आवृत्तबीजी या पुष्पी पादप

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Angiosperm in hindi or flowring plant आवृत्तबीजी या पुष्पी पादप (एन्थोफाइट्स)

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आवृत्तबीजी बीज वाले पादप है इनको पुष्पीय पादप (Flowring plant) भी कहते है।  इनमें बीजाण्ड (Ovule) के चारों ओर अंडाशय (Ovary) होता है तथा बीज फल के अन्दर स्थित होते हैं।

ये लगभग सभी संभव प्रकार के आवास में पाए जाते हैं।

 

आवृत्तबीजी पादपों के सामान्य लक्षण (General Characteristics of Angiosperm Plants)

  1. पुष्पीय पादप या आवृत्तबीजी अत्यधिक विकसित पादप है।
  2. इसमें बीजाणुपर्ण (Sporophyll) समूहित होकर पुष्पों (Flower) में रूपांतरित होते हैं। यह इनका प्रभावशाली लक्षण है। अतः आवृत्तबीजियों को पुष्पीय पादप भी कहते हैं।
  3. इनका नर लैंगिक अंग पुंकेसर (Stamen) होता है। जो तन्तु (Filament) तथा परागकोश (Anther) का बना होता है।
  4. मादा जननांग अण्डप (Carpel) वलयित होता है, तथा वर्तिकाग्र (Stigma), वर्तिका (Style) व अण्डाशय (Ovary) में बंटा होता है, अण्डाशय में बीजाण्ड (Ovule) होते हैं।
  5. बीजाण्ड (Ovule) इनकी गुरुबीजाणुधानी (Microsporangium) होती है।
  6. परागण (Pollination) अनेक कारकों द्वारा होता है, लेकिन प्रमुखतया जन्तुओं द्वारा होता है, विशेषतया कीटो द्वारा।
  7. मादा युग्मकोद्भिद (Female gametophyte) भ्रूणकोष (Embryo sac) कहलाता है। जो अत्यधिक अपह्वासित होता है, तथा 8.केन्द्रक तथा 7 कोशिकाएं अवस्था होती है।
  8. आर्कीगोनिया (Archeagonia) अनुपस्थित होते हैं। इसके बजाय एक अण्डा दो विशिष्टीकृत सहायक कोशिकाओं द्वारा घिरा होता है, जो पराग नलिका को आकर्षित करती है।
  9. इनमें दोहरा निषेचन (Double fertilization) होता है। एक युग्मनज उत्पन्न कर भ्रूण बनाता है। तथा दूसरा प्राथमिक भ्रूणपोष कोशिका बनाता है।
  10. भ्रूणपोष त्रिक संलयन (Triple fusion) द्वारा बनता है, तथा सामान्यतया त्रिगुणित (Triploid) होता है।
  11. निषेचित बीजाण्ड विकसित होकर बीज (Seed) बनाता है।
  12. बीज अण्डाशय भित्ति (Pericarp) द्वारा आवरित होते हैं। फल तकनीकी रूप से परिपक्व अण्डाशय है। फल केवल बीजों को ही सुरक्षित नहीं करते बल्कि उनके वितरण में भी सहायक है।
  13. इसमें जाइलम में वाहिकाएँ (Vessles) होती है। और फ्लोएम में चालनी नलिकाएँ (Sieve tubes) तथा सहायक कोशिकाएँ (Campanion cells) होती है।

आवृत्तबीजी भ्रौणिक पत्तियों या बीजपत्रों की संख्या के आधार पर दो उप-समूहों में विभक्त किये गए है-

  1. द्विबीजपत्री (Dicotyledon)
  2. एकबीजपत्री (Monocoteyledon)

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बेन्थम तथा हूकर का वर्गीकरण (Bentham and Hooker’s classification)

जॉर्ज बेन्थम तथा हूकर ने आवृत्तबीजियों के वर्गीकरण की प्राकृतिक पद्धति (Natural method of classification of angiosperms) दी।

