विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) व विभिन्न प्रकार (Meristematic in Hindi)

विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) व विभिन्न प्रकार (Meristematic in Hindi)

Hey biology lovers, आज का हमारे ब्लॉग का शीर्षक विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) एवं उनके विभिन्न प्रकार है। ये अविभेदित (undifferentiated) विभाजन की क्षमता वाले ऊतको का समूह है। विभज्योतक का अंग्रेजी शब्द ग्रीक भाषा के merizein जिसका अर्थ है- विभाजन करना (to divide) । इनकी विशेषताएँ निम्न प्रकार है:-

  • विभज्योतक ऊतक की कोशिकाएँ समान व्यास (Diameter) वाली होती है, जिनका आकर आयताकार (Rectangular) या बहुभुजी (Polygonal) होता है।
  • इन कोशिकाओं का केन्द्रक बड़ा, जीवद्रव्य सघन, तथा इनमें रिक्तिका (Vacuole) अनुपस्थित होती है।
  • इन कोशिकाओं के बीच में खाली स्थान यानि अन्तराकोशिक स्थल अनुपस्थित होता है।
  • इन कोशिकाओं में माइटोकांड्रिया की संख्या सबसे अधिक होती है क्योंकि ये उपापचयी रूप से अधिक सक्रिय होती है। Metabolically more reactive
  • इन कोशिकाओं में लवक Plastid नहीं पाए जाते यदि उपस्थित होते है भी तो प्राकलवक proplastid के रूप में पाये जाते है।

विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) एवं उनके विभिन्न प्रकार

विभज्योतक ऊतक

  1. Meristem (विभज्योतक)
  2. Columella (statocytes with statolithes) (स्तम्भ)
  3. Lateral part of the tip (शीर्ष)
  4. Dead cells (मृत कोशिकाए)
  5. Elongation zone (दीर्घिकरण क्षेत्र)

 

विभज्योतक ऊतको का वर्गीकरण (Classification of Meristematic Tissue): –

इनका वर्गीकरण अलग-अलग आधार पर किया गया है, जिनके बारे में हम जानकारी प्राप्त करते है –

1.  उद्गम एवं विकास के आधार पर (On the Basis of Origin and Development):–

A. प्राकविभज्योतक ऊतक (Promeristem):-

इनका परिवर्धन भूर्णीय अवस्था में होता है। ये नवोदभिद के प्रांकुर व मूलांकुर के शीर्ष भाग का निर्माण करते है। इसके द्वारा प्राथमिक विभज्योतक का निर्माण होता है। इसे Primordial meristem भी कहते है।

B. प्राथमिक विभज्योतक ऊतक (Primary Meristem):–

ये जड़ो, तनो तथा शाखाओं के शीर्ष पर पाया जाता है। शीर्षस्थ विभज्योतक तथा अंतर्वेशी विभज्योतक दोनों ही प्राथमिक विभज्योतक है।

C. द्वितीयक विभज्योतक  ऊतक (Secondary Meristem):–

जब स्थायी ऊतक की कोशिकाओं में विभाजन की क्षमता फिर से आ जाती है तो उसे द्वितीयक विभज्योतक कहते है। जैसे कागएधा (Cork cambium) तथा अंतरपूलीय एधा (Inter-fascicular cambium) इनके कारण पादपो में द्वितीयक वर्द्धि Secondary growth होती है।

2.  कार्य के आधार पर (On The Basis of Function): –

A. अधित्वक (Protoderm):–

पादपो के जड़ो और तनो के शीर्षस्थ विभज्योतक में सबसे बाहर की ओर अधित्वक का एक मोटा स्तर होता है, जो अपनतिक विभाजन द्वारा तनो तथा मूल की बाह्यत्वचा का निर्माण करती है।

B. भरण विभज्योतक ऊतक (Ground Meristem):–

यह शीर्षस्थ विभज्योतक का केन्द्रीय भाग होता है, इसके द्वारा अधस्त्वचा (Hypodermis), वल्कुट (Cortex), अंतस्त्वचा (Endodermis), परिरंभ (Pericycle), मज्जा किरणें (Medullary rays), तथा मज्जा (Pith) का निर्माण होता है, जो सब भरण ऊतक तंत्र (Ground tissue system) के भाग है।

C. प्राक एधा (procambium):–

ये अधित्वक (Protoderm) तथा भरण विभज्योतक (Ground meristem) के मध्य पायी जाती है, जिसके द्वारा संवहन बंडल (Vascular Bundle) अथार्त जायलम तथा फ्लोएम का निर्माण होता है।

