंध होता है। जैसे-

पाल्मिटीक अम्ल

स्टिएरिक अम्ल


असंतृप्त वसा अम्ल (Fatty Acids)


इनमें से एक या दो से अधिक द्वि आबंध  होते हैं। इनको मोनो और पॉली असंतृप्त वसा अम्ल (Fatty Acids) के रूप में बांटा गया है।

ओलिक अम्ल
लिनोलेनिक अम्ल

लिनोलिक अम्ल

असंतृप्त वसा अम्ल  का निर्माण हमारे शरीर में नहीं होता इसलिये असंतृप्त वसा अम्ल आवश्यक वसा अम्ल है।

PUFA (PolyUnsaturated Fatty Acid) यह एक पॉली असंतृप्त वसा अम्ल (Fatty Acids) है। जिसको ओमेगा 3 वसा अम्ल (Fatty Acids) (Omega 3 fatty avid) भी कहा जाता है।

संतृप्त वसा अम्ल कम क्रियाशील होने के कारण शरीर में जमा होती रहती है। जो मोटापे का कारण बनती है। लेकिन असंतृप्त वसा अम्ल अधिक क्रियाशील होने के कारण उपापचय में काम आकर ऊर्जा प्रदान करती है। अतः असंतृप्त वसा अम्ल लाभदायक होते है।

जंतु वसा संतृप्त वसा अम्ल है। जबकि तेल असंतृप्त वसा अम्ल है। वसा और तेल को आमतौर पर सरल लिपिड कहा जाता है। वसा को पादपों और जंतुओं में संग्रहित किया जाता है।

वसा अम्ल (Fatty Acids) में प्रमुख जैविक भूमिकाएं –
ये कोशिका झिल्ली के घटक होते हैं। जैसे Glycerophospholipids एवं  Sphingolipids।  वसा अम्ल (Fatty Acids) प्रोटीन से सहसंयोजक बंध के द्वारा जुड़कर लिपोप्रोटीन बनाता है। शरीर में वसा के रूप में ऊर्जा भंडारण किया जाता है।  हार्मोन के निर्माण में भी वसा अम्ल (Fatty Acids) भाग लेते है।  DAG तथा IP3 कोशिका के अंदर द्वितीयक सन्देशवाहक का कार्य करते है।


ग्लिसराइड


वे सबसे प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले लिपिड हैं। ये ग्लिसराल युक्त लिपिड है। Triglycerides एक सामान्यता पाया जाने वाला ग्लिसराइड है। ट्राइग्लिसराइड वसा अम्ल (Fatty Acids) के एस्टर होते है। जिसमें अल्कोहल जुड़ा होता है।  ऊर्जा संग्रह करने की उनकी क्षमता के कारण ट्राइग्लिसराइड्स महत्वपूर्ण हैं।


मोम (Wax)


वे लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाओं के वसा अम्ल (Fatty Acids) के एस्टर हैं। वैक्स में एल्कोहल में केवल एक हाइड्रॉक्सिल समूह होता है। पत्तियां और पादपों के तने पर पाया जाने वाला क्यूटिकल  एक मोमी पदार्थ  है। जो पानी के अत्यधिक वाष्पीकरण को रोकता है।
सीबम  हमारी त्वचा में वसामय ग्रंथियों द्वारा स्रवित  वैक्स और ट्राइग्लिसराइड्स का मिश्रण है।

मोम तीन प्रकार का होता है –
Sperm whale wax

Bees wax

Carnauba wax
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संयुक्त वसा (Compound Lipid)


इसके अंतर्गत फॉस्फोलिपिड तथा ग्लाइकोलिपिड सम्मिलित है।


फॉस्फोलिपिड


ये कोशिका झिल्ली में पाए जाने वाले लिपिड हैं। फॉस्फोग्लिसराइड फॉस्फोलिपिड का एक वर्ग  हैं। इनमें ग्लिसरॉल, फॉस्फेट, दो वसा अम्ल (Fatty Acids) और एक अन्य समूह होते हैं। अन्य समूह के रूप  कोलीन, एथेनोलमाइन, सेरीन या इनॉसिटोल हो सकते हैं।

Phosphatidylethanolamine, Phosphatidylcholine, Phosphatidylserine, तथा Phosphatidylglycerol फॉस्फोलिपिड के विभिन्न प्रकार है।