  1. इसे अपनी पुस्तक जेनेरा प्लान्टेरम के तीन संस्करण में प्रकाशित किया
  2. इन्होंने 202 कुलों का वर्गीकरण किया। इस पद्धति में पादपों का वर्णन पूर्ण अध्ययन तथा डिसेक्शन (काट) पर आधारित था।
  3. यह पद्धति भारत सहित सभी ब्रिटिश कॉमन वेल्थ देशों द्वारा अपनाई गई।
  4. इस पद्धति में बीजी पादपों की लगभग 97 हजार जातियाँ सम्मिलित की गई है।

बेन्थम व हूकर की वर्गीकरण पद्धति में फेनेरोगेम्स पादपों को बाह्य आकारिकी लक्षणों जैसे पर्ण विन्यास, पुष्प में बाह्य दल, दल, पुमंग तथा जायांग की संख्या, बीज में बीजपत्रों की संख्या तथा बीज के आवरण के आधार पर तीन वर्गों में विभाजित किये गए है। जो नीचे दिया गया है-

  1. डाइकोटिलीडनी (Class  Dicotyledonae)
  2. जिम्नोस्पर्मी (Class Gymnospermae)
  3. मोनोकोटिलीडनी (Class  Monocotyledonae)

 

 

वर्ग 1. डाइकोटिलीडनी (Class  Dicotyledonae)

ये द्विबीजपत्री पादप है। पंचतयी पुष्प, पत्तियों में जालिकावत् शिराविन्यास, बीज में दो बीजपत्र, खुले संवहनीय बंडल (एधा युक्त), द्वितीयक वृद्धि उपस्थित काष्ठ निर्माण होता है।

इसे तीन उप-वर्गों में विभाजित किया गया है-

  1. पोलिपीटेली (Sub-class Polypetalae)
  2. गैमोपेटली (Sub-class Gamopetalae)
  3. मोनोक्लेमाइडी (Sub-class Monochlamydeae)

 

उप-वर्ग 1. पोलिपीटेली (Sub-class Polypetalae)

ये मुक्त दली होते है

इमें तीन श्रेणियों को सम्मिलित किया गया है-

  1. थेलेमिफ्लोरी (Series Thalamiflorae)
  2. डिस्किफ्लोरी (Series Disciflorae)
  3. केलिसिफ्लोरी (Series Calyciflorae)

 

श्रेणी 1. थेलेमिफ्लोरी (Series Thalamiflorae)

पुष्प अधोजायांगी (hypogynous), अनेक पुंकेसर तथा स्त्रीकेसर (अनिश्चित), पृथकदली (polypetalous), भिन्न-भिन्न बाह्य दल अण्डाशय से मुक्त। इसमें 6 गण है, उदाहरण –

  1. Ranales,
  2. Parietales,
  3. Malvales,
  4. Polygalinae,
  5. Caryophyllinae,
  6. Guttiferalsm

 

श्रेणी 2. डिस्किफ्लोरी (Series Disciflorae)

पुष्प अधोजायांगी (hypogynous), बाह्यदल मुक्त या युग्मित बाह्य दलों का बना होता है, पृथकदली (free petal), अण्डाशय के नीचे प्रमुख कुशन आकृति की डिस्क उपस्थित। इसमें 4 गण होते हैं। उदाहरण –

  1. Geraniales,
  2. Olacales,
  3. celastrales,
  4. Sapindales

 

श्रेणी 3. केलिसिफ्लोरी (Series Calyciflorae)

पुष्प परिजायांगी या अधिजायांगी, बाह्यदल पुंज युग्मित बाह्यदल (बहुत कम पृथक) होते हैं, अण्डाशय अधोवर्ती, इसमें 5 गण होते हैं-

  1. Rosales,
  2. Myrtales,
  3. Passiflorales,
  4. Ficoidales,
  5. Umbellales

 

उप-वर्ग 2. गैमोपेटली (Sub-class Gamopetalae)

ये संयुक्तदली होते है।

इसमें तीन श्रेणियाँ सम्मिलित है-

  1. इनफेरी (Series Inferae)
  2. हेटेरोमरी (Series Heteromerae)
  3. बाइकार्पेलेटी (Series Bicarpellatae)