 

3. विभाजन के तल के आधार पर (On The Basis of Cell Division):–

A. स्थूल/ संहति विभज्योतक (Mass Meristem):-

इस प्रकार के विभज्योतक में सभी तलो में विभाजन होता है, उदाहरण- भ्रूण (Embryo) तथा भ्रूणपोष (Endosperm) का निर्माण।

B. पट्टिका/ प्लेट विभज्योतक (Plate Meristem):-

इस प्रकार के विभज्योतक में एक दूसरे के लम्बवत दो तलो में अपनतिक विभाजन होता है, जिससे प्लेट या पट्टिका जैसी संरचना बनती है। इस विभज्योतक से पत्तियों के फलक का निर्माण होता है।

C. पट्टी विभज्योतक/ शिरा विभज्योतक (Rib Meristem):-

इसे file meristem भी कहते है इस विभज्योतक में केवल एक ही तल में अपनतिक विभाजन होता है इसके द्वारा वल्कुट तथा मज्जा की कुछ कोशिकाओं का निर्माण होता है। ट्यूनिका पट्टी विभज्योतक का ही उदाहरण है।

 

4. स्थिति के आधार पर (On The Basis of Position) –

A. शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem):-

ये विभज्योतक जड़ो तथा परोह के शीर्ष पर पाए जाते है, जिनको वर्द्धि क्षेत्र कहते है। इस विभज्योतक के कारण पादप की जड़ो तथा परोह की लम्बाई में वर्द्धि होती है। भ्रूणावस्था में जड़ो तथा परोह के शीर्ष पर दो प्रकार के विभज्योतक होते है-

i. प्राक विभज्योतक ऊतक (Promeristem):-

ये भ्रूणावस्था में सर्वप्रथम उत्पन्न होने वाले विभज्योतक है।

ii. सुविभज्योतक (Eumeristem):-

इसे Haberland में कार्य के अनुसार तीन भागों में बांटा जो अधित्वक, प्राकएधा, तथा भरण- विभज्योतक है।

 

B. अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem):-

ये विभज्योतक स्थायी ऊतको  के बीच-बीच में पाया जाता है। जब शीर्षस्थ विभज्योतक की कोशिकाएँ वर्द्धि के दौरान स्थायी ऊतको के बीच में रह जाती है, तो अंतर्वेशी विभज्योतक का निर्माण होता है। ये ज्यादातर तनो के आधार या पत्ती के आधार में पाया जाता है। शीर्षस्थ तथा अंतर्वेशी विभज्योतक दोनों ही प्राथमिक विभज्योतक के प्रकार है।

C. पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem):-

ये विभज्योतक पादप विभिन्न अंगों के अन्दर पार्श्व स्थिति में पाए जाते है। ये बेलनाकार होते है, इनके कारण पादपो की मोटाई में वर्द्धि होती है, यानि द्वितीयक वर्द्धि होती है। ये दो प्रकार के होते है –

i. प्राथमिक पार्श्व विभज्योतक ( Primary Lateral Meristem):-

इसमें सीमान्त विभज्योतक तथा पूलीय एधा शामिल है।

a. सीमान्त विभज्योतक (Marginal Meristem ):-

ये विभज्योतक पत्ती के किनारों पर पाया जाता है, जिसके कारण पत्ती की चौड़ाई बढ़ती है।

b. पूलीय एधा (Fascicular Cambium):-

ये संवहन पूल (जायलम तथा फ्लोएम) में पाया जाता है, इस पूलीय एधा को अंत पूलीय एधा (Intra-fascicular cambium) भी कहते है।

ii. द्वितीयक पार्श्व विभज्योतक ( Secondary Lateral Meristem) :-

इसमें कागएधा (Cork cambium) तथा अंतरपूलीय एधा (Inter-fascicular cambium) सम्मिलित है। कागएधा का निर्माण द्वितीयक वर्द्धि के दौरान वल्कुट (Cortex) की कोशिकाओं से होता है। जबकि अंतरपूलीय एधा का निर्माण द्वितीयक वर्द्धि के दौरान मज्जा किरणों (Medullary rays) के द्वारा होता है।

  • किसी विभज्योतक से स्थायी उत्तक (Permanent tissue) का बनना विभेदन (Differentiation) तथा स्थायी उत्तक से विभज्योतक का बनना विविभेदन (Dedifferentiation) कहलाता है।

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Reference  –

NCERT books

BSER books

wikipedia and wikimedia

This Post Has 4 Comments

  1. Mughe science ki sari jankari chahiye 9ki book see rivetiv

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