Phosphatidylcholine को लेसीथिन भी कहते है, यह अंडो के योक में, तेलीय बीज तथा रक्त में पाया जाता है रक्त में यह वाहक अणु का काम करता है।

Phosphatidylethanolamine को सिफेलिन भी कहते है, यह तंत्रिका ऊतक, योक, तथा प्लेटलेट्स में पाया जाता है।    फॉस्फोलिपिड्स के उदाहरण हैं।

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ग्लाइकोलिपिड


ग्लाइकोलिपिड  स्पिंगोलिपिड के समान होते है। ग्लाइकोलिपिड में फॉस्फोरिक अम्ल का एमीनो एल्कोहॉल के साथ एस्टरीकरण किया जाता है।, एक ऑलिगोसैकराइड (आमतौर पर ग्लूकोज या गैलेक्टोस का बना) स्पिगॉसाइन से जुड़ा होता है।

गैलेक्टोसिल डाइग्लिसराइड्स और सल्फोलिपिड पादपों के प्रमुख ग्लाइकोलिपिड हैं।

Galactocerebroside तंत्रिका कोशिकाओं के म्यलिन स्तर में पाए जाने वाला मुख्य ग्लाइकोलिपिड है।

 


स्पिंगोलिपिड  Sphingolipids
इनको स्पिंगोमायलिन भी कहते है।  ये फॉस्फोलिपिड्स के समान होते हैं। लेकिन इनमें ग्लिसरॉल के स्थान पर स्पिगॉसाइन पाया जाता है। ये न्यूरोन के मायलिन आवरण में पाया जाता है। Cerebrosides, Globosides, Gangliosides स्पिंगोलिपिड है।


व्युत्पन्न वसा (Derived Lipid)


इसके अंतर्गत स्टेरॉइड, टरपीन तथा केरेटिनोइड सम्मिलित है।


स्टेरॉइड  (Steroids)


इनमें वसा अम्ल (Fatty Acids) नहीं होते हैं। लेकिन लिपिड जैसे गुणों के कारण ये लिपिड में शामिल होते हैं। इनमे चार जुड़े हुए कार्बन वलय होते हैं। इसमें पित्त, लवण, सेक्स हार्मोन आदि शामिल हैं। स्टेरॉल स्टेरॉयड के अल्कोहल व्युत्पन्न हैं। स्टेरॉइड निम्न प्रकार के होते है

कोलेस्ट्रॉल

कोलेस्ट्रॉल जंतुओं के शरीर में पाए जाने वाले एक सामान्य स्टेरॉयड है। यह मुफ़्त या वसा अम्ल (Fatty Acids) के एस्टर के रूप में हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल पानी में अघुलनशील है।, इसलिए  इसकी मात्र बढ़ने पर ये धमनियों और शिराओं में जमा होता है। इससे उच्च रक्तचाप और हृदय रोग हो सकता हैं।

कोलेस्ट्रॉल को जीवविज्ञान का सर्वाधिक सुसज्जित सूक्ष्म अणु कहा जाता है।
टेस्टोस्टेरोन, प्रोजेस्टेरोन, कोर्टिसोल, एल्डोस्टरोन जैसे कई हार्मोन कोलेस्ट्रॉल से संश्लेषित किया जाता है। हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल के व्युत्पन्न से विटामिन डी का गठन होता है।
एर्गोस्टेरोल

एर्गोस्टेरोल (C28H43OH) पादपों में पाया जाने वाला एक स्टीरोल है।

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कोप्रोस्टेरोल

कोप्रोस्टेरोल मल में पाया जाने वाला स्टीरोल है, जो कोलन के जीवाणुओं के द्वारा कोलेस्ट्रॉल के अपघटन से बनता है।

डायोस्गेनिन (Diosgenin)

डायोस्गेनिन  याम पादप डायोस्कोरा (Dioscorea) द्वारा उत्पादित स्टेरॉयड है। इसका उपयोग प्रजनन क्षमता निरोधक गोलियों में किया जाता है।


टरपीन


इनको क्रोमोलिपिड भी कहा जाता है। ये आइसोप्रीन के बहुलक होते है।


केरेटिनोइड


ये पादपों में पाए जाने वाले वर्णक है। जैसे Lycopene, Carotenes, Xanthophylls

 

 


जटिल वसा (Complex Lipids)