 

श्रेणी 1. इनफेरी (Series Inferae)

पुष्प अधिजायांगी, अण्डाशय अधोवर्ती

इसमें 3 गण सम्मिलित है-

  1. Rubiales,
  2. Asterales
  3. Campanales

 

श्रेणी 2. हेटेरोमरी (Series Heteromerae)

अण्डाशय प्रायः उर्ध्ववर्ती, दो से अधिक अण्डप इसमें तीन गण है-

  1. Ericales,
  2. Primulales
  3. Ebenales

 

श्रेणी 3. बाइकार्पेलेटी (Series Bicarpellatae)

अण्डाशय प्रायः ऊर्ध्ववर्ती, दो अण्डप(बहुत कम एक या तीन) इसमें 4 गण है-

  1. Gentianales,
  2. Polemoniales,
  3. Personales
  4. Lamiales

 

उप-वर्ग 3. मोनोक्लेमाइडी (Sub-class Monochlamydeae)

पुष्प अपूर्ण बाह्यदलपुंज व दल पुंज के बीच कोई विभेदन नहीं, पेरिएन्थ उपस्थित जो प्रायः सेपेलॉइड तथा अनुपस्थित हो सकते हैं।

इसमें 8 श्रेणियाँ सम्मिलित है-

  1. कर्वेम्ब्री (Series Curvembryeae)
  2. मल्टिऑव्युलेटी एक्वेटिसी (Series Multiovulatae Aquaticae)
  3. मल्टिऑव्युलेटी टेरेस्टेªस (Series Multiovulatae Terrestres)
  4.  माइक्रोएम्ब्री (Series Microembryae)
  5. डेफनेल्स (Series Daphnales)
  6. एक्लेमाइडोस्पोरी (Series Achlamydosporeae)
  7. युनिसेक्सुएल्स (Series Unisexuales)
  8. ऑर्डिन्स एनोमेलि (Series Ordines Anomali)

 


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श्रेणी 1. कर्वेम्ब्री (Series Curvembryeae)

भ्रूण वक्रित, प्रायः एक बीजाण्ड।

श्रेणी 2. मल्टिऑव्युलेटी एक्वेटिसी (Series Multiovulatae Aquaticae)

पादप जलीय, जलमग्न शाक, संयुक्ताण्डपी अण्डाशय।

श्रेणी 3. मल्टिऑव्युलेटी टेरेस्टेªस (Series Multiovulatae Terrestres)

पादप स्थलीय होते हैं, संयुक्ताण्डपी अण्डाशय।

श्रेणी 4. माइक्रोएम्ब्री (Series Microembryae)

बहुत छोटा या छोटा भ्रूण।

श्रेणी 5. डेफनेल्स (Series Daphnales)

एक अण्डप या एक बीजाण्ड युक्त अण्डाशय।

श्रेणी 6. एक्लेमाइडोस्पोरी (Series Achlamydosporeae)

एक से तीन बीजाण्डों युक्त अण्डाशय एक कोष्ठकीय अण्डाशय अधोवर्ती।

श्रेणी 7. युनिसेक्सुएल्स (Series Unisexuales)

पुष्प एक कोशिकीय।

श्रेणी 8. ऑर्डिन्स एनोमेलि (Series Ordines Anomali)

कुल के पादप एनोमेलस लक्षणों युक्त होते हैं।

 

वर्ग 2. जिम्नोस्पर्मी (Class Gymnospermae)

जननांग शंकु होते हैं, पेरिएन्थ अनुपस्थित, बीजाण्ड नग्न (अण्डाशय के भीतर नहीं पाए जाते), बीज भी नग्न होते हैं, अगुणित भ्रूणपोष। इसमें तीन कुल है-नीटेसी, कोनिफेरी तथा सायकेडी।

 

वर्ग 3. मोनोकोटिलीडनी (Class  Monocotyledonae)

