एड्रीनल ग्रन्थि / अधिवृक्क ग्रंथि

Adrenal gland in Hindi, एड्रीनल ग्रन्थि, अधिवृक्क ग्रंथि, Adrenal gland hormone in Hindi

एड्रीनल ग्रन्थि / अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland)

एड्रीनल शंकुकार पिरामिड (cone-shaped pyramid) आकृति की दो ग्रन्थियाँ है। जो प्रत्येक वृक्क के ऊपर पाई जाती है।

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प्रत्येक एड्रीनल बाहरी भाग एड्रीनल वल्कुट (Adrenal cortex) तथा केन्द्रिय  भाग एड्रीनल मध्यांश (Adrenal medulla)  कहलाता है।

एड्रीनल का यह भाग जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, तथा इसके अपक्षयन व प्रतिस्थापन से जन्तु की मृत्यु हो जाती है।

एड्रीनल वल्कुट (Adrenal cortex)

यह एडिनल ग्रंथि का परिधीय (Peripharal) भाग होता है।  जो तीन भागों में बटा होता है

  1. जोना ग्लोमेरुलोसा (Zona glomerulosa)
  2. जोना फेसिक्युलेटा (Zona fasciculata)
  3. जोना रेटिकुलेरिस (Zona reticularis)

 

यह हाॅर्मोन के तीन समूह स्त्रावित करता है, जैसे-मिनरलोकाॅर्टिकाॅइड्स, ग्लुकोकाॅर्टिकाॅइड्स तथा लैंगिक काॅर्टिकाॅइड्स।

 

मिनरलोकाॅर्टिकाॅइड्स (Mineralocorticoid)

यह एड्रीनल वल्कुट की सबसे बाहरी कोशिकीय परत जोना ग्लोमेरूलोसा से स्रावित होता है। एल्डोस्टीराॅन मनुष्य स्तनियों तथा पक्षियों में प्रमुख मिनरलोकाॅर्टिकाॅइड है।

मिनरलोकाॅटिकाॅइड्स सोडियम तथा पौटेशियम की उपापचय को नियमित करता है। इनका स्रावण प्लाज्मा में Na+ सान्द्रता में कमी या रक्त के परिसंचरित आयतन में कमी द्वारा उद्दीप्त होता है।

एल्डोस्टीराॅन मूत्र, पसीने, लार तथा पीत्त (Bile) में सोडियम Na+ के निष्कासन को कम करता है। यह K+ के निष्कासन में वृद्धि करता है। रक्त में अधिक सोडियम Na के बने रहने से Na+ (सोडियम)  के परासरणी प्रभाव (Osmatic effect) द्वारा मूत्र से जल का पुनरावशोषण (Reabsorption) बढ़ता है। इसी कारण यह रक्त तथा अन्य बाह्य कोशिकीय तरल (Extra cellular fluid) के आयतन में वृद्धि करता है।

 

ग्लुकोकाॅर्टिकाॅइड्स (Glucocorticoid)

यह एड्रीनल वल्कुट की मध्य कोशिकीय परत जोना फेसिक्युलेटा से स्त्रावित होता है। जैसे काॅर्टिसोल, काॅर्टिसोन

ग्लुकोकाॅर्टिकाॅइड्स ग्लुकोनीयोजेनेसिस, लिपोलाइसिस तथा प्रोटीयोलाइसिस को उद्दीप्त करता है, तथा अमिनों अम्ल के ग्रहण व उपभोग को संदमित करता है।

काॅर्टिसोल हृदय संवहनीय तन्त्र (Cardiovascular System) तथा वृक्क कार्यों को बनाए रखने में भाग लेता है।

अग्र पिट्युटरी हार्मोन को एडिनोकाॅर्टिकोट्रोपिन हार्मोन (ACTH) कहते हैं, जो ग्लुकोकाॅर्टिकाॅइड स्त्रावण को उद्दीप्त करता है, इसके विपरीत ग्लुकोकाॅर्टिकाॅइड स्त्रावण पर विपरीत संदमित प्रभाव डालता है।

ग्लुकोकाॅर्टिकाॅइड्स प्रकृति में एन्टि उत्तेजक (Immunosuprresive) होता है, अर्थात् ये प्रतिरक्षी (Antibody) के निर्माण को कम करते हैं भक्षाणु कोशिकाओं के लाइसोसोम के स्थिरीकारी के रूप में कार्य करते हैं। लम्बे समय तक ग्लुकोकाॅर्टिकाॅइड्स का उपयोग प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया को संदमित करता है।

यह प्रतिप्रदाह या प्रदाह रोधी (Anti-inflammentory) होते हैं अर्थात् किसी संक्रमण के खिलाफ होने वाले श्रद्धा है सूजन को कम करने का कार्य करते हैं अतः इनका उपयोग एलर्जी के उपचार में किया जाता है इनको एन्टी एलर्जीक (Anti-allergic) कह सकते हैं

लैंगिक काॅर्टिकाॅइड्स (Sex corticoid)

एड्रीनल वल्कुट की मध्य व आन्तरिक परत जोना रेटिक्युलेरिस दोनों से स्त्रावित होते हैं। इनका स्त्रावण अग्र पिट्युटरी के एडिनोकाॅर्टिकोट्रोपिन द्वारा उद्दीप्त होता है।

