आवेश का मात्रक एवं आवेशन की विधियां

आवेश का मात्रक  एवं आवेशन की विधियां (Unit of Charge and Methods of Charging in Hindi)

आवेश का मात्रक (Unit of Charge)

विद्युत आवेश का मात्रक SI मात्रक कुलाम (coulomb) होता है। इसे C से व्यक्त किया जाता है। इसका छोटे मात्रक निम्न प्रकार होते हैं-

1 mC (मिलीकुलाम) = 10-3C

1μC (माइक्रोकुलाम) = 10-6C

1 nC (नैनोकुलाम)  = 10-9C

1pC (पिकोकुलाम) = 10-12C

 

आवेश का सीजीएस (CGS) पद्धति में मात्रक स्टेट कुलाम (statC) होता है। आवेश का सबसे छोटा मात्रक स्थिर वैद्युत इकाई (electrostatic unit of charge) या फ्रैंकलीन (Franklin) होता है।

1C = 3.00×109statC

1 statC = ~3.33564×10−10C

आवेश का विद्युत चुंबकीय मात्रक ऐबकूलाम होता है।

आवेश का सबसे बड़ा मात्रक फैराडे (Faraday) होता है।

1 फैराडे = 96485.3399कुलाम

1 फैराडे = इलेक्ट्रॉनों का 1 मोल

 

आवेश का एमकेएस पद्धति में मात्रक

विद्युत धारा I = q/t

q = I x t

= एम्पियर x सेकंड

विमा = [A1T1]

 

आवेश का मात्रक  एवं आवेशन की विधियां (Unit of Charge and Methods of Charging in Hindi)

आवेशन की विधियां (Methods of Charging)

निम्नलिखित विधियों के द्वारा किसी भी अनावेशित वस्तु को आवेशित किया जा सकता है-

घर्षण द्वारा आवेशन (Charging by Friction)

जब दो कुचालक अथवा अनावेशित वस्तुओं का घर्षण करवाया जाता है। तो इसमें परस्पर आवेशों का स्थानांतरण हो जाता है। एक वस्तु इलेक्ट्रॉन का त्याग करती है। तथा दूसरी वस्तु इन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण कर लेती है। जो वस्तु इलेक्ट्रॉनों का त्याग करती है। वह धनावेशित और जो वस्तु इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करती है। वह ऋणावेशित हो जाती है।

इस विधि को घर्षण द्वारा आवेशन कहते हैं।

उदाहरण

  1. जब किसी कांच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ते हैं तो कांच की छड़ धनावेशित रेशम का कपड़ा ऋणावेशित हो जाता है।
  2.  एबोनाइट की छड़ को बिल्ली की फर से रगड़ा जाता है। तो बिल्ली का फर धनावेशित तथा एबोनाइट की छड़ ऋणावेशित हो जाती है।
  3. जब ग्रेफाइट की छड़ को बिल्ली की फर से रगड़ा जाता है। तो बिल्ली का फर धनावेशित तथा ग्रेफाइट की छड़ ऋणावेशित हो जाती है।
  4. ऊन के कपड़ों को रबड़ से रगड़ने पर ऊन का कपड़ा धनावेशित तथा रबड़ ऋणावेशित हो जाता है।

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चालन द्वारा आवेशन (Charging by Conduction)

जब किसी उदासीन वस्तु के पास आवेशित वस्तु लेकर जाते हैं, तो इसमें परस्पर संपर्क के पश्चात इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण तब तक होता रहता है। जब तक कि दोनों वस्तुओं में आवेश का मान समान ना हो जाए तथा दोनों वस्तुओं पर समान परिमाण व समान प्रकृति का आवेश आ जाता है।

इस विधि को चालन द्वारा आवेशन कहा जाता है।

 

प्रेरण विधि या प्रेरक द्वारा आवेशन  (Charging by Induction)

इस विधि में अनावेशित वस्तु को आवेशित वस्तु के बिना स्पर्श किए आवेशित किया जाता है। इसमें वस्तु को जिस आवेश से आवेशित करना है। उसके विपरीत प्रकृति के आवेश की छड़ उदासीन वस्तु के पास लाई जाती है। जिससे वस्तु के एक तरफ धनावेश तथा दूसरी ओर ऋणावेश आ जाता है। इसके बाद वस्तु को दूसरी ओर से भू-सम्पर्कित कर दिया जाता है। संपूर्ण वस्तु किसी एक प्रकृति के आवेश में आवेशित हो जाती है।

Question – किसी उदासीन गोले को प्रेरण द्वारा किस प्रकार धनावेशित किया जा सकता है।

सर्वप्रथम धनावेशित उदासीन गोले को किसी को चालक स्टैंड के द्वारा स्थिर किया जाता है। इसके पास आवेशित छड़ लेकर आते हैं, यदि आवेशित छड़ ऋणावेशित होती है। तो गोले के एक और धनावेशित तथा दूसरी विपरीत सिरे में ऋणावेशित हो जाता है। विपरीत सिरे को भू संपर्क करवा देने से संपूर्ण गोला धनावेशित हो जाता है।

आवेश का मात्रक  एवं आवेशन की विधियां (Unit of Charge and Methods of Charging in Hindi)

 

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