पत्तियों में समान्तर शिरा विन्यास, एक बीजपत्र युक्त भ्रूण, पुष्प प्रायः त्रितयी, काष्ठ अनुपस्थित, द्वितीयक वृद्धि नहीं होती।

इसमें सात श्रेणियाँ सम्मिलित है:

 

  1. माइक्रोस्पर्मी (Series Microspermae)
  2. एपिगाइनी (Series Epigynae)
  3. कोरोनेरी (Series Coronarieae)
  4. केलिसिनी (Series Calycineae)
  5. न्युडिफ्लोरी (Series Nudiflorae)
  6. एपोकार्पी (Series Apocarpae)
  7. ग्लुमेसी (Series Glumaceae)

 


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श्रेणी 1. माइक्रोस्पर्मी (Series Microspermae)

अण्डाशय अधोवर्ती, बीज बहुत छोटे।

श्रेणी 2. एपिगाइनी (Series Epigynae)

अण्डाशय अधोवर्ती, बीज बडे़।

श्रेणी 3. कोरोनेरी (Series Coronarieae)

अण्डाशय ऊर्ध्ववर्ती, पेरिएन्थ रंगीन।

श्रेणी 4. केलिसिनी (Series Calycineae)

अण्डाशय ऊर्ध्ववर्ती, पेरिएन्थ हरा।

श्रेणी 5. न्युडिफ्लोरी (Series Nudiflorae)

पेरिएन्थ अनुपस्थित, अण्डाशय ऊर्ध्ववर्ती।

श्रेणी 6. एपोकार्पी (Series Apocarpae)

अण्डप मुक्त (एपोकार्पस)।

श्रेणी 7. ग्लुमेसी (Series Glumaceae)

पुष्प सहपत्रों के साथ स्पाइकलेट्स में व्यवस्थित पेरिएन्थ अपह्वासित, सहपत्र बड़े तथा शल्की।

इस वर्गीकरण में वर्ग प्रभाग समान, श्रेणी वर्ग समान, कोहर्ट गण समान तथा गण कुल समान होते हैं।

 

बेन्थम व हूकर पद्धति के गुण (Merits of Bentham and Hooker’s System)

  1. यह प्रायोगिक मानों के लिए उपयोगी है।
  2. रेनेल्स को द्विबीजपत्रियों के साथ प्रमुख आद्य स्थिति में रखा गया है।
  3. ग्लुमेसी को एकबीजपत्रियों के साथ प्रमुख प्रगत माना गया है।

बेन्थम व हूकर पद्धति के दोष (Demerits of Bentham and Hooker’s System)

  1. अनावृत्तबीजियों को द्विबीजपत्री तथा एकबीजपत्री के बीच रखा गया है।
  2. अनेक महत्वपूर्ण पुष्पीय लक्षण उपेक्षित किये गए है।
  3. यह जातिवृत्तीय पद्धति है, तथा जातियों की स्थिरता में विश्वास करती है।
  4. कुछ घनिष्ठ सम्बन्धि कुल पृथक किये गए तथा भिन्न-भिन्न गणों में रखे गए है।
  5. प्रगत कुल जैसे ऑर्किडेसी (माइक्रोस्पर्मी) को आद्य माना गया है।

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इन्हें भी पढ़ें

  1. ब्रायोफाइट (Bryophyte) पादपो का सामान्य परिचय एवं जीवन चक्र (General Introduction and Life Cycle of Bryophyte Plants in Hindi)
  2. टेरिडोफाइट पादपो का सामान्य परिचय एवं विशिष्टता (General Introduction and Characteristics of Pteridophyta Plants)
  3. अनावृतबीजी या जिम्नोस्पर्म के लक्षण एवं वर्गीकरण (Characteristics and classification of gymnosperms)
  4. संघ पोरिफेरा या स्पंज का संघ (Phylum-Porifera or Sponge Hindi)
  5. संघ सीलेन्ट्रेटा या नाइडेरिया (Phylum – Coelenterata or Cnidaria in Hindi)
  6. Phylum संघ – टीनोफोरा

 

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