अधिगम वक्र एवं इसके प्रकार

अधिगम वक्र, Learning Curve In Hindi

अधिगम वक्र की परिभाषा  (Definition Of Learning Curve In Hindi)

सीखने की प्रक्रिया जन्म से लेकर मृत्यु तक चलती रहती है। हम जीवन पर्यंत कुछ न कुछ सीखते रहते हैं। लेकिन सीखने की दर हमेशा एक जैसी नहीं होती। कभी हम अधिक सकते हैं, तो कभी हम कम सीख पाते हैं।

सीखने की दर का जब समय के साथ वक्र बनाया जाए तो इसे अधिगम वक्र (Learning Curve) कहते है।

अधिगम वक्र के प्रकार ( Types Of Learning Curve In Hindi)

ये  चार प्रकार के होते हैं। जो निम्न प्रकार है-

  1. सरल रेखीय वक्र (Simple Linear Learning Curve)
  2. उन्नतोदर वक्र (Diminishing Return Learning Curve)
  3. नत्तोदर वक्र (Increasing-Return Learning Curve)
  4. मिश्रित वक्र (Mixed  Learning Curve)

 

सरल रेखीय अधिगम वक्र (Simple Linear Learning Curve)

अधिगम की दर तथा अधि गम को सीखने में लगाया गया समय दोनों निश्चित अनुपात में होते है।

 

अधिगम वक्र (Learning Curve)

इस प्रकार के अधिगम में अधिगम की दर तथा समय का वक्र सरल रेखा में प्राप्त होता है। परंतु ऐसा वक्र कर सामान्यतः संभव नहीं है। क्योंकि मनुष्य केर सीखने की दर समय के साथ एकसमान नहीं रहती।

 

उन्नतोदर वक्र (Diminishing Return Learning Curve)

यदि अधिगम में लिया गया समय कम तथा अधिगम की दर अधिक हो तो उन्नतोदर वक्र कर प्राप्त होता है। जिसमें प्रारंभिक समय में अधिगम दर अधिक होती है। परंतु समय बढ़ने के साथ-साथ यह स्थिर हो जाती है।

इस प्रकार के अधिगम में अधिगम की दर तथा समय का वक्र अतिपरवलय या हाइपरबोलीक (Hyperbola) प्राप्त होता है। इसमें प्रारंभ में तो सीखने की दर अधिक होती है। परंतु एक निश्चित समय के पश्चात वह स्थिर हो जाती हैं, या बहुत कम सीखा जाता है।

 

 

नत्तोदर वक्र (Increasing-Return Learning Curve)

अधिगम में लिया गया समय अधिक तथा अधिग की दर कम हो तो नत्तोदर वक्र कर प्राप्त होता है। नत्तोदर वक्र में प्रारंभ में अधिगमकी दर कम होती है। परंतु समय बढ़ने के साथ-साथ अधिगम की दर अधिक होती जाती है।

अधिगम वक्र (Learning Curve)

इस प्रकार के लर्निंग में अधिगमकी दर तथा समय का वक्र J आकार का प्राप्त होता है। यह सर्वश्रेष्ठ अधिगम वक्र है। क्योंकि इसमें प्रारंभ में तो सीखने की दर कम होती हैं। फिर बाद में कम समय में अधिक सीखा जाता है।

 

मिश्रित वक्र (Mixed  Learning Curve)

यह उन्नतोदर वक्र तथा नत्तोदर वक्र का मिश्रित रूप है।

 

अधिगम वक्र (Learning Curve)

इस प्रकार के सीखने में अधि गम की दर तथा समय का वक्र S आकार का प्राप्त होता है। लेकिन ऐसा सामान्यतः संभव नहीं है। क्योंकि मानव जीवन की हर अवस्था में कुछ ना कुछ सीखता रहता है।

 

अधिगम का पठार

यदि किसी कार्य को करते समय सीखने की गति रुक जाती है। तो उसमें न तो उन्नति होती है, और ना ही अवनति होती है। ऐसी स्थिति में एक हाइपरबॉलिक ग्राफ प्राप्त होता है। यह स्थिति अधिगम का पठार कहलाती है। अधिगम के पठार में सीखने की दर जीरो हो जाती है। यह अधिगमकर्ता में थकान या अरुचि को दर्शाता है, अर्थात उसको उस कार्य को सीखने में कोई रुचि नहीं है।

इन्हें भी पढ़ें

  1. अधिगम के सिद्धांत तथा नियम
  2. अधि गम का व्यवहारवाद सिद्धांत
  3. अधिगम का क्रिया-प्रसूत सिद्धांत
  4. अधिगम का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत

बाहरी कड़ियां

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