लिपोप्रोटीन

लिपोप्रोटीन कॉम्प्लेक्स लिपिड (जटिल वसा) हैं। जिसमें लिपिड और प्रोटीन शामिल हैं। प्लाज्मा लिपोप्रोटीन में  जटिल लिपिड होते हैं। जो रक्त प्रवाह के माध्यम से अन्य लिपिडों को परिवहन करते हैं।
लाइपोप्रोटीन जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं और ऊर्जा उत्पादन के लिए  सतह प्रदान करते हैं। और पादप या जंतु शरीर के विभिन्न भागों में लिपिड और प्रोटीन के परिवहन में भी मदद करते हैं।

लाइपोप्रोटीन या लिपोप्रोटीन को उनके घनत्व के आधार पर निम्न भागों में वर्गीकृत किया जाता है। –


*क्यलोमाइक्रोन


इनमें  0.99 gm/ ml से कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन सम्मिलित है। जो आंत्र से ट्राइग्लिसराइड्स को दूसरे ऊतकों तक ले जाते हैं।


* बहुत कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (VLDL)


इनमें 0.95-1.019 gm/ ml घनत्व वाले लिपोप्रोटीन सम्मिलित है। ये यकृत में संश्लेषित ट्राइग्लिसराइड से जुड़कर उसे भंडारण के लिए वसा ऊतकों और अन्य ऊतकों तक ले जाते हैं।


* कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (LDL)


इनमें 1.019 -1.063 gm/ ml घनत्व वाले लिपोप्रोटीन सम्मिलित है। वे कोलेस्ट्रॉल का ऊतकों से यकृत तक परिवहन करते हैं। इनको अच्छा कोलेस्ट्रॉल भी कहा जाता है।


* उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (HDL)


इनमें 1.063-1.210 gm/ ml घनत्व वाले लिपोप्रोटीन सम्मिलित है। ये कोलेस्ट्रॉल को यकृत से  परिधीय ऊतकों तक ले जाते हैं। और रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इनको अच्छा कोलेस्ट्रॉल भी कहा जाता है।

 

 


लिपिड का कार्य (Functions of Lipid)


1. ऊर्जा का प्रमुख स्रोत

वसा के ऑक्सीकारी अपघटन द्वारा ऊर्जा प्राप्त की जाती है। वसा कार्बोहाइड्रेट की तुलना में प्रति ग्राम से दुगुने से ज्यादा ऊर्जा प्रदान करती हैं।

2. खाद्य भंडार

पादपों तथा जंतुओं में भोजन का संग्रहण वसा रूप में होता है।
पादपों में, अंकुरण के दौरान भ्रूण के पोषण प्रदान करने के लिए बीज में संग्रहित वसा का उपयोग किया जाता है।

3. विटामिन का अवशोषण

लिपिड घुलनशील विटामिन (A, D, E, K) के वाहक के रूप में कार्य करता है। सभी को घुलनशील विटामिन को वसा अणुओं के साथ मिलाकर छोटी आंत से विभिन्न कोशिकाओं में ले जाया जाता है। इसलिए एक आहार जो वसा की मात्र बहुत कम होने पर है।, इन चार विटामिन की कमी हो सकती है।

4. कोशिका झिल्ली का संरचनात्मक संघटक

फॉस्फोलिपिड, ग्लाइकोलिपिड और स्टीरोल कोशिका झिल्ली  के महत्वपूर्ण घटक होते हैं।

5. संरक्षण और ऊष्मारोधक

जंतुओं में वसा को वसा कोशिकाओं में संग्रहित किया जाता  हैं। त्वचा के नीचे और आंतरिक अंगों के नीचे जमा वसा सर्दियों में शरीर ऊष्मा की हानि से बचाती है। । वसा नेत्र गोलक, वृक्क तथा जननांग को चोट से बचाने का कार्य करते हैं।
6.  हार्मोन

कोलेस्ट्रॉल स्टेरॉयड हार्मोन, विटामिन डी और पित्त लवण के संश्लेषण में उपयोग किया जाता है। प्रोस्टाग्लैंडिन हार्मोन एरेकीडोनिक अम्ल का व्युत्पन्न हैं। थ्रोम्बोक्सानेस प्लेटलेट्स द्वारा संश्लेषित होते है। जो रक्त स्कंदन में सहायता करते है।
प्रोस्टाग्लैंडिन हार्मोन – लिपिड PUFA का व्युत्पन्न है। ये रक्त का थक्का निर्माण, गर्भाशय का संकुचन, पेशीयों के संकुचन आदि कार्य करता है।


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