इनमें स्टीराॅइड्स सम्मिलित है, जो नर के बाहरी लैंगिक लक्षणों के विकास को उद्दीप्त करते हैं, जैसे शरीर वालों का वितरण (अक्षीय बालों, प्युबिक वालों तथा चेहरे के बालों की वृद्धि में भूमिका)। लैंगिक काॅर्टिकाॅइड्स के उदाहरण- एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन, एण्ड्रोजन, एन्ड्रोस्टीनीडियोन तथा डीहाइड्रोएपिएन्ड्रोस्टीराॅन।

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एड्रीनल मेड्युला (Adrenal medulla)

यह एड्रीनल का मध्य भाग बनाता है जो तनाव या आपातकालीन के विरूद्ध लड़ने में शरीर की सहायकता करता है।

लेकिन यह जीवनयापन हेतु आवश्यक नहीं है, क्योंकि इसे निकालने पर मृत्यु नहीं होती है।

एड्रीनल मेड्युला दो हाॅर्मोन स्रावित करता है, जैसे एड्रीनलिन तथा नाॅरएड्रीनलिन

इन हाॅर्मोन का स्त्रावण तब उद्दीप्त होता है, जब तंत्रिका आवेग अनुकम्पी तंत्रिका तन्तुओं द्वारा एड्रीनल मेड्युला में पहुँचते हैं।

ये हार्मोन अनुकम्पी तन्तु द्वारा अंगों व ऊत्तकों में जाते है, तथा वही प्रभाव उत्पन्न करते हैं, जो अनुकम्पी उद्दीपन्न के होते हैं।

नाॅर एड्रीनलिन अनुकम्पी तंत्रिका अंतस्थ पर स्रावित होता है।

अनुकम्पी तंत्रिकाएँ तथा एड्रीनल मेड्युला दोनों शारिरिक तनाव जैसे रक्त दाब या रक्त शर्करा, दर्द, सर्दी या चोट में उद्दीप्त होती है, दोनों भावनात्मक तनाव जैसे क्रोध, डर तथा शोक में भी उद्दीप्त होते हैं।

सिम्पेथेटिकोएड्रीनल तन्त्र (Sympathetic adrenal system)

एड्रीनल मेड्युला तथा अनुकम्पी तंत्रिका तन्त्र घनिष्ठ रूप से एकीकृत तन्त्र के रूप में कार्य करते हैं, इसे सिम्पेथेटिकोएड्रीनल तन्त्र कहते हैं।

 

एड्रिनल ग्रंथि से संबंधित विकार (Disorder related to adrenal gland)

एडिसन का रोग (Addison’s Disease)

ट्युबरकुलोसिस जैसे रोगों द्वारा एड्रीनल वल्कूट का अपक्षय (नष्ट) होता है, जिससे एडिसन रोग उत्पन्न होता है, ऐसा ग्लुकोकाॅर्टिकाॅइड्स तथा मिनरलोकाॅर्टिकाॅइड्स दोनों की कमी के कारण होता है। इसमें त्वचा ताँबे के रंग जैसी हो जाती है, रक्त शर्कर निम्न, निम्न प्लाज्मा Na+ (सोडियम)   उच्च प्लाज्मा K+ ,   मूत्राशय Na+ (सोडियम)  में वृद्धि, मिचली आना उल्टी तथा डायरीया हो जाता है।

कुशिंग सिन्ड्राम (Cushing Syndrome)

एड्रीनल वल्कुट का ट्युमर अत्यधिक काॅर्टिसोल स्त्रावित करता है, जिससे कुशिंग सिन्ड्रोम होता है। उच्च रक्त शर्करा, मूत्र में उच्च रक्त शर्करा की प्रकटता, मोटापा, प्लाज्मा Na+ (सोडियम) में वृद्धि, प्लाज्मा K+ में कमी, रक्त आयतन में वृद्धि तथा उच्च रक्त रोगी में दिखाई देते हैं।

एल्डोस्टीरोनिज्म (Aldosteronism)

एड्रीनल काॅर्टिकल ट्युमर से एल्डोस्टीराॅन का अत्यधिक स्त्रावण एल्डोस्टीरोनिज्म उत्पन्न करता है। यह रोग उच्च प्लाज्मा  Na+, निम्न प्लाज्मा K+,रक्त आयतन में वृद्धि तथा उच्च रक्त दाब द्वारा अभिलक्षित होता है।

 एड्रीनल विरिलिज्म (Adrenal virilism)

लैंगिक काॅर्टिकाॅइड्स का अत्यधिक स्त्रावण नर के बाह्य लैंगिक लक्षण उत्पन्न करता है, जैसे महिलाओं में दाढ़ी व मूँछ तथा नर की आवाज इस रोग को एड्रीनल विरिलिज्म कहते हैं। इसको हिर्सूटीज्म भी कहते है।

गायनीकोमेस्टिया (Gynaecomastia)

लिंग हॉर्मोन एस्ट्रोजन की अधिकता से पुरुष में स्त्री के समान स्तनों का विकास होना।

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  2. थायराइड ग्रंथि
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